
डॉ. प्रिया मानवी
पित्त की पथरी पित्ताशय में मौजूद पाचक द्रव (पित्त) का ठोसावस्था में जमा होना है। यह भारत में सामान्य आबादी के 10-20% को प्रभावित करने वाली एक बहुत ही सामान्य बीमारी है।
यदि पित्ताशय में मौजूद पित्त में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल एंजाइम नहीं घुला पाता है तो यह ठोस बन कर पत्थर का आकार ले लेता है। इसके अलावा अगर पित्त में बहुत अधिक बिलीरुबिन होता है, जैसे यकृत के सिरोसिस या कुछ रक्त विकारों में तो यह पत्थर के गठन का कारक होता है। अंत में, यदि पित्ताशय अच्छी तरह से खाली नहीं होता है, तो इससे ठहराव और पत्थर का गठन होता है।
40 वर्ष की आयु से अधिक महिलाओं में पित्त की पथरी देखी जाती है। मोटापा, गतिहीन जीवन शैली, अत्यधिक वसा युक्त लेकिन रेशे की कम मात्रा वाले आहार, मधुमेह और पित्त की पथरी के पारिवारिक इतिहास कुछ सामान्य जोखिम कारक हैं।
पित्ताशय की पथरी ऐसे किसी भी लक्षण का कारण नहीं हो सकती है, जहां इसे मौन या संयोग से पहचाने गए पथरी के रूप में जाना जाता है। अन्यथा आम लक्षण में पेट के दाहिने हिस्से में पंजर के नीचे दर्द होता है। यह दर्द गंभीर हो सकता है और पीठ या दाएं कंधे तक फ़ैल सकता है। रोगी को पेट में भारीपन, मतली और उल्टी का अनुभव होता है जो भोजन करने के ठीक बाद और ज्यादा हों जाता है। यदि पथरी पित्त नली में खिसकता है तो पीलिया या तेज बुखार हो सकता है।
हर किसी को पथरी के इलाज की आवश्यता नहीं होती है। मूक पथरी को बारीक़ निरीक्षण में रखा जा सकता है। अन्य सभी रोगियों को जिन्हें पित्त की पथरी से संबंधित लक्षण (दर्द, बुखार, पीलिया, अग्नाशय में सूजन) अनुभव हुए हैं उन्हें चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। पित्त की पथरी और पित्ताशय के कैंसर के इतिहास वाले व्यक्तियों और परिवारों को भी उपचार की आवश्यकता होती है।
आधुनिक चिकित्सा के अनुसार पित्त की पथरी का उपचार आमतौर पर शल्यचिकित्सा द्वारा किया जाता है जिसमें पित्ताशय को शरीर से निकाल दिया जाता है (कोलेसीस्टेक्टॉमी)। यह एक लेप्रोस्कोपिक या कीहोल सर्जरी है जिसमें पेट में छोटे छेद के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की जाती है। एलोपैथ के अनुसार पित्त की पथरी को खत्म करने के लिए अन्य कोई उपचार प्रभावी नहीं होता है। लेकिन यह पूरा सच नहीं है.
एक उचित वजन बनाए रखना पित्त की पथरी को कम करने का सबसे सही तरीका है। नियमित व्यायाम और कम कैलोरी वाला आहार पथरी को दूर रखने में मदद करता है। भोजन को ना करने से बचें क्योंकि इससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जो लोग अपना वजन कम करने का इरादा रखते हैं, वे इसे बहुत तेज़ी से नहीं करें। आपका लक्ष्य 500 ग्राम से 1 किलोग्राम/सप्ताह कम करना होना चाहिये।
*कारगर है अल्टर्नेटिव उपचार :*
हम वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे आविष्कारों को घेरे में नहीं ले रहे, अपितु यह बताना चाहते हैं कि भले ही साइंस ने इतनी तरक्की कर ली हो लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो खत्म होने की बजाय और भी बढ़ती चली जा रही हैं। इन्हीं शारीरिक परेशानियों में से एक है ‘पित्त (गॉल ब्लैडर) की पथरी’।
आमतौर पर 85 प्रतिशत लोगों के पित्ताशय में यह पथरी चुपचाप पड़ी रहती है। इनसे कोई कष्ट नहीं होता। जिन लोगों को पेट के दाएं ऊपरी हिस्से में दर्द होता है उन्हें पथरी की समस्या हो सकती है।
गॉल ब्लैडर जिसे हम ‘पित्ताशय’ कहते हैं वह हमारे लीवर के ठीक साथ होता है। यह नाशपाती के आकार का थैलीनुमा अंग होता है जो हमारे लीवर के ठीक नीचे पाया जाता है। सामान्यतः इसका कार्य पित्त को इकट्ठा करना एवं उसे गाढ़ा करना है।
*पाचक रस के लिए :*
यदि आप नहीं जानते तो बता दें कि ‘पित्त’ एक पाचक रस है जो कि लीवर द्वारा बनाया जाता है। यह वसायुक्त पदार्थों के पाचन में मदद करता है। यह पित्त हमारे शरीर को किसी प्रकार का नुकसान ना पहुंचाए इसका ख्याल रखता है ‘गॉल ब्लैडर’।
लेकिन कुछ कारणों से इसी पित्ताशय में पथरियां बन जाती हैं। यह पत्थर सैकड़ों की संख्या में हो सकते हैं, छोटे या बड़े साइज में भी।
गॉल ब्लैडर में से पथरी निकालने के लिए सामान्यत: आपने ऑप्रेशन के बारे में ही सुना होगा। इस ऑप्रेशन के दौरान रोगी के शरीर से यह गॉल ब्लैडर निकाल बाहर कर दिया जाता है।
उस समय रोगी को आराम तो मिल जाता है लेकिन उसके भविष्य के लिए खड़े हो जाते हैं कुछ संकट। उसकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और थोड़े भी वसा युक्त खाद्य पदार्थ वह ग्रहण नहीं कर सकता।
*केवल इतना करें :*
आप कुल 5 दिनों तक एप्पल जूस पीयें। सेब का यह रस घर पर ही बनाएं, बाजारी डिब्बे वाला जूस ना लें।
इन पांच दिनों में दिनभर में 3-4 सेब भी खाएं।
छठे दिन आप रात का खाना ना लें। इस दिन शाम 6 बजे आप गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच सेंधा नमक (हाई BP वाले वैद्य की देख रेख में लें), जिसे हम पहाड़ी नमक भी कहते हैं, वह लें।
इसके ठीक 2 घंटे बाद 8 बजे फिर से गर्म पानी के साथ एक चम्मच सेंधा नमक लें।
अंत में रात 10 बजे आधा कप जैतून यानि कि ऑलिव ऑयल को आधा कप नींबू के रस में मिलाकर पी जाएं।
अगले दिन सुबह आपको स्टूल के साथ कुछ हरे पत्थर मिलेंगे।
सबसे रोचक बात ये है कि इस विधि को अपनाने से कोई साइड इफेक्ट भी नहीं और इसे कितनी भी उम्र के लोग अपना सकते हैं





