वो बच्चों के काले लिबास से डर जाता है
वो तानाशाह है
खुद की परछाई से डर जाता है
खरीदता है तोप गोले और
तमाम बम वर्षक विमान
एक बात ये भी है कि
वो तानाशाह है
कलम से डर जाता है
लगाकर भीड़ करता है कांव कांव हर चुनावी रैलियों में
सुनता नही किसी की
वो तानाशाह है
मन की बात कर जाता है
न जाने किसको दिखाता है हाथ
न जाने किसको दिखाता है लाल आंखें
वो दुश्मनों को ललकारता है
मगर
वो तानाशाह है
सवालों से डर जाता है
वो करता है मेकअप
और सजता है दिन में पांच बार
छपवाता है अपने ही इश्तिहार हर रोज
मगर
वो तानाशाह है
आईने से डर जाता है ….
- विजय सिंह




