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साहिबे आलम की भूटान यात्रा के निहितार्थ 

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-सुसंस्कृति परिहार 

पिछले दिनों जब दिल्ली के दिल लालकिले के पास भयानक ब्लास्ट हुआ तब दूसरे दिन ही बिहार में दूसरे चरण का अंतिम मतदान था। साहिबे आलम को उसी दिन भूटान नरेश के जन्मदिन पर थिम्पू जाना पड़ा।बेबसी थी यदि यूं कहें लाचारी थी। इसलिए बहुत भारी मन से भूटान पहुंच गए। भूटान में परम्परागत स्वागत कराते हुए उनके मन में पीड़ा थी।कोई पैमाना नहीं है इस जांच का इसीलिए मानना ही पड़ेगा वे ग़म से भारी दबाव में थे।एक तो चुनाव में  खराब स्थिति और फिर ब्लासट होना।

देश में तो यह कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद ये वारदातें साहिबे आलम की नज़र में कमतर हैं। पुलवामा के आरोपी और पहलगाम के आरोपी भले ना पकड़े गए हों पर दिल्ली बम ब्लास्ट के आरोपी पकड़ लिए गए हैं ऐसा बताया जा रहा जिसकी लिंक मसूद अज़हर जैसे आतंकवादी और पुलवामा में रहने वाले कथित आतंकियों से जोड़ी जा रही है। सबसे बड़ी खासियत चौंकाने वाली ये है इसमें मुस्लिम बुद्धिजीवियों का हाथ बताया जा रहा है जो प्रोफेसर और डाक्टर वगैरह हैं। हालांकि अभी फरीदाबाद में मिले ब्लास्टिंग के सामान को बड़े विस्फोटक मानने से जांच कर्ताओं ने इन्कार किया है। वह तो बताया जा रहा है शादी वगैरह में फोड़े जाने बम पटाखों का सामान है।उधर दिल्ली ब्लास्ट में जिस तरह विस्फोट हुआ उसमें आरडीएक्स की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे पुलवामा की तरह का हमला मानने से इंकार किया गया है।अभी तक इसे आतंकी हमला भी घोषित नहीं किया गया है। एक सवाल यह भी है कि इस हमले में मरने वाले मुसलमान ही अधिक है। इसलिए इस हमले के उद्देश्य पर शकोसुबह की जा रही है।

इधर जांच एजेंसियां पिछले एक माह से कई देश के आतंकियों के ठिकानों पर छापे मार चुकी है और इसकी बड़ी चैन को पकड़ने की बात की जा रही है।एक मुस्लिम डाॅ को तो जहरीले बीजों के कारण गिरफ्तार किया गया है। अब तक पकड़े गए सभी मुस्लिम हैं तो उन्हें सहजता से आतंकवादी कहा जा सकता है। जबकि पाकिस्तान को सूचनाएं देने वालों की लिस्ट बहुत लंबी है वे हिंदू हैं इसलिए उन्हें आतंकी नहीं माना जा सकता है।विदित हो,राहुल गांधी को बिहार चुनावी यात्रा के दौरान जैशे मोहम्मद नाम से डराया गया।जबकि इतने आतंकी देश में  भरे पड़े हैं।

पहलगाम हमले में भी जैशै मोहम्मद का नाम था।लेकिन आश्चर्यजनक बात है  ,जो लोगों के भेजे में तूफ़ान खड़ा किए हैं वह है उस कार के असली मालिक से पूछताछ ना होना जिसकी वह कार थी। बताया जा रहा है यह कार सलमान खान से देवेन्द्र सिंह ने खरीदी।उसने उसे दिनेश को बेच दिया। लेकिन असली मालिक की जगह पूछताछ हो रही है सलमान खान से।ऐसा क्यों समझ से परे। ज़्यादा पूछेंगे तो जवाब होगा सलमान ने ये कार चुराई थी।

दूसरी बात यह है कि अभी सरकार के वक्तव्यों के मुताबिक आपरेशन सिंदूर ज़ोर शोर से जारी है एक भी आतंकी को छोड़ा नहीं जाएगा। तो अब देश में अनेक आतंकवादी कैसे बन गए हैं हमारी सुरक्षा एजेंसियां आखिरकार कर क्या रही हैं?

एक और सवाल अवाम के दिलो-दिमाग में कौंध रहा है कि जब-जब चुनाव समीप होते हैं तो ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं। बिहार चुनाव दो चरणों में था।पहले चरण में भारी मतदान से ख़फ़ा भाजपा के चाणक्य को नागवार गुजरा फिर वे दूसरे चरण के चुनाव प्रचार बंद होने तक पटना के मौर्य होटल में बैठकर चुनाव जीतने के सारे हथकंडे अपनाते रहे और चाणक्य जी के दिल्ली पहुंचते ही दिल्ली दहल उठी।और ताबड़तोड़ मुस्लिम लोगों के पकड़े जाने का सिलसिला शुरू भी हो गया।उधर मतदान प्रक्रिया शुरू हुई।

क्या इस घटना का मतदाताओं पर असर हुआ है और उन्होंने पहले चरण 67% से ज़्यादा 70% मतदान कर दिया। बहरहाल इसका पता चुनाव परिणाम से ही चलेगा।

आईए ,अब भारी मन से भूटान पहुंचे साहिब जी की मज़बूरी का मुआयना भी कर लिया जाए। यूं ही देश को ग़मगीन हालत में छोड़कर कोई जाता नहीं है। लेकिन जनाब यह यात्रा अमेरिका में बुरे फंसे दोस्त अडानी को रोजगार दिलाने से संबंधित थी। सूत्र बता रहे हैं भूटान में अडानी कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शुरू होने वाले हैं पहली है 570mw वांगचू जलविद्युत परियोजना जो 6000करोड़ लागत की है। दूसरी 5000mw हाईड्रोपावर विकास 50,000करोड़, तीसरी गेलेपु माईंडफुलनेस सिटी में चर्चा लगभग 8.4लाख करोड़ की है।इस तरह अरबों के काम हासिल करने हों। तो जन्मदिन से मुबारक मौका कैसे छोड़ा जा सकता है। फिर जब बड़े राष्ट्र साहिब से ख़फ़ा हों ,पड़ौसी मुल्कों से सम्बंध ख़राब हो तो यह मौका छोड़ना ग़लत नहीं है।

दिल्ली भले दर्द में डूबे। देश में लोग भले परेशान हो जाएं।यार की यारी ना छूटे।यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रम्प से भले दिल बिफर जाए पर उसका प्यार भी उनकी यारी को मज़बूर करता है।रूस के रूठने से बेहतर है। डोनाल्ड और अडानी यारी।

Ramswaroop Mantri

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