-विवेकरंजन सिंह ,वर्धा
लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा,अमेठी की सीट पर गहमागहमी का माहौल हमेशा ही बना रहता है। एक प्रकार से यह भी कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनावों का असर यहां के लोकसभा चुनावों पर भी पड़ता है। गांधी परिवार का गढ़ रहा अमेठी इस बार के लोकसभा चुनाव में कुछ ज्यादा ही चर्चा में हैं। वर्तमान सांसद स्मृति ईरानी की उम्मीद और आशाओं के विपरीत कांग्रेस ने राहुल गांधी को टिकट न देकर अपने विश्वसनीय कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को टिकट दे दिया है। जिसके बाद से अमेठी का चुनावी समीकरण ही बदल गया है। राहुल गांधी बगल की सीट रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं,जो कि इससे पूर्व सोनिया गांधी की सीट रही है।
स्मृति ईरानी को यह विश्वास था कि इस बार भी अमेठी में राहुल गांधी उनके सामने होंगे। प्रत्याशी की घोषणा से पहले ही स्मृति ईरानी राहुल गांधी को खुले मंचो से ललकारती रही हैं। मगर किशोरी लाल शर्मा का नाम आने से उनकी ऊर्जा कहीं गायब होती दिखाई दे रही है। राजनीति के जानकार कांग्रेस के इस कदम को सही रणनीति बता रहे हैं। ऐसा कहा जाए कि स्मृति ईरानी के नहले पर दहला मारा है कांग्रेस ने।
सभाओं में स्मृति ईरानी के विरोध की भी खबरें आ रही हैं। जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता पिछले लोकसभा चुनाव की अपेक्षा काफी कम हुई हैं। वही यह भी अंदाजा लगाया जा रहा था कि अमेठी की नई पीढ़ी के लिए किशोरी लाल शर्मा का चेहरा नया है। ऐसे में कहीं कांग्रेस को नुकसान न उठाना पड़े। मगर जिस तरह अमेठी में कांग्रेस का माहौल बनता दिखाई दे रहा है उससे यह नहीं लगता कि शर्मा का चेहरा लोगों के लिए नया है।
किशोरी लाल शर्मा पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से अमेठी की जनता से जुड़े हैं। राजीव गांधी के साथ उनका अमेठी में आना हुआ था तब से वो एक अडिग कार्यकर्ता के रूप में कांग्रेस के लिए काम करते रहे हैं। कांग्रेस पार्टी में एक कार्यकर्ता को इतनी महत्वपूर्ण सीट देना कांग्रेस की लगातार विस्तृत होती सोच को दिखाता है। राहुल गांधी के राजनैतिक कैरियर में पिछला दो साल काफी सुनहरा दौर रहा। इस बीच राहुल गांधी ने युवाओं, गरीबों, वंचितों और अल्पसंख्यकों का ध्यान खींचा है। वो जमकर पूजीपतियों व उद्योगपतियों का नाम लेकर उनपर वार करते रहे हैं।
हालांकि इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दो बड़े उद्योगपतियों का नाम ले लिया, जो कि लोगों के लिए अप्रत्याशित था।
अमेठी के अपने दौरों में राहुल गांधी,प्रियंका गांधी ने जनता के सामने उनके सपनों की अमेठी का चित्र उभारा है। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि कैसे मेगा फूड पार्क जैसी योजनाओं को बंद कर भाजपा सरकार ने वहां के स्थानीय लोगों को रोजगार से वंचित किया।
इस बार अमेठी का माहौल एकदम अलग बन चुका है। एक समय में कांग्रेस पार्टी से विधायक बनते रहे राजा संजय सिंह और उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह भी भाजपा में हैं। सपा के नेता और पूर्व राज्य मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति जेल में हैं ऐसे में स्मृति ईरानी ने उनके परिवार का भी फायदा उठाना शुरू कर दिया है। गायत्री प्रसाद प्रजापति के बच्चे उनकी सभाओं में भाजपा के लिए वोट मांगते दिखाई दिए।
इन पांच सालों में अमेठी में स्मृति ईरानी ने जो विकास किया है वो उनके भाषणों में आता रहता है। सड़क और फ्लाइओवर से बाहर वो नहीं निकल पा रही हैं। उधर राहुल गांधी एच ए एल, पेट्रोलियम संस्थान, ट्रिपल आई टी और मेगा फूड पार्क जैसी परियोजनाओं से जनता का ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं। गांधी परिवार की अमेठी से जुड़ी यादों को ताजा करते हुए वो गांव गांव रैलियां कर रहे हैं। प्रियंका गांधी ने अमेठी में जमकर प्रचार करना शुरू कर दिया है। स्मृति ईरानी ने जो घर अमेठी में बनाकर जनता का समर्थन और उनकी सहनुभूति बटोरने की कोशिश की थी, कांग्रेस ने उस पर पल भर में पानी फेर दिया है। स्मृति ईरानी को पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते जो वोट मिला था, जीत का अंतर कुछ खास नहीं था। अगर ऐसा ही माहौल रहा तो कांग्रेस के लिए उस अंतर को पाटना मुश्किल नहीं लग रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस के इस कदम को ‘ भयभीत होकर भाग जाना ‘ बताया। मगर उधर कांग्रेस समर्थकों ने लिखना शुरू किया कि स्मृति ईरानी को हराने के लिए कांग्रेस का एक कार्यकर्ता ही काफी है। इंडिया गठबंधन के चलते अमेठी में समाजवादी पार्टी अपना प्रत्याशी तो नहीं उतारेगी, मगर सपा समर्थक दो गुटों में बंट सकते हैं। फिर भी कांग्रेस का पलड़ा कई मायनों में भारी होता दिखाई दे रहा है। गायत्री प्रसाद प्रजापति के बेटों द्वारा भाजपा के प्रचार का समर्थकों पर ज्यादा असर नहीं दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि राजा संजय सिंह स्मृति ईरानी से खफा चल रहे हैं। इधर स्मृति ईरानी को अमेठी के एक बड़े उद्योगपति की सहायता करने से भी जोड़ा जा रहा है। ऐसे में अमेठी में स्थानीय नेताओं द्वारा एक दूसरे के प्रति समर्थन और विरोध से कांग्रेस ही भारी पड़ रही है। बसपा से जुड़े बड़े नेता भी कांग्रेस के मंचों पर दिखाई दे रहे हैं। अमेठी की जनता में ओबीसी और एस सी समाज के लोग यह भलीभांति समझ रहे हैं कि किन मजबूरियों के चलते गायत्री प्रसाद प्रजापति के बेटे स्मृति ईरानी की सभाओं में उसका समर्थन कर रहे हैं। कुछ महीने पहले गायत्री प्रजापति के अमेठी निवास पर ईडी का छापा भी पड़ा था और उनके बेटे को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
कुल मिलाकर कहा जाए तो कांग्रेस ने स्मृति ईरानी के सामने चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। अमेठी की जनता कांग्रेस द्वारा किए गए कार्यों की चर्चा कर रही है। जनता सड़क, फ्लाई ओवर की जगह मेगा फूड पार्क जैसे कारखाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। मोदी लहर भी इस बार फीकी पड़ गई है ऐसे में कांग्रेस के इस किले को भेदना भाजपा के मुश्किल होता जा रहा है। स्मृति ईरानी को समय लग सकता है, अमेठी की ‘ स्मृति ‘ से ‘ गांधी परिवार ‘ का नाम मिटाना।





