सुसंस्कृति परिहार
जी हां, यहां किसी नौजवान के किसी लड़की के साथ भागने के बाद दम्पत्ति के रूप में घर वापसी की बात नहीं हो रही ना ही उसके प्राश्चित के अनूठे तरीके की ।ये तो आजकल भारतीय समाज की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। कुछ दशकों में हिंदू धर्म में वापसी का काम ज़ोर शोर से चला वह फिलहाल गुम हो गया है। पिछले वर्ष कोरोना के कारण भागते मज़दूरों की घर वापसी चर्चाओं में रही ।
आजकल जिस घर वापसी की चर्चा जोरों पर है वह राजनीति का अहम मुद्दा है।आप समझ ही गए होंगे कि मैं यहां दलबदलू नेताओं की घर वापसी की बात कर रही हूं ये भी सन् 1967 से सतत चल रहा राजनेताओं का आज सबसे पसंदीदा कार्यक्रम है। इस दलबदल विधान का श्रीगणेश करने वाले हरियाणा के विधायक गयालाल जी ही थे जिन्होंने एक दिन में तीन बार पार्टी बदलने का कीर्तिमान बनाया उनकी इस परम्परा को “आयाराम गयाराम “कहा जाने लगा। सन् 1967में ही मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार को विजयाराजे सिंधिया ने इसी नीति पर चलते हुए गिराकर संविद सरकार बनाई थी और गोविंद नारायण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया था। अपनी वंश परम्परा को आगे बढ़ाते हुए उनके पौत्र ज्योतिरादित्य ने भी विगत वर्ष कांग्रेस सरकार गिराकर भाजपा सरकार बनवा दी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह बने।अब केंद्र सरकार में मंत्री बनने सिंधिया बेताब हैं।
बहरहाल पिछले दशकों में ऐसे बहुतेरे अवसर आए जिनमें लोग अपने मूल घर या यूं कहें अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत करने वाली पार्टी में लौटे हैं या दूसरी पार्टी में भी गए हैं पर उन्होंने जो भी प्रायश्चित किया होगा वह चोरी छिपे ही हुआ होगा।।किंतु बंगाल में आजकल जो हम देख रहे हैं वह एकदम निराला और अनूठा दृश्य हैं घर वापसी करने वाले लोग ऐलानिया तौर पर सार्वजनिक घोषणा करते हुए क्षमा याचना कर रहे हैं। चोरी चोरी चुपके चुपके नहीं।यह भूल के लिए प्रायश्चित भाव है ।सत्ता लोलुपता इसमें नज़र नहीं आती ।जैसा सिंधिया और जतिन प्रसाद के घर छोड़ दलबदल करने में नज़र आती है।जो घर से बाहर सत्ता सुख हासिल करने लोभवश गए हैं। आपको ज्ञात ही होगा कि किस तरह बंगाल चुनाव से पहले ममता के मजबूत धड़े को भाजपा ने नारदा कांड से बचाने के आश्वासन के साथ उन्हें अपने दल में शामिल किया और भाजपा प्रत्याशी तौर पर उम्मीदवार भी बनाया लेकिन ममता के इन साथियों की अपार लोकप्रियता का फायदा लेने में भाजपा पूरी तरह विफल रही। इक्का दुक्का ही बमुश्किल जीत दर्ज करा पाए। मोदी मैजिक को ममता मैजिक ने बुरी तरह धूल चटा दी फलत: दलबदलुओं को अपनी औकात पता चल गई और अब जबरदस्त प्रायश्चित का दौर चल रहा है । तृणमूल से भागे हुए सभी लोग घर वापसी चाह रहे हैं । लोगों की थू थू के बाद ही ये नज़ारा सामने आ रहा है। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि बंगाल के इन नेताओं को ये भली-भांति समझ में आ गया है कि भाजपा का सितारा गर्दिश में है और ममता का क्रेज़ देश में विस्तार पा रहा है ।इतना ही नहीं जुम्मा जुम्मा चंद महीनों पहले भाजपा में गए कार्यकर्त्ताओं की बड़ी फौज भी घर वापसी चाहती है।जो भाजपा से जीत भी हासिल कर चुके हैं वे भी घर वापसी के इच्छुक है।यह अपने तरह का पहला मामला है जब केंद्र की तानाशाही हरकतों से ना डरते हुए लोग ममता की ओर भाग रहे हैं। यह शुभ संकेत भी है।
यह सिर्फ ममता में विश्वास नहीं दर्शाता बल्कि भाजपा के प्रति घोर विरोध का भी सूचक है। बंगाल के हालात बता रहे हैं कि वह शीघ्र ही भाजपा विहीन होने वाला है। इसका प्रमाण है हुगली और धनिआखली की गली गली में ई रिक्शा पर बंधे लाउडस्पीकर से होने वाला ऐलान जो घोषणा और माफ़ीनामा भी है– “भाजपा धोखेबाज पार्टी है।उसने हमें गुमराह किया।अब हमें समझ आ गया है कि राज्य में ममता बनर्जी का कोई बदल नहीं।अब हम भी उनके विकास कार्यक्रमों में भागीदारी करना चाहते हैं ।” बंगाल तमाम देश को घर वापसी के नये तौर तरीकों से जरिए महत्वपूर्ण संदेश दे रहा है। ज़रूरी है इसे सुना और समझा जाए ।





