,,,,,,,,,मुनेश त्यागी
कुछ लोग हिंदुओं को जगाते फिरने की बात कहते फिर रहे हैं।
हम कहते हैं उनसे कहो,,,,,,
हिंदू सो नहीं रहे हैं,
हिंदू रो रहे हैं।
हिंदू रो रहे हैं,,,,,
दर्द से,
दुख से,
भूख से,
दमन से,
हिंदू रो रहे हैं,,,,
जुल्म से,
गरीबी से,
शोषण से,
अन्याय से,
हिंदू रो रहे हैं,,,,
मंहगाई से
भुखमरी से,
भ्रष्टाचार से,
अविकास से,
हिंदू रो रहे हैं ,,,,,
सरकारी अन्याय से,
झूठे नारों जुमलों से,
छल प्रपंच के नारों से,
ऊंचे नीचे की सोच से,
हिंदू रो रहे हैं,,,,,
हिंदू मुस्लिम के जहर से,
बेरोक टोक बेरोजगारी से,
ज्ञान विज्ञान के विनाश से,
लगातार बढ़ रहे अज्ञान से,
हिंदू रो रहे हैं,,,,,
छोटे बड़े की मानसिकता से,
बढ़ते जा रहे विनाशी विकास से,
तर्क विवेक से उठते अविश्वास से,
औरतविरोधी अपराधों की सुनामी से।





