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“लड़की हूं लड़ सकती हूं” चुनावी मैदान में होगा मुकाबला

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सुसंस्कृति परिहार
नवरात्रि पर्व हाल ही में गुजरा जिसने नारीशक्ति की ताकत ,करुणा और ममता से शायद पहली बार प्रियंका गांधी को झकझोर के रख दिया है जबकि उनकी दादी इंदिरा जी की ताकत और साहस को सारी दुनियां सलाम करती है।उनकी मां सोनिया को भले उतनी कामयाबी हासिल ना  हो पाई हो लेकिन प्रतिपक्ष की मौजूदगी और खुद को प्रधानमंत्री पद का परित्याग कर ,सबसे कारगर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बनाकर जिस तरह देश को आर्थिक संकट से बचाया । उससे सारी दुनिया चकित रह गई थी । परिवार से प्राप्त इतनी ऊर्जा ने ही प्रियंका को लड़की हूं लड़ सकती हूं कहने का माद्दा दिया है।इसके पीछे यू पी की वे तमाम घटनाएं भी हैं जिनके परिवारों से मिलकर उनमें करुणा का झरना भी फूट पड़ा। वे ऐसी घटनाओं की ख़बर सुनकर अपने आपको रोक नहीं पाती है और सम्बंधित स्थल तक पहुंचने का साहस बखूबी दिखाकर यह सिद्ध कर भी रही हैं कि लड़की हूं लड़ सकती हूं। उनके रास्ते को बार बार रोका जाता है लेकिन वे हार नहीं मानती है।

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पिछले दिनों उत्तरप्रदेश में कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने लखनऊ प्रेस कॉन्फ्रेंस में लड़कियों पर हुए अत्याचारों और उनकी बदहाल हालत का खुलासा करते हुए जब ये घोषणा की कि वे यहां होने वाले विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 40% टिकिट देंगी तो योगीराज और केंद्र की मनुवादी सरकार को सांप सूंघ गया। उन्होंने नेताओं के परिवार की महिलाओं को टिकिट देने के सवाल पर मुस्कराकर कहा कि इसमें गलत क्या है महिला कोई भी हो उसे आगे लाकर ताकत देनी है।उनकी इस घोषणा से महिला आरक्षण का विरोध करने वालों की हालत भी ख़राब है।संसद में महिलाओं के 33%आरक्षण का मसला दो दशकों से सदन में झूलता रहा है उस पर मुहर नहीं लगी पाई । प्रियंका की इस घोषणा से शोषित, पीड़ित और उपेक्षित इस तबके को राहत मिल सकती है बशर्ते महिलाएं अपनी महत्ता को स्वीकार करें।आगे संसद में आरक्षण का रास्ता भी खुल सकता है।
उत्तर प्रदेश में जिस तरह दबंगों के यौन हिंसा की शिकार महिलाएं हुई हैं और जिस तरह का उत्पीड़न वे झेल रही हैं वैसा अन्य प्रदेशों में ना के बराबर है । यहां पुलिस और सरकार के संरक्षण में आरोपी खुलेआम घूमते ही नहीं बल्कि सरकार के मंत्रियों के साथ गलबहियां डाले घूमते हैं तथा सम्मानित होते हैं। उत्पीड़न की शिकार यदि रपट दिखाती भी है तो उसके परिवार सहित उसे भी ठिकाने लगा दिया जाता है।ऐसी हाल ही में एक घटना की पुनरावृत्ति हुई जब मां बेटी को सरे आम दबंगों ने कुचल के मार डाला।सबूत नष्ट करने में पुलिस रातों-रात ऐसी महिला को जला भी देते हैं।यहीं वह प्रदेश है जहां पंचायत चुनाव के बाद जिला प्रमुख चुनाव में किसी नाम के प्रस्तावक  महिला का सार्वजनिक तौर पर चीर हरण किया  गया ।आशय यह कि उत्तरप्रदेश पूरी तरह से महिलाओं की आबरू का दुश्मन बन चुका है यहां दबंगों की दबंगई चरम पर है।
ऐसे मुश्किल भरे माहौल में प्रियंका का महिलाओं को आगे लाने का आव्हान निश्चित तौर पर काबिले गौर है। लड़की हूं लड़ सकती हूं नारे से महिलाओं में एक ताकत का कम से कम एहसास तो होगा ।यह एहसास  होना भी आज बहुत ज़रूरी है।क्योंकि जब तक लड़की अपनी क्षमताओं को नहीं पहचानेगी तब तक जुल्मज़्यादती का शिकार होती रहेगी। चुनाव में टिकिट लेकर भी उनमें लड़ने का साहस आएगा ही।हार जीत से कोई फर्क नहीं पड़ता । जुझारू और संघर्ष के लिए ,ऐसे दबंगों के क्षेत्र महिलाएं तैयार हों। चुनौतियों का सामना करें इससे बेहतर काम और कुछ नहीं हो सकता। बशर्ते काम ईमानदारी से हो। कार्यकर्ता पूरे समर्पण से साथ दें।
ध्यान देना होगा यह चुनौतीपूर्ण काम होगा जहां स्त्री दमन सदियों से रहा हो और दबंगों का दबदबा हो ।लेकिन कांग्रेस के युवा साथियों ने जिस निडरता का संकल्प लिया उससे तो यही लगता है इस जंग को वे  जीत ही लेंगे।क्योंकि एक तरफ दबंगई का ज़ोर है दूसरी ओर है करुणामयी,ममत्व से परिपूर्ण,ताकत और साहस की प्रतिमूर्ति नारी शक्ति जिसकी पूजा का ढोंग ये दबंग करते रहे हैं  सामने ललकार रही होगी।

Ramswaroop Mantri

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