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*एक क्लिक पर मिलेंगे जमीनों के 100 साल पुराने दस्तावेज,जबलपुर कलेक्ट्रेट में पहला डिजिटल रिकॉर्ड रूम*

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मध्यप्रदेश के जबलपुर में जमीन के 100 साल पुराने दस्तावेज भी आसानी से मिलेंगे। जबलपुर कलेक्ट्रेट में मध्यप्रदेश का पहला डिजिटल रिकॉर्ड रूम बनकर तैयार है। एक क्लिक पर डॉक्यूमेंट आपके सामने होंगे। जमीनों के दस्तावेज स्कैन करके डिजिटल तो किए ही गए हैं, उन्हें प्लास्टिक के डिब्बों में संभालकर रिकॉर्ड रूम में रखा गया है।

मध्यप्रदेश के जबलपुर में जमीन के 100 साल पुराने दस्तावेज भी आसानी से मिलेंगे। जबलपुर कलेक्ट्रेट में मध्यप्रदेश का पहला डिजिटल रिकॉर्ड रूम बनकर तैयार है। एक क्लिक पर डॉक्यूमेंट आपके सामने होंगे। जमीनों के दस्तावेज स्कैन करके डिजिटल तो किए ही गए हैं, उन्हें प्लास्टिक के डिब्बों में संभालकर रिकॉर्ड रूम में रखा गया है।

सीएम मोहन यादव ने किया डिजिटल रिकॉर्ड रूम का लोकार्पण

digital record room jabalpur Collectorate
डिजिटल रिकॉर्ड रूम का लोकार्पण करते हुए सीएम मोहन यादव

जबलपुर में जमीन से जुड़े कागज करीब 48 लाख

जबलपुर में 1909-10 से लेकर आज तक का राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध है। 116 साल में जमीन के कागजों की संख्या करीब 48 लाख हो गई है। इनमें से 14 लाख डॉक्यूमेंट्स को स्कैन करके डिजिटल फॉर्मेट में तैयार कर लिया है।

तहसील और नाम बताने की जरूरत

पहले जमीन के रिकार्ड तलाशने में कर्मचारियों की जरूरत होती थी। अब MP का पहला राजस्व रिकार्ड रूम पूरी तरह से डिजिटल हो गया है। तहसील और नाम बताने पर एक क्लिक से राजस्व रिकॉर्ड की जानकारी आपको मिल जाएगी।

प्लास्टिक के डिब्बों में सुरक्षित डॉक्यूमेंट

digital record room jabalpur
रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखे जमीनों के डॉक्यूमेंट्स

राजस्व मामले और पुराने दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से प्लास्टिक बैग में डालकर प्लास्टिक के बॉक्स में रखा गया है। हर प्लास्टिक बॉक्स में तहसील के हिसाब से कलर कोडिंग है। मौजा वार, वर्ष वार, मद वार केस के डिटेल स्टिकर लगाए हैं। हर रैक की शेल्फ को एक यूनिक नंबर दिया गया है।

ऑनलाइन एप्लीकेशन पर अपलोड रिकॉर्ड

डिजिटल रिकॉर्ड रूम की सारी जानकारी ऑनलाइन एप्लिकेशन तैयार करके उस पर अपलोड की गई है। आवेदक घर बैठे मोबाइल ऐप से रिकॉर्ड प्राप्त कर सकता है। जबलपुर के कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने रिकॉर्ड से जुड़े डॉक्यूमेंट्स तलाश करने का सरल तरीका निकाला है। प्लास्टिक के डिब्बों में रिकॉर्ड को कई सालों तक सुरक्षित रख सकते हैं। रिकार्ड रूम को बैंक लॉकर की तरह बनाया है। किस तहसील और किस नाम का रिकॉर्ड कंप्यूटर के जरिए एक क्लिक पर आसानी से पता चल जाएगा।

Ramswaroop Mantri

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