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समलैंगिकता : मनोदैहिक  चुनौतियाँ और सावधानियां

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 डॉ. प्रिया

     _कुत्ता कुत्ते से, कुतिया कुतिया से, सूअर सूअर से  : यानि कोई भी प्राणी समलैंगिक सेक्स नहीं करता. यह अन नेचुरल है और जो अन नेचुरल है वह रोगकारी है. इंसान नहीं मानता क्योंकि वह खुद को सभी जीवों से ही नहीं, भगवान से भी ऊपर मानता है._

     समलैंगिक रिश्ते में हैं, तो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से अवगत रहें सावधान भी रहें!

         मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं किसी के भी साथ हो सकती हैं। पर समलैंगिक रिश्तों पर हमारा समाज इतना अजीब व्यवहार करता है कि ऐसे जोड़े अपनी समस्याओं के बारे में किसी से बात ही नहीं कर पाते।

लेस्बियन्स को समाज स्वीकार नहीं करता है. एलजीबीटीक्यू समुदाय समुदाय से जुड़े लोग भारी मानसिक तनाव और यौन समस्याओं का सामना करते हैं। एलजीबीटीक्यू समुदाय (LGBTQ Community) अभी अपनी अस्मिता की लड़ाई लड़ रहा है।

       समाज को अब भी यह समझा पाना बहुत मुश्किल है कि कोई लड़की एक दूसरी लड़की या कोई लड़का एक दूसरे लड़के के साथ भी प्रेम में हो सकता है।

     यही वजह है कि एलजीबीटीक्यू समुदाय समुदाय से जुड़े लोग भारी मानसिक तनाव और यौन समस्याओं का सामना करते हैं।

        अपने प्रेम, पसंद और अस्मिता के कारण वे समाज से अलग-थलग पड़ जाते हैं। जबकि जरूरत है हर मुद्दे पर खुलकर बात करने की। ताकि हर व्यक्ति अपनी पसंद के साथ एक स्वस्थ जीवन जी सके।

       _हम यहां विभिन्न शोधों के आधार पर हम उन स्वास्थ्य समस्याओं (common lesbian issues) का उल्लेख कर रहे हैं, जिनका सामना किसी भी समलैंगिक महिला (lesbians) को करना पड़ सकता है :_

       इसमें कोई दो राय नहीं है कि अपने जीवन काल में सभी महिलाओं को किसी न किसी स्वास्थ्य संबधी समस्या से होकर गुज़रना पड़ता है। खासतौर से लेस्बियन और बाईसेक्सुअल महिलाएं।

      जो अन्य महिलाओं के साथ यौन संबध बना चुकी होती हैं। उनके सामने बहुत सी स्वास्थ्य संबधी चिंताएं खड़ी हो जाती है। हांलाकि कई बार फैमिली हिस्टरी और उम्र की इनका एक कारक साबित होता है। मगर फिर भी इन चैलेंजिंस का सामना करने के लिए कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद ज़रूरी है।

      समलैंगिक लोग अकसर अपने लिए परफेक्ट पार्टनर के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में जो उनसे थोड़ी भी विनम्रता से पेश आता है, वे उनके प्रति आकर्षित होने लगती हैं।

*क्या कहते हैं आंकड़े?*

  मारपीट और रेप के आंकडों की बात करें, तो लेसबियन और बायसेक्सुअल महिलाओं का पर्सनटेंज इसमें ज्यादा है।

     राष्ट्रीय गठबंधन की रिपोर्ट की मानें, तो हेटेरोसेक्सयुअल महिलाएं 35 प्रतिशत, लेसबियन महिलाएं 43.8 प्रतिशत व बायसेक्सुअल महिलाएं 61.1 प्रतिशत बलात्कार व शारीरिक हिंसा का शिकार होती हैं।

_समलैंगिक महिलाओं को इन समस्याओं से बचना जरूरी :_

     *1. सोशल टैबू और मानसिक तनाव~*

     लेसबियन को डिप्रेशन और एंज़ाइटी का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। समाज में उनके प्रति लोगों का नज़रिया बदलने लगता है। उनके लिए अपनों के व्यवहार में बदलाव आने लगता है, भेदभाव होता है। क

*2. डर और यौन संक्रमण~*

       मिसबिहेव और वायलेंस जैसे समस्याएं भी पैदा हो जाती है। जो उन्हें अंदर से कमज़ोर बना देती हैं। खास बात ये है कि उन्हें समाज से भी समर्थन हासिल नहीं होता है। इससे वे खुद को अकेला और दूसरों से कम आंकने लगते हैं।

    ह्यूमन पेपिलोमावायरस, बैक्टीरियल वेजिनोसिस और ट्राइकोमोनिएसिस कुद ऐसे वायरस हैं, जो महिलाओं को आसानी से अपनी चपेट में ले सकते हैं। ओरल सेक्स और डिजिटल. वजाइनल या डिजिटल.एनल के कॉनटेक्ट में आने से इसका खतरा रहता है।

        साथ ही पेनिट्रेटिव सेक्स टायज भी इस तरह की समस्याओं को आमंत्रित करने का काम करते हैं। फीमेल सेक्सुअल कॉनटेक्ट से भी एचआईवी का खतरा रहता है। स्वस्थ और खुशहाल जीवन के लिए सेफ सेक्स सबसे ज़रूरी है।

     अगर आप एसटीडी से बचना चाहते हैं, तो आप एक स्वस्थ रिश्ते में रहे। इसका मतलब है कि बहुत से लोगों के संपर्क में आने से बचें। 

*3. एचआईवी/ एड्स~*

      समलैंगिक लोग अकसर अपने लिए परफेक्ट पार्टनर के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में जो उनसे थोड़ी भी विनम्रता से पेश आता है, वे उनके प्रति आकर्षित होने लगती हैं।

     पर भावनात्मक अंतरंगता के साथ अगर आप यौन व्यवहार में शामिल हो रहीं हैं, तो जरूरी है कि पार्टनर का एचआईवी टेस्ट करवा लें। इसमें झिझकने या डरने की कोई जरूरत नहीं है।

     अपने साथ से यौन संबध बनाने से पहले उसका टेस्ट अवश्य कराएं। ये ज़रूर जान लें कि वो एचआईवी या अन्य किसी यौन रोग की चपेट में तो नहीं है। चाहे आप किसी भी महिला या पुरूष के साथ रिलेशन में रहें, पर उसका परीक्षण अवश्य कराएं।

      अगर आप एसटीडी, हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी समेत गंभीर लीवर इंफेक्शन से बचना चाहते हैं, तो वैक्सिनेशन ज़रूरी है। इसके अलावा एचपीवी टीका 26 वर्ष की उम्र की महिलाओं के लिए उपलब्ध है।

*4. अनकन्वेंशनल सेक्स और सेफ्टी~*

      ओरल सेक्स के दौरान लेटेक्स का प्रयोग करें। इसके अलावा सेक्स टॉयज को इस्तेमाल करने से पहले उन्हं अच्छी तरह से क्लीन करें। साथ ही हर बार सेक्स के लिए नए कंडोम का इस्तेमाल करें।

      सेफ सेक्स का मतलब है कि आपके साथी के वीर्य या योनि से निकलने वाले तरल पदार्थ को आपकी योनि, एनस, पेनिस या मुंह के अंदर जाने से रोकना है।

      सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिज़ीज़ जिन्हें एसटीडी कहा जाता है, वे केवल जेनिटल्स के स्किन टू स्किन कॉन्टेक्स से फैलते हैं। अगर आपको कहीं घाव, या मसूड़ों से खून बह रहा है तो ज्यादा सावधानी की आवश्यकता है।

      जो लोग मल्टीपल लोगों से सेक्स करते हैं। उनमें ये खतरा बढ़ने की आंशका ज्यादा रहती है।

*5. सेक्स और ईमानदारी~*

      अगर आप एसटीडी से बचना चाहते हैं, तो आप एक स्वस्थ रिश्ते में रहे। इसका मतलब है कि बहुत से लोगों के संपर्क में आने से बचें और किसी एक पार्टनर के प्रति पूरी तरह से रिलायबल रहें। ऐसा पार्टनर तलाशें, जो इस तरह के किसी भी रोग से संक्रमित न हों।

      आपको शराब और ड्रग्स से भी बचने की जरूरत है। अमूमन लोग तनाव से बचने के लिए इन चीजों पर निर्भर रहने लगते हैं। जबकि ये तनाव के साथ-साथ और भी बहुत सारे जोखिमों को बढ़ा देते हैं। अगर आप रोज़ाना पीती हैं, तो शराब की मात्रा को कम करें।

     अगर आप इंजेक्टेबल ड्रग्स ले रहे हैं, तो सुइयों को साझा करने से बचें। ये भी सेक्स संबधित रोगों का कारण साबित हो सकता है।

Ramswaroop Mantri

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