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अंगारों पर अंगारों-सी नाचती लड़कियां

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दिव्यांशी मिश्रा

उन लड़कियों की
सपाट छातियों पर
स्पंज की उभरी चोली है।
लड़की जितनी छोटी हो
उतनी उसकी देह में
लचक होती है।
लड़की जितनी कम जानकार हो
उतनी ही आसानी से
भीड़ उसकी देह
टटोल सकती है।

समय से पहले चोली लहंगे के नीचे
छुपी देह
भीड़ का आकर्षण है।
भीड़ चाहती है लड़की के देह के
सौ सौ टुकड़े भले हो जाएं पर
उनकी मुठ्ठियों में उसके देह की गर्मी
निचोड़ी जा सके।

भीड़ बेलगाम है
नाच की नहीं आग की
दुकान है
लपटें आसमान है
जवान लड़कों की
भड़कती बेकाबू सांस है
लड़की नहीं जादू है.

बार बार उन नाचती
लड़कियों की
सपाट छातियां
नोची जाती हैं।
सौ-सौ के नोट
उसकी देह के
किस अनजाने रास्ते
भीतर ठूस दे
इसकी होड़ लग रही है।

लड़की नाचती-नाचती
बेजान हुई जा रही है
लेकिन मंडली
उसकी इस बात से
अनजान है।
उसे भीड़ के चीलों के ऊपर
बोटी की तरह फेंका जा रहा है
और उसकी देह को
किसी गेंद की तरह
अपने हाथों और बाहों में
लपका जा रहा है।
कोई भी हाथ
किसी भी हद को
तोड़ उसकी देह के
हर अंग पर जाने को
बेकाबू है।
लड़की की देह का
यही तो जादू है।

बारह-चौदह साल की
बेटियों को कैसे बरतते हैं
भीड़ भूल गई है।
इस रात में उसे
नोच लेने का कितना चांस मिले
उसकी हंसी उतनी ही चौड़ी है।
रुपयों के लिए
नाचती लड़कियों को
अपने आगोश में बैठा कर
कामुक होने वाली मर्दजात
अपने घर की बहन बेटियों को
एक खरोच भी आ जाए तो
कैसे तड़प जाती है?
पराई लड़की से
आखिर कितना मजा
लेते हो कायरों ?

कितनी लड़कियां देखी
जो नाचती हुई किसी
सदमे में रहती हैं!
भीड़ से डरती हुई
राख हुई रहती हैं!
बार- बार कपड़े को
सलीके से ठीक करती हैं!
बार-बार नाखूनों की टीस को
बर्दास्त करती हैं!
नाचने को भले ही बजार में
उतरी हैं लडकियां!
पर कपड़े तुम क्यों
उतार रहे हो उसके?
तुम्हें क्यों लगने लगा है
कि वह एक बेजान गुड़िया है
उसके अंदर जान ही नहीं है।
क्या तुम्हें उसके दर्द का
गुमान ही नहीं है?

उसकी देह में कितने भी
रास्ते होते घुसने के
तुम सबसे होकर
निकल जाते हो।
अपने मुंह से उसकी
छाती पर रगड़ते जब भी
कोई भीड़ देखती है
तो तुम्हें लगता है कि
ये क्या शै बनाई है
भगवान ने?

लड़कियां नहीं मानी
जा रही इंसान
हर दिन किसी छोटी लड़की
को देख लगता है डर
क्या यही थी उस
रात की रोशनी में
भीड़ के ऊपर
क्या नाखूनों से
घायल होगी
क्या हाथ लगाने पर
चीखेगी
यही तो लग रही
भीड़ की हैवानियत पर
कुचले जा रही किसी
नाजुक फूल सी
यहीं लड़की है
यही होगी
ऐसी ही तो
जिसके छोटे से
ब्लाउज में देर तक
हैवान डालते रहे रुपए.

किसी दिन हाथ
अंदर डाल कर
कलेजा भी
निकाल लेंगे ये
अंगारों पर
अंगारों सी
नाचती लड़कियों
अपने नाखूनों की
धार को बनाए रखना!!

Ramswaroop Mantri

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