कानून वापस नहीं लिए तो 2024 में दिल्ली आने का सपना छोड़ दें मोदीजी
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संस्थापक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि कृषि कानूनों को छोड़कर उनकी पीएम मोदी और अमित शाह से कोई नाराजगी नहीं है। तीनों कृषि काननूों पर एनडीए के भीतर ही चचार् नहीं की आरैर हमारी बात नहीं मानी गई तो ऐसे एनडीए में रहने का क्या फायदा, इसलिए केवल किसानों के मुददे पर मैंने गठबंधन तोड़ा। आवैसी की पार्टी के राजस्थान आने को लेकर बेनीवाल ने कहा कि ओवैसी सहित किसी पार्टी की जरूरत नहीं है, आरएलपी राजस्थान के मुसलमानों को विकल्प देगी।बेनीवाल ने राजस्थान में अगले चुनावों मेें तीसरे मोर्चे की मजबूत धमक का दावा किया है। एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में हनुमान बेनीवाल ने किसान आंदोलन, कृषि कानूनों पर बदलते स्टेंड, आवैसी की पार्टी की राजस्थान में आने की संभावनाओं, तीसरे मार्चे के भविष्य, आरएलपी बीजेपी रिश्तों में खटास, सचिन पायलट फैक्टर सहित प्रदेश के सियासी मुददों पर खुलकर बातचीत की। यहां पेश है उस इंटरव्यू के चुनिंदा अंश :
जब तीनों ऑर्डिनेंस आए थे तब आपने कहा था कि इनसे किसानों का फायदा होगा, आज आप विरोध में खड़े हैं, स्टैंड कैसे बदल लिया?
बेनीवाल : कोरोना काल में ऑर्डिनेंस आए होंगे, मैंने इन बिलों का कभी सपोर्ट नहीं किया। मेरा इन कानूनों के सपोर्ट में कोई वीडियो हो तो बता दीजिए। जब ये बिल लोकसभा में आए तो मेरी कोरोना की झूठी रिपोर्ट करवाकर सदन में आने से रोक दिया। बाद में मैंने जब अध्ययन किया तोउपता चला कि किसानों की जमीनें चली जाएंबगी। तीन बार कूच कियसा। आजादी के बाद पहली बार दिल्ली हाईवे जाम किया। मैं एकमात्र सांसद हूं जो सड़क पर बैठा। तीनों कषि कानूनों के शुरू से खिलाफ था।
किसान आंदोलन से आम लोगों को तकलीफ हो रही है, मागें जायज हो सकती हैं लेकिन दूसरे लोगों को तकलीफ देना कहां तक सही है?
बेनीवाल : किसानों ने हाईवे पूरी तरह बंद नहीं किया, सर्विस लाइन चालू है, वाहनों की आवाजाही हो रही है। आंदोलन से जनता को थोड़ी बहुत तकलीफ जरूर है, लेकिन देश की जनता भी किसानों के साथ है। किसान झुक गया तो देश में कुछ नहीं बचेगा।
बीजेपी के सहयोग से आप सांसद बने, आप पीएम मोदी और अमित शाह के समर्थन में बढ़ चढ़कर बयान देते थे, अचानक रिश्तों में खटास कैसे आ गई?
बेनीवाल : केवल तीन कृषि बलों को लेकर मैं नाराज हूं, मैंने बाकी सभी बिलों का समर्थन किया था। प्रधानमंत्री हमेशा कहते थे कि एनडीए मेरा परिवार है,लेकिन जब बीजेपी की तीन साौ से ज्वेयादा सीटें आ गई तो परिवार के दूसरे सदस्य जिनकी संख्या कम थीं उन्हें धीरे-धीरे दूर करते गए। उन्हें लगा कि अब छोटे सहयोगी दलों की जरूरत नहीं है। हमने कभी इनका साथ नहीं छोड़ा। इन्होंने एनडीए के सहयोगी दलों से भी नहीं पूछा, कम से कम एनडीए की बैठक में तो चर्चा करनी थी, जब हमारी बात ही नहीं मानी तो ऐसे एनडीए में रहने का क्या फायदा और मैं अलग हो गय। केवल कृषि कानूनाों के विरोध मेें आरएलपी एनडीए से अलग हुई है, इसके अलावा हमारी कोई नाराजगी या रिश्तों में खटास नहीं है। एनडीए में हम शामिल ही इसलिए हुए थे कि हम कांग्रेस मुक्त राजस्थान बनाना चाहते थे। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में तीन लाख वोट मुझे दिलाए तो मैंने भी बीजेपी को 16 लाख वोट दिलवाए।
राजस्थान में अब आप कांग्रेस-बीजेपी-तीसरे मोर्चे की पार्टी में से किसके साथ गठबंधन करेंगे?
बेनीवाल : तीसरे मोर्चे की पार्टी राजस्थान में तो फिलहाल है नहीं, पिछली बार मैंने बसपा से गठबंधन का खूब प्रयास किया था लेकिन वे आखिर तक चक्कर देते रहे, पता नहीं उनके मन में क्या था और वह गठबंधन नहीं हो पाया। आरएलपी ही तीसरी ताकत बन सकती है। आरएलपी किसान आंदोलन में जीत के बाद राजस्थान पर फोकस करेगी। हम जनता के मुद्दों को लेकर राजस्थान सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ेंगे, राजधानी का घेराव करेंगे।
आप बीजेपी के सहयोग से जीते, अब आप एनडीए से अलग हो गए, बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि दम है तो अब आपको सांसद के पद से भी इस्तीफा देना चाहिए, क्या आप यह चेलेंज स्वीकरार करेंगे ?
बेनीवाल : मुझे यह चैलेंज मंजूर है, मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं लेकिन एक शर्त है। अगर मैं बीजेपी के सहसयोग से जीता हूं तो मैंने भी 16 सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों का प्रचार कर उन्हें जताया है। जो मेरी वजह से जीते हैं, बीजेपी भी अपने सांसदों से इस्तीफा दिलवाए, चार पांच नहीं तो एक सांसद से ही इस्तीफा दिलवा दे, मैं भी इस्तीफा दे दूंगा। गुलाबंचंद कटारिया से आप भी पूछ सकते हैं कि क्या वे यह चैलेंज स्वीकार करेगे।
सचिन पायलट का खेमा कांग्रेस में अब भी सत्ता में भागीदारी का इंतजार कर रहा है, सचिन पायलट के प्रति आपका सॉफ्ट कॉनर्र रहा है, पायलट को लेकर अब क्या राय है?
बेनीवाल : हमने तो दो बार सिचन पायलट का समर्थन किया है। पहली बार जब 2018 में जब हम जीतकर आए थे तो मैंने पायल्ट को मुख्यमंत्री बनने पर पांच विधाायकों का समथ्रन देने की घोषणा की थी। तीन आरएलपी और दो अन्य विधायकों को मलाकर पांच विधायकों का सयमथर्न सिचन पायलट को दिया था। दोबारा जब अशोक गहलोत की सरकार असि्थर हो गई थी, तब आरएलपी के तीनों विधायकों ने सचिन
एनडीए छोड़ने के बाद अब अगला साथ गठबंधन किसके साथ होगा , या एकला चलो की रणनीति पर चलेंगे?
बेनीवाल : चुनाव से पहले पीएम मोदी ने एनडीए की बैठक में राजस्थान की सीटों के बारे में पूछा था कि 16-17 सीट आ जाएगी क्या, तब मैंने कहा था कि बीजेपी की 25 सीअें आएंगी और वही हुआ। राजस्थान अब तीसरे मोर्चे की दिशा में आगे बढ रहा है। कांग्रेस और बीजेपी से लड़ने वाली पार्टियां चाहे आदिवासी इलाके की हो या अनय इलाके की आगे बढ़ रही हैं।
आपने पंचायत चुनावों में देखा होगा हमने कांग्रेस बीजेपी को एक होने पर मजबूर कर दिया, कई जगह आरएलपी को हराने के लिए पंचायत चुनावों में कांग्रेस बीजेपी साथ आ गए, आदिवासी इलाके में बीटीपी को हराने के लिए भी दोनों पार्टी साथ आ गई। हमने कांग्रेस बीजेपी की यह हालत को कर ही दी। आने वाले समय में तीसारा मोर्चा सत्ता में आएगा।
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के राजस्थान में सक्रिय होने की चचार्एं हैं, कई सीटों पर सर्वे भी करवाया है, कांग्रेस से नाराज कई मुसि्लम नेता आवैसी की पार्टी को राजस्थान लाना चाहते हैं?
बेनीवाल : राजस्थान में औवैसी सहित किसी बासहरी पार्टी की कोई जरूरत नहीं है। हम राजस्थान के मुसलमान को आरएलपी से जोड़ेंगे तो वह खूब जुड़ेगा। हर जगह मुसलमान हमारी भरपूर मदद कर रहे हैं, हम भी मुसलमानों के विकास से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। हम मुसलमानों के खिलाफ थोड़े ही हैं। बाहर की दूसरी पार्टी की जरूरत ही नहीं है। राजस्थान का गठबंधन लोकल समीकरणें पर होगा।
आप राजस्थान के कांग्रेस से नारज मुसलमानों के लिए ओवैसी का विकल्प बनने को तैयार हैं ?
बेनीवाल : हम पूरी कोशिश करेंगे। हम ग्रासरूट पर जाकर मुसलमानों को आरएलपी से जोड़ने का पूरा प्रयास करेंगे। इतना कह सकता हूं आवैसी की जरूरत नहीं है, आरएलपी ही पर्याप्त है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलाेत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को लेकर आप जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उस पर मुख्यधारा के नेता ऑब्जेक्शन करते रहते हैं, दोनों के प्रति इतनी तल्खी का कारण क्या है ?
बेनीवाल : अशोक गहलोत जब विपक्ष में थे तो वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री रहते हुए घोटालों की जांच की बातें जोर शोर से करते थे, लेकिन जैसे ही सत्ता में आए कुछ नहीं किया। दोनों का यह मिलाजुला खेल जनता के लिए घातक है और इसे देखकर मुझे आघात लगा। अशोक गहलोत से मेरी कोई व्यकि्तगत लड़ाई नहीं है, मेरी तो कांग्रेस से गठबंधन की बात भी चली थी, यह अलग बात है कि वह हाे नहीं पाया।





