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1962 के भारत चीन युद्ध में शहीद हुए जवान अन्झा पटेल की पत्नी हिरउआ पटेल को पिछले 58 साल से परिवार पेंशन का इंतजार .

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बहुत देर हुई , अंधेर भी हुआ . शहीद की पत्नी को अब हर हाल में पेंशन और सम्मान मिलना चाहिए .
रीवा  . समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि देश की रक्षा करते शहीद हुए वीर जवानों के परिवारों के लिए सेना ने कई सुविधाएं दे रखी हैं इसके अलावा राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर सहायता उपलब्ध कराती हैं लेकिन यह भारी विडंबना है कि 1962 में शहीद हुए रीवा जिले के वीर जवान अन्झा पटेल की पत्नी हिरउआ को बीते हुए 58 साल के दौरान नौकरी पेंशन कुछ भी नहीं मिला . हिरउआ पटेल रीवा जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित रायपुर कर्चुलियान जनपद के ग्राम बरहदी में उम्र के अंतिम पड़ाव में किसी तरह जिंदगी गुजर बसर कर रही है
श्री खरे ने बताया कि सन 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान रीवा जिले के ग्राम पोस्ट बरहदी जिला रीवा मध्य प्रदेश के निवासी अन्झा पटेल आर्मी नंबर 9202509 , 6 महार रेजीमेंट के जवान के रूप में नेफा में तैनात रहते हुए शहीद हुए थे . उनका पार्थिव शरीर नहीं मिल पाया था . शहादत के कुछ समय पहले अन्झा पटेल की शादी हिंदू रीति रिवाज के साथ ग्राम सथिनि तहसील सिरमौर जिला रीवा मध्य प्रदेश के निवासी राम सिया पटेल की पुत्री लप्पी उर्फ हिरउआ के साथ संपन्न हुई थी . शादी के बाद अन्झा पटेल सेना के रिकॉर्ड में नामिनी के रूप में अपने पिता श्री राम विशाल पटेल के स्थान पर अपनी पत्नी हिरउआ का नाम दर्ज नहीं करवा पाए थे . इस बीच भारत चीन युद्ध में जाने के कारण वह वीरगति को प्राप्त हुए .सेना के रिकॉर्ड में नामिनी के रूप में शहीद के पिता का नाम दर्ज होने के कारण हिरउआ के ससुर को पेंशन दी जाने लगी . इस दौरान अपने शहीद पति अन्झा की पेंशन पाने के लिए उनकी अनपढ़ पत्नी हिरउआ ने काफी प्रयास किया लेकिन उसे कोई महत्व नहीं मिला . शहीद अन्झा पटेल के पिता रामविशाल पटेल की मृत्यु सन 1971 में होने के बाद सेना से मिलने वाली पेंशन बंद कर दी गई .इसके बाद शहीद अन्झा पटेल की पत्नी हिरउआ ने अपनी क्षमता के हिसाब से सेनाध्यक्ष , सेना मुख्यालय , नई दिल्ली को लिखा पढ़ी की लेकिन उन्हें शहीद की परिवार पेंशन की मंजूरी नहीं मिल सकी . इस समय शहीद की विधवा हिरउआ करीब 78 वर्ष की हैं . उनके द्वारा करीब 58 सालों से इस संबंध में बीच-बीच में पत्राचार किया जाता रहा है लेकिन उम्र के अंतिम पड़ाव में भी न्याय नहीं मिल सका है , जिसकी दरकार बनी हुई है . देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जीवन काल से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान उनकी लिखा पढ़ी जारी है लेकिन उनकी फरियाद नक्कारखाने में तूती की आवाज बन गई है . समाजवादी जन परिषद के नेता श्री खरे ने कहा कि देश के स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ-साथ देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर जवानों की शहादत को नमन करते हुए याद किया जाता है लेकिन यह दुर्भाग्य है कि उम्र के अंतिम पड़ाव पर किसी तरह जिंदगी काट रहीं शाहिद की धर्मपत्नी हिरउआ को अभी तक शहीद पति के सम्मान में मिलने वाली पेंशन नहीं मिल सकी है .फिलहाल शहीद अन्झा पटेल की धर्मपत्नी हिरउआ पटेल अपने देवर ददई पटेल के संरक्षण में ग्राम बरहदी में रह रही हैं. श्री खरे ने कहा कि शहीद की पत्नी को दी जाने वाली पेंशन को लेकर सरकार की ओर से बहुत देर हो चुकी है , अंधेर भी बहुत हो चुका है . अब शासन को जल्दी से जल्दी उनके जीवन काल में यथोचित सम्मान , पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा देना चाहिए .

Ramswaroop Mantri

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