सुसंस्कृति परिहार
अपराधियों से नफ़रत करने वाले सबको मोहब्बत का पैगाम वाले में देश का स्वरुप नया आकार लेता जा रहा है। देश की सत्ता पर जबसे तड़ी पार गृहमंत्री तथा कथित गुजरात नरसंहार के दो व्यक्तियों का राज चल रहा है। तब से सैंकड़ों अपराधियों को जिस तरह का लाभ मिला है उससे देश में अपराधियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है यह लाभ कई तरह का है किसी गुनहगार को मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बनाया गया,किसी को राज्यसभा का माननीय सदस्य तो कोई केन्द्रीय मंत्री बना बैठा है। संविधान विरुद्ध काम करने वाले लोगों की बड़ी संख्या सरकारी संरक्षण में है और वे सतत गुनाहों को अंजाम दिए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार,लूट और झूठ का शिकार प्रत्येक भारतवासी है।उसका वोट भी चोरी हो रहा है।वह क्या करे जब 2014से देश में अपराधी कहे जाने वाले लोगों के जनता पलक पांवड़े बिछाए हुए है। उनके सम्मान में नारों की झड़ी लगा देती है। उन्हें हर आंखों पर बिठाती है। उन्हें महामानव या भगवान मान लेती है।
इसलिए अब तो यह कहा जा रहा है कि यदि आपको तरक्की करनी है काम चाहिए है अपराध मुक्त होना हो तो भाजपा के मुताबिक काम करो। देखा जा रहा है कि संविधान के उलट ,कुछ भी अनाप-शनाप काम कर रहे हैं उन्हें बराबर सम्मान और काम मिल रहा है। इसमें बहुतायत भांड मीडिया,लेखक,कवि और संस्कृति कर्मी भी आते है।जिनसे नया इतिहास और झूठी गाथाओं को नया चोला पहनाया जा रहा है। मनुवादी सोच विकसित की जा रही है।एक प्रगतिशील भारत को यह सोच पंगु बना रही है।यह भी एक बड़ा अपराध है। लेकिन ये सब फल फूल रहे हैं।
एक घटना याद आती है,जब लालकिले के प्रचीर से देश के महामानव का प्रवचन चल रहा था ठीक उसी वक्त बिल्किस बानो के हत्यारों को अच्छे कार्य के लिए रिहा करते हुए जेल से लेकर उनके अभिनंदन हेतु बने मंच तक रास्ते में उन शातिर लोगों का सम्मान किया। उनके सम्मान की ख़बर पाकर अपराधी कितने खुश हुए होंगे।इसकी सहज कल्पना की जा सकती है और बेबस बिल्किस की क्या मन: स्थिति रही होगी।उसने फिर भी आवाज़ उठाई किंतु वह नक्कारखाने में तूती की आवाज़ बन कर रह गई।
इसके बाद बलात्कारी अपराधी राम-रहीम के प्रति सरकार की नरमी की बदौलत उसे कई दफा लंबे समय की पैरोल दी गई। हाल ही उसे पुनः40 दिनों की पैरोल दी गई है। आठ साल की जेल में उसने अब तक एक साल बराबर पैरोल ले ली है।लोगों का मानना है कि राम रहीम नामधारी यह शख़्स अपने कई लाख अंधभक्तों के कारण सरकार का चहेता है।वह जिसे चाहे उसे चुनाव जिता सकता है। इसलिए सरकार उसके प्रति नरमी रखती है और चुनाव होने से पूर्व उसे पैरोल दिलवाती है।खास बात ये भी है बाहर रहने पर उसे पूरी सुरक्षा भी दी जाती है।
इसी तरह मशहूर बलात्कारी सरकार का दुलारा सजा याफ्ता अपराधी आसाराम बापू है जिसे उसके अनुयाई घृणित कार्य करने के बावजूद सर आंखों पर बिठाए है। बताया जाता है कि सरकार प्रमुख से लेकर कई केन्द्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री,मंत्री उसके आशीर्वाद का फल चख रहे हैं। इसलिए वे भी आजीवन कारावास की सजा भोगते हुए फिर उसी लब्बोलुआब के साथ मंच पर जब चाहे आसीन नज़र आने लगे हैं।
हाल ही में उन्नाव गैंगरेप पीड़िता वा उसके परिवारजन का हत्यारा उत्तर प्रदेश का पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर भी आजन्म कारावास से अचानक बाहर आने वाला था किन्तु जन आंदोलनों की वजह से अदालत ने विराम लगा दिया है।यह कब तक रहेगा कहा नहीं जा सकता।
आप सब को सावरकर की किताब “इतिहास के 6 गौरवशाली अध्याय” पढ़नी चाहिए..ख़ास कर पेज नम्बर 92-102..यह किताब सावरकर की वेबसाइट पर फ्री पीडीएफ है..
इस किताब में बलात्कार को सत्ता से जोड़ा गया है..इस किताब को पढ़ कर आप को घिनौना महसूस होगा कि बलात्कार का ऐसा समर्थन सभ्य समाज में कैसे मुमकिन है.. वैसे भी बलात्कारी और बीजेपी के रिश्तों पर कुछ छुपा नहीं है..
इससे भी खतरनाक वे लोग हैं जो न्याय मूर्ति के पद पर बैठकर नेताओं को आपराधिक दंड से बचाकर निर्दोष साबित करते रहे और आज सरकार द्वारा उच्च आसनों पर विराजमान हैं।इतना ही नहीं बताया जा था है कि एक न्यायाधीश को सरकार की मंशा के अनुरूप काम ना करने पर ख़त्म कर दिया गया। दिल्ली दंगा फैलाने वाले गोली मारो…को कहने वाला मंत्री है।
पहलगाम और इससे पूर्व पुलवामा के हमलावर आज तक नहीं मिले।कहा जाता है ये हमले प्रायोजित थे पुलवामा चुनाव जीतने और पहलगाम में अडानी के होटल और व्यापार के विस्तार करने के लिए था। आपरेशन सिंदूर में सेनाओं का दुरुपयोग हुआ।सारे आतंकी पाकिस्तान को पूर्व सूचना देने के कारण भाग गए थे।जो मारे गए उनमें परिवार जन और सेवक थे।अपराधी कौन हैं पता नहीं ,हो सकता वे भी सम्मानित हो चुके हों।
देश में इस वक्त प्रवचनकारी बाबाओं का दौर चल रहा है। जिनमें बहुसंख्यक संघ के प्रचारक हैं।उनकी संविधान विरोधी और साम्प्रदायिक बातें देश में आग उगल रहीं हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं। ये भी तो संवैधानिक अपराधी है।उनको सुरक्षा और हवाई सेवाएं सरकार मुहय्या करा रही है।वे लाल कारपेट पर चलते हैं।तो दिल में तकलीफ़ होती है वे विदेशों में भी भारतवंशियों को सम्मोहित करने भेजे जा रहे हैं। इन्हें प्रशय देकर क्या संविधान की मूल भावना से खिलवाड़ नहीं हो रहा है ।
जी हां,ये सब वर्तमान सरकार की ज़रुरत है इनके बिना जय का रास्ता दुर्गम होगा। मुसलमानों के बाद अब आक्रोश की दिशा ईसाईयों और आदिवासी समाज की ओर मुड़ी है। छत्तीसगढ़ में क्रिसमस पर जो हुआ दुनिया ने देखा।हसदेव और समीपवर्ती सिंगरौली में आदिवासी जो बहुसंख्यक ईसाई हैं के साथ संघ के अनुषंगी संगठन और अडानी क्या कर रहे हैं।उन पर कोई ऐक्शन नहीं। रायपुर सिटी पर एक माल पर हमले के चित्र विचलित करने वाले हैं।
ये सब वही लोग हैं जो इस आशा की डोर से बंधे हुए हैं कि इसका प्रतिदान उन्हें मिलेगा।ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि राममंदिर की लड़ाई लड़ने वाले बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के लोग, कल्याण सिंह,उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी,लालकृष्ण आडवाणी आज कहां है?
यदि देश में अपराधियों के संरक्षण में निरंतर अपराध बढ़ते रहे तो जेल में देश के लिए चिंतित सच्चे देशभक्त लोग ही नज़र आएंगे। आज भी जब सोनम बांग्चुक जैसे प्रतिष्ठित लोग और शासकीय सेवा में जिम्मेदारी से कर्तव्य वहन करने वाले तथा ईमानदार छात्र नेता जेल में है जो इस बात की ताकीद देते हैं कि आने वाला कल अपराधियों का होगा तथा हम सब उनको शासकीय विमानों से उतरते, लाल कारपेट पर आते गगनभेदी नारों से , फूलमालाओं और अपने मधुरिम शब्दों से अभिनन्दित करते रहेंगे।
आज हमारे देश प्रमुख का प्यारा दोस्त अमेरिका का राष्ट्रपति वैनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का अपहरण कर ले गया है यह हमारे लिए शर्म की बात है।अपराधीगण उसे कैसे देखते हैं , वे जाने।





