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*जीएसटी स्लैब में परदे के पीछे से हुआ खेल,लेबर चार्जेज पर 18 फीसदी जीएसटी छोटे उद्योगों की तरलता को प्रभावित करेगा* 

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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने जीएसटी ढांचे में बदलाव कर दिया है और आम आदमी की जरूरत की लगभग हर चीज पर जीएसटी घटा दिया है. 28 फीसदी और 12 फीसदी जीएसटी स्‍लैब को तो खत्‍म ही कर दिया गया है. जीएसटी घटने से जहां आम लोगों को फायदा होगा, वहीं कंपनियों की बिक्री भी बढने की पूरी संभावना है. लेकिन, जीएसटी काउंसिल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की एक प्रमुख मांग को इस बार भी नहीं माना है और लेबर चार्जेज पर जीएसटी में कटौती नहीं है की है. एमएसएमई लेबर चार्जेज पर जीएसटी को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने की मांग कर रहे थे. विशेषज्ञों का कहना है कि 18 फीसदी जीएसटी से MSMEs की लागत बढी है, जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित होता है बल्कि बड़ी कंपनियों पर भी असर पड़ेगा जो छोटे उद्यमों से सब-कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए उत्पादन कार्य करवाती हैं.

सरकार के इस निर्णय से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) में गहरी चिंता पैदा हो गई है. उद्योग जगत का कहना है कि यह कदम छोटे उद्योगों की तरलता (Liquidity) को प्रभावित करेगा और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता घटाएगा. कोयंबटूर-तिरुप्पुर ज़िला माइक्रो एंड कॉटेज एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सी. शिवकुमार ने कहा कि लंबे समय से जॉब वर्क और सब-कॉन्ट्रैक्ट उद्योग सरकार से जीएसटी दरों में कमी की मांग कर रहे थे. उद्योगों की मांग थी कि इस पर जीएसटी को घटाया जाए ताकि छोटे कारोबारियों को राहत मिल सके.

बड़ी कंपनियों के सप्‍लायरों पर असर

द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोयंबटूर जिला स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (CODISSIA) ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है. एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को जॉब वर्क की दरों पर पुनर्विचार करना चाहिए. संगठन ने सुझाव दिया है कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे कम जीएसटी दरों का लाभ सीधे MSMEs को मिले. छोटे उद्यम बड़ी कंपनियों के सप्लायर होते हैं और केवल मज़दूरी शुल्क पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में 18% टैक्स दर उनके लिए नकदी प्रवाह को प्रभावित करेगी और कामकाज धीमा पड़ सकता है.

क्‍या है लेबर चार्जेज

लेबर चार्जेज (Labour Charges) वह शुल्क है जो किसी व्यक्ति या समूह को उनके द्वारा प्रदान की गई श्रम या मेहनत आधारित सेवाओं के लिए भुगतान किया जाता है.लेबर चार्जेज में दो तरह के लेबर कांट्रेक्‍ट होते हैं. शुद्ध मज़दूरी अनुबंध और वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट. शुद्ध मज़दूरी अनुबंध में ठेकेदार केवल मज़दूर उपलब्ध कराता है, जबकि ग्राहक सभी आवश्यक सामग्री स्वयं देता है. उदाहरण के लिए, यदि किसी बिल्डर को इमारत निर्माण के लिए केवल कुशल मज़दूर चाहिए तो ठेकेदार केवल श्रमिक उपलब्ध कराएगा.

Ramswaroop Mantri

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