-विश्वबंधु कमलगुप्ता
इन्दौर में करीब छः:दशक से आटो लुहारी के शहर में सबसे नामी लुहार छोटे खां “छुट्टन उस्ताद” का आज सुबह इंतकाल हो गया। इस खबर ने ही समूचे शहर के आटो जगत को झंझकोर रख दिया है। उस्ताद पेशे लुहार थेऔर आटो लाइन में कार जीप के अच्छे कारिगर ही नहीं कलाकार भी थे। उनके हाथों में हुनर इस कदर था कि घड़ी (बेंड) हो गई कार जीप को चेसिस से लेकर पूरी बाड़ी बिना मशीनरी के हू बहू कम्पनी के माडल की तरह खड़ी अर्थात पुनः: जैसी थी वैसी तैयार कर देते थे।यह बात सुनी सुनाई नहीं आंखों देखी है। उस्ताद का गैराज पहले हाईकोर्ट के सामने था जो अब सम्राट होटल के सामने दरगाह के पीछे है। उनसे काम करवाने वालों में अमूमन शहर भर के रईस मोटर मालिक तो थे ही टेक्सी लाइन में भी लोकप्रिय थे किसी का एक्सीडेंट हो जाये और उसके पास पैसे न हो तो वे जुगाड़ कर उसका काम निकाल देते थे।उस्ताद वाकई रहम दिल व मिलनसार इंसान थे,उनकी वजह से कई टेक्सी चालक मोटर मालिक बन गये।और जिनकी हेसियत कार रखने की नही थी उनकी कारें चलती रही। उस्ताद का आटो लाइन में जो मान सम्मान था उसके कारण से कार जीप मालिकों का, मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल,कुशिंग, पेंटग सर्विसिंग,आटो पार्ट्स व टायर विक्रेताओं आदि में काम समय पर, किफायत से व बेहतर हो जाता था।
उस्ताद से मेरा व मेरे परिवार का तीन पिढ़ियों का सम्बन्ध रहा है।उस्ताद व उनके परिवार का हमारे परिवार से सुख दुख का साथ रहा है।आज हमारा परिवार उनके इंतकाल से व्यथित हैं,शोक संतप्त है।उस्ताद के परिवार में उनके बेटे साजिद व शानू है।साजिद भी काबिल लुहार है व उस्ताद के सच्चे शागिर्द है तथा उन्हीं के नक्शे कदम पर चल रहें हैं।
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–विश्वबंधु कमलगुप्ता एडवोकेट इंदौर





