अग्नि आलोक
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मुसलमान से नफरत करो

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माई बाप का हुक्म है
मुसलमान से नफरत करो

हम करेंगे हुजूर
हम कर रहे हैं हुजूर
हुक्म की तामील करेंगे माईबाप
नही पूछेंगे कि क्यो करें नफरत
“क्यो” शब्द माईबाप की शान में नही बोला जाता हुजूर

हमने “क्यों” तब भी नही बोला
जब आपने कहा बौद्धों से नफरत करो
हमने की
लूटा,जलाया,भगाया
क्या-क्या ना किया,
एक दिन चुपके से आपने कहा
बुद्ध विष्णु के अवतार हैं
हमने नही पूछा
कि विष्णु पुत्र तो भाई थे हमारे
अपने ही धर्मभाईयों से नफरत का हुक्म क्यों?

आपने कहा
शूद्र से नफरत करो
हमने की हुजूर
भर-भर नफरत की
बस्तियां जलाई
लुगाईयां लूटीं
पानी-मंदिर,
तीज-त्योहार
वार-व्यवहार
सबसे खदेड़ दिया उनको

आपने कहा
हमने माना हुजूर
हमने नही पूछा
कि ये भी अपने धर्मभाई थे
इनसे नफरत क्यों?

हम बाईबाप का हुक्म बजायेंगे
जब कहेंगे आप कि सिख को उग्रवादी कहो
हम कहेंगे
जब कहेंगे आप कि ईसाई को लुटेरा कहो
हम कहेंगे
जब कहेंगे आप कि मुसलमान को आतंकवादी कहो
हम कहेंगे

गुस्ताखी माफ करें हुजूर
तो एक बात पूछें?
कि नफरत का नियम शास्वत है
या जरूरत के हिसाब से फैलाई जाती है नफरत

एक और बात पूछें माईबाप?
कि धर्म की हानि हो तो हम हथियार उठा लें
धर्म का लाभ हो तब हमें कुछ मिलेगा क्या?

वीरेंदर भाटिया

Ramswaroop Mantri

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