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इंदौर के महालक्ष्मी नगर में जलेगी ’11 मुंह’ वाली होलिका

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 इंदौर की मेन्स राइट्स संस्था ‘पौरुष’ 2 मार्च 2026 को महालक्ष्मी नगर में 11 चेहरों वाली ‘पुत्र-हंता होलिका’ का दहन करेगी, जिसमें सूचना सेठ समेत बाल हत्या की आरोपी महिलाओं के चेहरे होंगे. संस्था इसे सामाजिक जागरूकता बताती है, लेकिन पिछले दशहरा आयोजन की तरह हाईकोर्ट द्वारा रोक की आशंका है.

होली के पर्व से ठीक पहले शहर में एक सामाजिक आयोजन की घोषणा ने हलचल मचा दी है. मेन्स राइट्स के लिए कार्यरत संस्था ‘पौरुष’ द्वारा 2 मार्च 2026, सोमवार को शाम 4 बजे से 6:30 बजे तक महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड (एयू बैंक के सामने, पुष्प विहार कॉलोनी मेन रोड) पर 11 चेहरों वाली प्रतीकात्मक ‘पुत्र-हंता होलिका’ का दहन किया जाएगा.

संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक दशोरा ने बताया, यह आयोजन उन महिलाओं के खिलाफ विरोध का प्रतीक है, जिन पर अपने बच्चों की हत्या जैसे जघन्य अपराधों के आरोप हैं. संस्था का दावा है कि यह कार्यक्रम समाज में पारिवारिक मूल्यों की रक्षा और बुराई के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए है.

पुतले में इनका चेहरा मुख्य
एडवोकेट अशोक दशोरा ने बताया, पुतले में कुल 11 प्रतीकात्मक चेहरे दर्शाए गए हैं. इसमें केंद्र में बेंगलुरु की एआई स्टार्टअप सीईओ सूचना सेठ का चेहरा होगा. सेठ पर जनवरी 2024 में गोवा के एक होटल में अपने चार वर्षीय बेटे की हत्या कर शव के 34 टुकड़े करने और सूटकेस में भरकर बेंगलुरु ले जाने के आरोप हैं.

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दस चेहरे इनके
अन्य 10 चेहरों में विभिन्न राज्यों की आरोपी महिलाएं शामिल हैं. उत्तर प्रदेश की सीमा, मुस्कान, प्रियंका और दुर्गावती, तमिलनाडु की भारती और शरण्या, राजस्थान की संजू, ग्वालियर की ज्योति राठौर, हरियाणा की पूनम और गुजरात की सुनीता शर्मा. इनमें से दो महिलाओं को निचली अदालतों ने फांसी की सजा सुनाई है, जबकि अन्य मामलों में ट्रायल चल रहा है.

ये कार्यक्रम सामाजिक बुराइयों के खिलाफ
वहीं, संस्था का दावा है कि इन मामलों में व्यक्तिगत संबंधों, पारिवारिक विवादों या अन्य कारणों के चलते बच्चों की हत्या जैसे जघन्य अपराध हुए हैं. आयोजकों का कहना है कि “होलिका दहन” बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. उसी भावना के तहत यह कार्यक्रम सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता लाने के उद्देश्य से किया जा रहा है.

कार्यक्रम को लेकर ऐसी भी राय
हालांकि, ऐसे आयोजनों को लेकर समाज में भिन्न-भिन्न मत भी देखने को मिलते हैं. सामाजिक और कानूनी मामलों से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाता है, और सभी आरोपितों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार है. फिलहाल, आयोजन को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है. प्रशासनिक अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियों की जानकारी सामने आ रही है.

क्या है पौरुष संस्था?
पौरुष संस्था 2011 से सक्रिय है और 2018 में पंजीकृत हुई, जो दहेज, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण और बाल हिरासत मामलों में काउंसलिंग और मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करती है. आयोजन की थीम पौराणिक कथा पर आधारित है, जहां हिरण्यकश्यप ने बहन होलिका के माध्यम से बेटे प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की, लेकिन यहां आरोपी माताओं को लक्ष्य बनाया गया है.

Ramswaroop Mantri

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