सुसंस्कृति परिहार
यह निर्विवाद रूप से सच है कि हमारे प्रधानमंत्री की गरिमा दिनों दिन गिरती जा रही है जो अफसोस जनक है।देश का सम्मान विदेशों में पी एम की गरिमा से जुड़ा होता है।पहली बार दुनिया के राजनेता उस वक्त अवाक रह गए थे जब हमारे प्रधानमंत्री ने ट्म्प को भारतीय प्रवासियों की वोट की दिलाने की खातिर ना केवल न्यूयॉर्क में हाऊ डी मोदी का आयोजन किया बल्कि अपनी झूठी पब्लिसिटी के लिए नमस्ते ट्म्प उस दौरान भारत में किया जब तमाम देश कोरोनावायरस की बुरी तरह चपेट में थे।अच्छा हुआ ट्म्प की हार हुई और यह मुद्दा ठंडा गया। लेकिन दूसरे देश की राजनीति में प्रवेश कर भारत के प्रधानमंत्री ने ना केवल अपनी गरिमा को आहत किया बल्कि भारतीय जनता को कसूरवार बना दिया।एक किस्सा रूस की सरजमीं का भी बहुत आहत किया था कि जब मोदी जी भारतीय राष्ट्र गान में चलते नज़र आते हैं रुस के राष्ट्रपति उन्हें रुकने बाध्य करते हैं। राष्ट्र गान पर जो पी एम इस तरह का आचरण करें वह अक्षम्य है।

इससे पूर्व भी गुजरात नरसंहार के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने आज के प्रधानमंत्री और तब के मुख्यमंत्री से मंच पर राजधर्म निभाने कहा तो अहंकार डूबे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का क्रूरता से परिपूर्ण जवाब था राजधर्म ही तो निभाया है। मोदी जी जब भावी प्रधानमंत्री की हैसियत से 2014 में चुनाव लड़ते हैं तो अनगिनत झूठ गढ़कर जनता के दिल में उतरते जाते हैं मसलन चाय की दुकान पर चाय बेचने का किस्सा और अपनी मां का दूसरे के घर बर्तन मांजने की दुख भरी दास्तान परोसते हैं ।जबकि आर टी आई में इस बात का खुलासा होता है कि जिस सन में मोदी जी प्लेटफार्म पर चाय बेचने की बात कह रहे हैं वहां उस वक्त कोई प्लेटफार्म ही नहीं था।मां के बर्तन धोने का खंडन उनके बड़े भाई प्रह्लाद कर चुके हैं।पत्नी को भी जब तक मुख्यमंत्री रहे छुपाए रहे लोकसभा चुनाव में जब चुनाव आयोग ने ये कहा गया कि पूरी जानकारी के अभाव में फार्म निरस्त हो जाएगा तब जाके पत्नी जसोदाबेन का नाम उल्लेखित किया गया।यह दुराव और छिपाव आखिरकार क्यों किया गया यह पी एम पद के उम्मीदवार को शोभा नहीं देता।
बाद में चुनाव में तो जैसे झूठ की बौछार ही शुरू हो गई कांग्रेस के नेताओं को खासकर सोनिया गांधी के लिए कितनी अभद्र भाषा का इस्तेमाल हुआ। यहां तक कि उनके पूर्वजों नेहरू, इंदिरा को अपशब्दों के साथ जिस तरह के बेहूदे मनगढ़ंत किस्से सुनाए गए वैसा गंदा प्रचार इससे पूर्व कभी नहीं हुआ।इसी दौरान जनता को खाते में 15 लाख तथा प्रतिवर्ष दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का झांसा दिया गया।यह भी कहा गया कि नेहरू, गांधी परिवार का जो पैसा स्विस बैंक में जमा है वह वापस लाया जाएगा तथा दोषियों को जेल भेजा जाएगा।देश के वोटर ने इन बातों पर यकीन करते हुए बड़े विश्वास से झूठ के इस बादशाह को सत्ता सौंप दी। डिग्रियां जो बताई गईं वे भी झूठी साबित हुई।जनता से जन-धन खाते खुलवाए गए।लोग पागलों की अपनी जमा-पूंजी में से खाता बनाने वाले को प्रदान करते हुए खाते खुलवाए। फिर ऐलान हुआ उसमें कुछ कुछ राशि डालते रहे वरना खाता बंद होगा । आदेश का पालन बराबर हुआ।किसी के सौ किसी के दो सौ जिस से जितना बन पड़ा जमा किया और एक दिन बैंक ने ऐसे सभी खाते बंद करने की घोषणा कर दी जिनके खातों में 1000 ₹से कम थे।वे लुट गये।15लाख का सपना टूट गया।अब कल्पना कीजिए एक अरब से अधिक की आबादी में यदि पचास साठ लाख लोगों के कम से कम 100₹मान लें तो सरकार ने अरबों का खेल कर दिया गरीबों के साथ।
मैं देश नहीं बिकने दूंगा ,अच्छे दिन आएंगे नारा लगाने लगाने वालों ने देश के वे तमाम संस्थान बेच डाले। जिनमें बेरोजगार युवकों को रोजगार मिल सकता था। निजीकरण के इस दौर में रोजगार की बात तो दूर लोगों को निजीकृत संस्थानों से निकाला जा रहा है। बेरोजगारी चरम पर है।अच्छे दिन आए ज़रुर हैं पर उनके जो पी एम के कारपोरेट मित्र हैं।बाकी सब राम भरोसे।हरि अनन्त हरि कथा अनंता।आज सबसे बड़ी झूठ “मैं ज़िंदा बच गया” बोलकर प्रधानमंत्री ने एक बार फिर अपना मान पूरी दुनिया में घटाया है।पंडाल खाली मिलने की सूचना से पी एम ने अपना रूट बदला उस रास्ते पर प्रदर्शनकारियों की ख़बरें पूर्ववत थीं उन्होंने बसों से रैली में जा रहे भक्तों के लिए जाम लगाया था।प्रदर्शन करने वाले उसी किसान जत्थे के चंद लोग थे दीप सिंह के साथी जिन्होंने 26जनवरी को किसानों को ग़लत रास्ता बताकर लालकिले पहुंचाया था।ज्यादा तो मोदी भक्त ही थे। लेकिन वे बीस मिनिट दस कि भी दूर रुके रहे जैसे उनका इंतज़ार कर रहे थे। फिर ज़िंदाबाद के नारों के बीच भटिंडा एयरपोर्ट के लिए यूं टर्न लिया।और वहां ये मीठे बोल दिए अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना मैं ज़िंदा यहां आ गया। सामान्य व्यक्ति भी यह समझ सकता है उन पर कहां ख़ूनी हमला कांग्रेस ने किया।जो स्मृति जी कह रहीं हैं ।पी एम की यह झूठ थू थू करा रही है मोदीजी की प्रतिष्ठा को शुक्रवार भी झकझोर गया जब दीदी और दीदी कहने वाले मोदी को ममता ने साफ कह दिया जिसका आप उद्घाटन कर रहे हैं उसका उद्घाटन मैं कोराना काल में कर चुकी हूं।इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 530 करोड़ रुपये की लागत से बना कोलकाता स्थित चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान का उद्घाटन किया।बाद में इसे सुधार कर दूसरे परिसर का उद्घाटन कहा गया।कुल मिलाकर अच्छा हुआ आज पांच राज्यों के चुनाव घोषित हो गए। सबसे अच्छी बात ये रही कि 15जनवरी तक रैलियों और भाषणों पर प्रतिबंध रहेगा।शायद झूठ की रफ्तार कुछ थमे। लेकिन पी एम से यह उम्मीद मुश्किल ही लगती है।चिंता इस बात की है कि इससे गरिमा मोदी जी की नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री की जा रही है।कम से कम उनके सलाहकारों को रिस्क लेकर उन्हें इस बात से अवगत कराना चाहिए चूंकि यह देश की प्रतिष्ठा का भी अहम सवाल है।





