*इलिका प्रिय
वह एक ऐसे दुनिया थी, जहां सब कुछ आश्चर्यजनक लगता था। कटघरे में चुन-चुन कर लोग डाले जा रहे थे, कल संगीत की बारी थी और उसे और उसके रचैता को सजा मिल गयी थी, अभी सवाल के घेरे में कलम थी, वह कलम थी, जिसपर मुकदमा चल रहा था, कलम चलाने वाले सलाखों के पीछे थे। पर कलम पर मुकदमा और लेखक को बेड़ियों में देखकर लोग स्तब्ध थे। तभी उनकी स्तब्धता को चिरते हुए वे लोग आए, जिनके हाथों में किताब थी, जिसके कवर पृष्ठ पर लिखा था- “अपराध नियंत्रण”।
वे आए और बोले – “सावधान हो जाइए, आप जिसे लेखक समझ रहे हैं वह लेखक नहीं क्रिमिनल है, उसके हाथ में जिसे आप कलम समझ रहे हैं, वह कलम नहीं बंदूक है।”
सभी मुंह ताकने लगे किसी ने डरते-डरते पूछा-“वह बंदूक कैसे हैं, साईज में तो कलम दिख रही!”
वे बोले-“हां! क्योंकि वह बंदूक कलम का वेशधरी हुई है। भ्रम में डालने के लिए कि वह कलम है।”
फिर चुप्पी छा गई।
“अच्छा पर उस कलमनुमा बंदूक से गोली तो नहीं निकल रही, स्याही ही निकल रही।”-किसी ने कहा।
“हां वह धोखा देने के लिए स्याहीनुमा गोली है।”-वे बोले।
“पर उस गोली से लोग मर तो नहीं रहे, न ही घायल हो रहे, अक्षर ही रच रहे”-एक आवाज आई।
“हां वह लोगों को भ्रमित करने के लिए मारने की जगह अक्षर बना रहे, मगर वह घातक गोली है।”-उन्होने तल्ख होकर कहा।
“पर उन रचना को पढ़कर लोग सराह रहे हैं, लोग लेखक से प्यार कर रहे, कह रहे सही बात लिखी, वे तो सच्चे शब्द लग रहे हैं। “-दिल की आवाजें शब्दों के रूप में फूटे।
“हां वह धोखा देने के लिए ऐसा लिखा गया है, पर वे बहुत ही खतरनाक है, हम उसे समाप्त करने आए हैं, हम शांति लाने आए हैं।” असहमत माथे हां में हिल गए।
“आपके हाथ में क्या है?”
“शांति का संदेश”
“पर यह तो बंदूक लग रही”
“हां शांति कायम करने के लिए बंदूक का शक्ल ली हुई है, पर यह सुरक्षा के लिए है जनता की।”
“पर इससे जो निकली है वह गोली है, “
“हां शांति के लिए गोली जैसा काम करती है”
अच्छा पर लोग डर रहे हैं इससे”
“जो डर रहे वे अशांत तत्व है, शांति के लिए अशांत तत्वों को मार डाला हमने, इसलिए वे डर रहे हैं।”
“अशांत तत्व, पर वे तो जनता लग रहे,”-फिर किसी ने कहा।
“जनता की शक्ल में सब अपराधी है, “
“पर उनके हाथ में हल है, बीज है, मजदूर-किसान…”-लोग सच जानने को आतुर हुए।
” हमें धोखा देने के लिए हैं “
” एक और सवाल! “-किसी ने कहा। शांति की दूत बंदूक तन गई, सवाल ने चुप्पी साध ली।
“अब आप सभी समझ गए, हम अशांत तत्वों का सफाया कर विकास का बेहतर काम के लिए आए है।”-वे बोले।
“हां!”- एक पेटर्न में असहमत माथे सहमति में हिल गए। वे मुस्कुराए हमने स्याह को सफेद और सफेद को स्याह बना दिया। और डरी भीड़ ने चुप्पी साध ली कि सही पहचान किये तो मारे जाएंगे। यह वह दुनिया थी जहां सब कुछ आश्चर्यजनक लगता था।





