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फिल्म दोस्ती पार्ट ….. खोजों?

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शशिकांत गुप्ते

आज सीतारामजी फिल्म शोले का यह गीत सुन रहे थे।
यह गीत गीतकार आनंद बक्षी जी ने लिखा है।
सीतारामजी ने गाने का वॉल्यूम बढ़ाकर मुझसे कहा आप भी सुनो।
ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे
तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ ना छोडेंगे
ऐ मेरी जीत तेरी जीत तेरी हार मेरी हार
सुन ऐ मेरे यार
तेरा ग़म मेरा ग़म तेरी जान मेरी जान
ऐसा अपना प्यार
खाना पीना साथ है, मरना जीना है।

मैने पूछा आज आपको इसी गाने को सुनने की इच्छा क्यों हुई?
सीतारामजी ने कहा आप जानते हो न मै व्यंग्यकार हूं।
मैने पूछा इस गाने का व्यंग्य से क्या संबंध है?
सीतारामजी यह गाना युगल गीत है। इसे दो अभिनेताओं पर फिल्माया है।
एक के पास सदी के नायक का खिताब है और दूसरा धर्म नाम का इंद्र है। इंद्र के दरबार की महिमा सर्व विदित है। इंद्र के दरबार में सुरा सुलभ रीति से उपलब्ध थी और अप्सराएं भी विराजित थी? ऐसा कथा में लिखा है?
बहरहाल मुद्दे की बात यह है कि,फिल्म में दोनो अभिनेताओं ने आदतन अपराधी का ही अभिनय किया है।
एक अभिनेता जो फिल्म में ठाकुर का अभिनय करता है,मतलब ही वह जन्मस्थ ठाकुर होता नहीं है,और यही ठाकुर पुलिस के आला अधिकारी का भी अभिनय करता है।
यह ठाकुर इन दोनों अपराधियों को डाकुओं से लड़ने के लिए अपने घर बुलाकर उनके आवास निवास की भी व्यवस्था करता है।
ठाकुर का अभिनय करने वाला अभिनेता लोहा लोहे को काटता है इस कहावत को फिल्मी अंदाज में चरितार्थ करने के लिए इन दोनों अपराधियों का ही सहयोग लेता है।
एक बात गौर करने वाली है,फिल्म में पुलिस के आला अधिकारी दोनों हाथ डाकू ही क्रूरता से काटता है।
व्यवहारिक जीवन में जब किसी रसूखदार अपराधी को पकड़ने में प्रशासन असहाय हो जाता है,
तब कहा जाता है,प्रशासन के हाथ बंधे है। (इसे यूं भी लिख सकते हैं, कि,अपराध करने वाले बंदे ने पेटी या खोके ले दे कर हाथ बांध रखें हैं?)
फिल्म की कहानी में क्रूरता की इंतिहा हैं। एक ही परिवार के सभी लोगों की नृशंस हत्या दिखाई है।
फिल्म की लंबाई बढ़ाने के लिए कुख्यात डाकू का अभिनय करने वाले को जेल से भागने का अवसर प्रदान किया है।
(एक बात understood है कि, प्रशासनिक व्यवस्था के साथ बगैर सांठ गांठ कोई भी व्यक्ति जेल से कैसे भाग सकता है?)
सीतारामजी ने कहा मैंने फिल्म के इतने ही दृश्य का व्यंग्य के रूप में प्रयोग किया है।
फिल्मों के अंत में दर्शकों के सिर्फ मनोरंजन के लिए खलनायक का अंत बताया जाता है।
वास्तविक जीवन में ऐसा संभव नहीं है। वास्तविक जीवन में तो एक बार जो अपराधी भागता है,वह विदेश में स्वच्छंद होकर पर्यटन करता है।
एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी गौर करना चाहिए।
फिल्मों में अभिनेता,आवारा, ४२०, बेशरम, बेईमान,जानवर, जंगली,आदि के साथ शरीफ बदमाश इस तरह के रोल अदा करता है। इनदिनों शहं+शाह के रोल की भी बहुत चर्चा है।
शहं+शाह का नाम स्मृति में आते ही उक्त गीत गुनगुना ने का मन करता है।
ये दोस्ती हम…..?

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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