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ज्यादा ड्राई फ्रूट्स से दिल, किडनी और पेट बीमार

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सर्दियां यानी ड्राई फ्रूट्स खाने का मौसम। लोग इस यकीन के साथ खुद और बच्चों को भी मुट्ठी भर-भरकर काजू, बादाम और किशमिश खा और खिला रहे होंगे कि इससे वे जल्द हेल्दी हो जाएंगे, उनकी इम्यूनिटी बढ़ जाएगी। इस यकीन की वजहें हजारों बरस पुरानी हैं।

करोड़ों साल से ये ड्राई फ्रूट्स धरती पर मौजूद हैं, हजारों साल से इंसान बकायदा खेती कर रहे हैं। हालांकि, हजारों बरस पुराने अनुभवों के बावजूद ड्राई फ्रूट्स के फायदों का यह ‘सच’ आधा-अधूरा है। पूरी हकीकत जानने के लिए पढ़ें यह स्टोरी और साथ में जानें रोचक फैक्ट।

वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. एस.पी. कटियार ने बताया कि ड्राई फ्रूट्स 2 तरह के होते हैं, एक तो सुखाए हुए फल जैसे किशमिश, मुनक्का, छुहारा, अंजीर, खुबानी। दूसरे बीज, जिन्हें हम नट्स कहते हैं, जैसे कि काजू, अखरोट, बादाम।

कैसे खाएं ड्राई फ्रूट्स, क्या है सही तरीका

डॉ. कटियार ने बताया कि इंपॉर्टेंट यह नहीं है कि आप क्या खा रहे हैं, इंपॉर्टेंट यह है कि आप कैसे खा रहे हैं और शरीर उसका इस्तेमाल कैसे कर पाएगा। लोग अक्सर काजू, मूंगफली को तलकर या भूनकर खाते हैं। इससे स्वाद तो बढ़ सकता है, लेकिन पोषक तत्व कम हो जाते हैं। भिगोए हुए ड्राई फ्रूट्स खाने से गुड फैट, प्रोटीन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर सीधे शरीर को मिलते हैं और आसानी से पचते हैं।

ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर अखरोट मछली का बढ़िया विकल्प

अखरोट दुनिया के सबसे पुराने ‘ट्री फूड्स’ में से एक है, जिसकी खेती इंसान नियोलिथिक यानी न्यू स्टोन एज (नव पाषाण काल) से कर रहे हैं। पुरातत्ववेत्ताओं को दक्षिणी फ्रांस में अखरोट के 17,000 साल पुराने अवशेष मिले हैं। प्राचीन रोम और ग्रीस में इसका इस्तेमाल दवाओं में होता था।

कितनी मात्रा में ड्राई फ्रूट्स खाना सेहत के लिए अच्छा

आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि लोग मुट्ठी भर-भरकर ड्राई फ्रूट्स खाते जाते हैं। जब मन चाहा तब खा लिया। लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं है। ड्राई फ्रूट्स भारी होते हैं, कभी इन्हें अधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर बादाम और अखरोट को दिमाग के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि एक बार में बहुत सारा खा लें तो बुद्धि बढ़ जाएगी। जो चीज हम खाते हैं, वह शरीर में जाकर ट्रांसफॉर्म होकर अपना काम करती है। इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

प्राचीन इजिप्ट के फराओ खाते थे बादाम

बादाम की अहमियत का अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं कि प्राचीन इजिप्ट के फराओ को दी जाने वाली ब्रेड में बादाम डाला जाता था। सिल्क रूट के जरिए बादाम पहले स्पेन पहुंचा, फिर वहां से 17वीं सदी के मध्य में कैलिफोर्निया। आज कैलिफोर्निया में बादाम की 25 से ज्यादा वेरायटी मौजूद हैं।

उपवास में मखाना सबसे अच्छा

अगर ड्राई फ्रूट्स डालकर मेवे की खीर बना ली जाए, तो उसमें अलग से चीनी डालने की जरूरत नहीं पड़ती। मखाना चावल की जगह ले लेता है। व्रत में कुट्टू के आटे की जगह मखाना खाएं। कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से इंफेक्शन हो सकता है। यह पचाने में भी भारी होते हैं, जबकि मखाने की खीर ज्यादा फायदेमंद है।

प्रेग्नेंसी और उसके बाद खाएं मखाना-छुहारा

मखाना और छुहारा दोनों महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद हैं। डिलिवरी के बाद मखाना, छुहारा, किशमिश, बादाम, चिरौंजी से बना पाक तो पारंपरिक खानपान का हिस्सा रहा है। इस पाक को को लोग हरेरा और हरियरा भी बोलते हैं। लैक्टेशन पीरियड यानी जब बच्चा दूध पी रहा हो, तब एक छुहारे को बारीक काटकर, उसे एक गिलास दूध में खीर की तरह पकाकर मां को देना चाहिए।

बाजार से रोस्टेड या सॉल्टेड पिस्ता की जगह हरा पिस्ता खरीदें

बकलावा, हलवा और आईसक्रीम का स्वाद बढ़ाने वाला पिस्ता ईरानी मूल का है। पुरातत्ववेत्ताओं को पूर्वोत्तर इराक के पास पिस्ता के 8,750 साल पुराने अवशेष मिले हैं। 2,700 साल पहले बेबिलोन के सम्राट अपने शाही हैंगिंग गार्डन में पिस्ता के पेड़ लगाते थे। आज अफगानिस्तान से लेकर कैलिफोर्निया तक पिस्ता की खेती होती है।

Ramswaroop Mantri

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