अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

हरियाणा में किसानों पर बढ़ते हमले चिंताजनक

Share

सुसंस्कृति परिहार 

 लगता है पांच राज्यों के चुनाव निपट जाने के बाद केंद्रीय सरकार किसानों के तंबू उखाड़ने की तैयारी में है।यही वजह है किसान संयुक्त मोर्चे प्रमुख राकेश टिकैत पर एक भाजपाई हमला कर देता है और हरियाणा की खट्टर सरकार पुलिस से किसानों पर डंडे चलवाकर उनके ना केवल सिर फोड़ता है बल्कि बहुत से किसानों को पीट पीट कर रक्तरंजित कर देता है । दोनों घटनाएं अप्रत्याशित नहीं है। किसान आंदोलन सरकार के गले की फांस बन चुका है।   

          अपने तीन सौ से अधिक साथियों को खो देने के बाद भी केंद्रीय सरकार का अनदेखी करना किसानों के न हौसले की आग में घी का काम कर रहा है।स्मरण करिए विभिन्न विरोध प्रदर्शन स्थलों पर हुई किसानों की मौत पर हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने  विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि वे (किसान) घर पर रहते तब भी उनकी मौत हो जाती।इसका कैसा असर किसानों पर हुआ होगा ?याद करिए किसानों के फैसले के बाद कृषि कानूनों के विरोध में हरियाणा में भाजपा का विरोध लगातार जारी है।इसी कड़ी में शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल भाजपा सांसद अरविंद शर्मा के पिता की 17वीं में शामिल होने रोहतक पहुंचे। इस दौरान किसानों ने सीएम के दौरे के विरोध में प्रदर्शन किया। सुबह किसान मस्तनाथ विश्वविद्यालय में बनाए गए हेलीपैड की तरफ बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोका जिसके बाद पुलिस और किसानों के बीच हिंसक झड़प हो गई।बताते हैं किसानों के पथराव में पुलिस कर्मी घायल हो गया है। वहीं भड़के किसानों ने बैरिकेड उखाड़ दिए। कड़ी सुरक्षा के बीच सीएम के हेलीकॉप्टर के लैंडिंग की जगह डेढ़ घंटे में दो बार बदली गई। सीएम के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग की व्यवस्था पुलिस प्रशासन ने बाबा मस्तनाथ मठ परिसर में की। यहां बोहर के किसानों के हंगामे के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में हेलीकॉप्टर लैंडिंग की जगह बदल कर पुलिस लाइन परिसर कर दी।वहीं सीएम के विरोध में किसानों ने बोहर गांव के पास प्रदर्शन किया रहे  हालांकि शोक सभा स्थल और प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच कई किलोमीटर की दूरी थी पर विरोध कर रहे किसानों ने गिरफ्तारियां भी दी।इससे पहले भी  सीएम मनोहर खट्टर की पानीपत में ऐसी ही स्थितियों में 26जनवरी के ध्वजारोहण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था ऐसे में  खट्टर, पानीपत की बजाय पंचकूला के एक कार्यक्रम में ध्वजारोहण करने जाना पड़ा था ।ज्ञातव्य हो कृषि कानूनों के विरोध में हरियाणा सरकार के मंत्री बनवारी लाल को किसानों ने दिखाए काले झंडे अंबाला में दिखाकर वापस जाने मजबूर किया था । आश्चर्यजनक रुप से जिस गांव को हरियाणा के गृह, शहरी स्थानीय निकाय एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने गोद लिया था, उसी गांव में  किसानों ने विज को काले झंडे दिखा दिए। सिर्फ इतना ही नहीं किसानों ने यह भी कह दिया कि गांव में भाजपा व जजपा नेताओं की एंट्री पर विरोध किया जाएगा। उसके बाद

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने  मंत्री विज का विरोध किया।  किसानों को समझाने में पुलिस के पसीने छूट गए। किसी तरह पुलिस ने मंत्री विज की कार को वहां से निकाला। श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर मंत्री विज पंजोखरा साहिब गुरुद्वारा में माथा टेकने पहुंचे थे।

माथा टेकने के बाद जब मंत्री वापस जाने लगे तो पंजोखरा गांव के किसानों ने मंत्री की कार के पास हंगामा शुरू कर दिया। जहां हंगामा किया, वहीं काले झंडे दिखाए। पुलिसकर्मियों व सुरक्षाकर्मियों के भी हाथ पांव फूल गए। किसानों ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़क पर हैं।

 इन घटनाओं का जिक्र इसीलिए ज़रूरी था क्योंकि हरियाणा सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री इसके भुक्तभोगी हैं लेकिन पुलिस के साए में जाकर जिस तरह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं वह शर्म़नाक है । आखिरकार सरकार अपने किसानों से आंख मिलाकर बात क्यों नहीं करती?इस तारतम्य में एक और घटना तरोताजा है जब किसानों ने पंजाब के मलोट में अबोहर के भाजपा विधायक अरुण नारंग के साथ आक्रोशित होकर जो कुछ किया वह निंदनीय है लेकिन जब किसान सूचित कर चुके हों और उसकी अवज्ञा हो तो उत्तेजना में कुछ भी हो सकता है । जनप्रतिनिधि और मंत्री किस मर्ज की दवा करने चुने जाते हैं ।डंडे और मारपीट कर समस्या से निजात नहीं मिल सकती है।समस्या जितनी लंम्बित होगी वह कम होने की बजाय बढ़ती जाएगी ।

        संभावना,यह भी बन रही है कि कोरोना के ख़तरे के मद्देनजर सरकार किसानों को हटने मज़बूर कर दे जैसा एन आर सी  शाहीन बाग आंदोलन का हश्र हुआ था। किसानों के साथ सख़्ती भी बरती जा सकती है । राकेश टिकैत को राज्यसभा भेजने की चर्चाएं  भी होने लगी हैं  हरियाणा और पंजाब के किसानों में टकराव के प्रयास भी चल रहे हैं  जबकि अभी तलक तो यह तय है किसान अपनी मांगों पर डटे रहेंगे। अगर सरकार ज़िद नहीं छोड़ेंगी तो आग बढ़ती ही जाएगी और साहिब

 आग जब लगती है तो कुछ ना पूछिए जनाब ,

आसमां को भी रुला देती है आग ।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें