इंदौर
गन्ने की खेती के लिए बीड़ (महाराष्ट्र) मजदूरी करने गए खरगोन और बुरहानपुर के 12 मजदूर और 7 बच्चों को मारपीट कर बंधक बना लिया गया। वहां ठेकेदार उनसे लाठी की जोर पर काम कराते और ठीक से खाना भी नहीं देते। शिकायत के बाद खरगोन पुलिस का दल मजदूरों को छुड़ा लाया है।
12 फरवरी को रतिगढ़ देहरी गांव के प्रेमसिंह ने पुलिस अधीक्षक खरगोन से शिकायत की थी कि गांव के लोग मजदूरी करने महाराष्ट्र गए थे वो वापस नहीं आए हैं। वहां उनके साथ मारपीट की जा रही है। एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने आईजी हरिनारायणचारी मिश्रा को मामला बताया। इसके बाद आईजी ने महाराष्ट्र पुलिस के अफसरों से बात की और खरगोन एएसपी नीरज चौरसिया को वहां टीम भेजने को कहा। एएसपी ने सहायक थानेदार अजय दुबे, श्रम निरीक्षक निलेश उईके और राहुल मुवेल की टीम बनाकर बीड़ रवाना किया। टीम ने बीड़ जाकर थाना सिरसला पुलिस से संपर्क किया। बीड़ एसपी ने भी टीम के साथ जिले का पुलिस बल भेजा। पुलिस बल ने देहगांव में दबिश दी। यहां से 19 लोगों को छुड़ाया गया। पुलिस ने बताया कि मुक्त कराए गए मजदूरों में 3 डेहरी बड़वाह , 2 काबरी धूलकोट , 5 घोडी बुजुर्ग चैनपुर , एक बुरहानपुर और एक अन्य जगह का निवासी है । इनके साथ 7 बच्चे भी छु़ड़ाए गए। महाराष्ट्र पुलिस ने बंधक बनाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज किया है।
12 घंटे कराते थे काम, चार से पांच लोग करते थे निगरानी
ठेकेदार के चंगुल से छूटकर आए मजदूरों ने कहा- सुबह 6 बजे से गन्ना कटाई पर लगाया जाता था , शाम 6 बजे तक काम लेते। काम के बाद में खेत से बाहर नहीं जाने देते थे। चार से पांच लोग हमेशा निगरानी करते थे। खाने में भी केवल मक्का, आलू देते थे। वापस आने की बात करते तो ठेकेदार के आदमी पिटाई करते।





