
श्रीगोपाल नारसन
सुनो,सुनो,सुनो
ध्यान लगाकर सुनो
मैं अपनी बदहाली की
कलई खोल रहा हूं
मैं मणिपुर बोल रहा हूं
कानून व्यवस्था ध्वस्त हुई
पुलिस वहां की पस्त हुई
सरकार अंधी-बहरी है
अराजकता वहां जारी है
नारी अपमान सरे आम हुआ
मानवता का कत्लेआम हुआ
रक्षक भी भक्षक हो गए
प्रहरी घर जाकर सो गए
वहशी हकीकत बोल रहा हूं
मैं मणिपुर बोल रहा हूं
मणिपुर पर राजा मौन है
राहत के नाम पर गौण है
ख्याली पुलाव वह पका रहा
घिडयाली आंसू बहा रहा
नारी अस्मिता की फिक्र नही
हिंसा,अमानवीयता रुकी नही
खतरे में वहां की नारी है
बेबसता उनकी लाचारी है
अहिंसा पर हिंसा भारी है
नही न्याय की कोई तैयारी है
जलते जज्बात खोल रहा हूं
मैं मणिपुर बोल रहा हूं
राजा अब तो कुछ बोलो
मणिपुर से रूबरू हो लो
हालात काबू में आ जाए
ऐसा कोई स्टेप ले लो
चुनाव से पहले करके दिखाओ
जनता को यूं न बहकाओ
वर्ना जनता सब जानती है
हकीकत वह पहचानती है
मैं यह सब सच बोल रहा हूं
मैं मणिपुर बोल रहा हूं।





