सुसंस्कृति परिहार
किसान आंदोलन में मुंह की खाने के बाद केंद्रीय सरकार ही नहीं बल्कि भाजपा की तमाम राज्य सरकारें इन दिनों बैकफुट पर आ गई हैं इसलिए अब साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का उपक्रम जारी है।हाल ही में वसीम रिज़वी के हिंदू धर्म में आने का जिस तरह मीडिया ने बखेड़ा किया वह भी सरकार की सोची समझी साज़िश का हिस्सा है। मुस्लिमों को उद्वेलित करने का । मुस्लिमों की चुप्पी और सहजता से इसे लिया जाना ,हमारे संविधान की जीत है। हालांकि बड़ी संख्या में शिया लोगों के अपने समाज से उपेक्षा से परेशान होकर धर्मपरिवर्तन करने की भी सूचना है। इससे पहले बागपत और फैज़ाबाद में यह सब हुआ है। लेकिन वसीम रिज़वी के आने से संघियों और उनके अनुषंगी संगठनों की छाती फूली हुई है।वे अतीव उत्साह में हैं और अब अन्य अल्पसंख्यकों पर उनकी नज़र है।

मध्यप्रदेश में विगत दिनों दक्षिण पंथी ताकतों ने मिलकर गंजबासौदा के सेंट जोसेफ स्कूल में धर्मान्तरण के नाम पर हमला बोल दिया। जिसमें तीन सैकड़ा के लगभग विश्व हिन्दू परिषद,बजरंगदल और हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्त्ता शामिल थे। उन्होंने स्कूल का गेट तोड़ा और दीवार लांघी।अंदर पहुंचकर कार ,खड़े वाहनों और स्कूल की खिड़कियों के कांच तोड़े। अफ़सोसनाक और शर्मसार करने की बात यह कि उस दौरान बारहवीं बोर्ड का प्री टेस्ट चल रहा था।इनका कहना था कि 31अक्टूवर को आठ बच्चों का धर्म परिवर्तन कराया गया।ये आठ बच्चे बाहरी राज्यों के थे।इसका वीडियो भी उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी कर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ माहौल बनाया। उन्हें इस बात पर आपत्ति है कि बच्चों को ब्रेनवाश के लिए वे अपना साहित्य पढ़ने देते हैं।कलावा,बिंदी आदि लगाने नहीं दी जाती । मसीही प्रार्थना होती है। बिल्कुल जब किसी खास मज़हब के विद्यालय में आप जाते हैं तो यह होता ही है ।सरस्वती विद्यालयों, मदरसों में क्या होता देखने की ज़रूरत है ।अब तो सरकारी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में सरस्वती पूजन और यज्ञ भी होने लगे हैं फिर आपत्ति क्यों ? दिक्कत है तो वहां बच्चे ना भेजिए। महत्वपूर्ण बात ये है कि गंजबासौदा के प्रशासनिक को इनकी तैयारियों की बराबर जानकारी थी।स्कूल मैनेजमेंट ने भी जानकारी मिलते ही सुरक्षा की मांग की थी। किंतु शासन की हां में हां मिलाने वाले यहां के प्रशासन ने करीबी क्षेत्रों विदिशा, गुलाबगंज, त्योंथा, नटेरन से बड़ी संख्या में पुलिस बल का इंतजाम तो किया किंतु विद्यालय दो से चार पुलिस कर्मियों के सहारे छोड़ दिया।
बाद में घटना की खबर फैलते ही प्रशासन गंजबासौदा से लेकर भोपाल तक जाग उठा।11लोंगो को गिरफ्तार किया गया तथा 50 लोगों पर कार्रवाई की ख़बर है, लेकिन गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान कि धर्मपरिवर्तन की गतिविधियों में शामिल लोगों की जांच के साथ ही विदेशी फंडिंग की जांच करायेंगे से इन असामाजिक तत्त्वों के हौसले बुलंद हुए। मुख्यमंत्री ने भी कहा कि धर्मांतरण करा रहे एन जी ओ को प्रदेश में रहने का कोई अधिकार नहीं वे भी विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले गैर सरकारी संगठनों की जांच कराने की बात कह रहे हैं।इन दोनों बयानों से तो यही लगता है कि सरकार यहां धर्मपरिवर्तन के बहाने जांच आदि कर असामाजिक तत्वों को खुश करना चाहती है।
सबसे बड़ी बात ये है कि प्रदेश के मुखिया को उन बच्चों की तनिक भी फ़िक्र नहीं जो कितनी परेशानियों से गुज़र कर अपना 12वीं परीक्षा का प्री टैस्ट दे रहे थे।और ना उन बच्चों की चिंता जो बाहरी राज्यों से यहां पढ़ने आए थे।यह तो निश्चित ही है कि वे दलित या पिछड़े वर्ग के उपेक्षित और पीड़ित बच्चे होंगे, उनके बारे में कुछ संवेदनशीलता दिखाई जाए।ना ही विद्यालय की तोड़ फोड़ से उन्हें मतलब रहा । उन्हें तो सिर्फ अपने नफरती एजेंडा से मतलब था । जिसके लिए उन्होंने तत्काल घोषणाएं भी कर दीं।
यह मध्यप्रदेश में जब तब होता रहता है खरगौन, झाबुआ, रायसेन ही नहीं बल्कि दमोह ,सागर में भी क्रिश्चियन समाज के विद्यालयों पर इस तरह के आक्षेप लग चुके हैं किंतु सब टांय टांय फिस्स ही रहा ।इस घटना के बारे में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उनके अनुसार एक पिछले किसी कार्यक्रम को लेकर मनगढ़ंत वीडियो बनाकर एक झूठा प्रोफगंडा कूटनीतिक तौर पर रचा गया ताकि कथित हिंदुत्ववादी ताकतें समाज में अपनी अहमियत दिखा सकें तथा वर्तमान सरकार के अच्छे कार्यकर्ता की सूची में शामिल हो सकें। सारी कवायद जनवरी में होने वाले जिलापंचायत एवं नगरपालिका,परिषद और निकायों में टिकिट लेकर कुछ पद पाने की है ।जब जब चुनाव आते हैं ये संगठन अपनी ताकत दिखाकर नेताओं को प्रभावित करते हैं। सरकार और प्रशासन का वरदहस्त इन्हें प्राप्त होता है।ताज़ा जानकारी के मुताबिक इस घटना को अंजाम देने वाले प्रमुख लोगों को रिहा कर दिया गया है।जैसा कि अमूमन होता है।
कुल मिलाकर ये घटना सिर्फ़ और सिर्फ़ साम्प्रदायिक माहौल ख़राब करने और अपने राजनैतिक स्वार्थ सिद्ध करने की एक नाकाम कोशिश है।जनता अब इन हथकंडों को समझने लगी है।भले ही वह ख़ामोश हो। इतिहास वेत्ता, सामाजिक चिंतक राम पुनियानी जी की एक बात यदि याद रखें तो इस झमेले को समझा जा सकता है कि “यदि ईसाई बनाने का सिलसिला चल रहा होता तो वे 2.6%से घटकर 2.3%ना हुए होते।”





