देश का सबसे बड़ा राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य सत्ता के माध्यम से हिंदुत्ववादी विचारधारा का विस्तार करना रहा है। अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए समय-समय पर होने वाले चुनाव उसके लिए चुनौती बन कर आते हैं। इन चुनावों में सफलता का फार्मूला खोज लिया गया है। समाज को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करो, बहुसंख्यक धर्मावलंबियों को अल्पसंख्यक समुदाय के नाम पर डराओ। धर्म आधारित वोटों का ध्रुवीकरण करो और चुनाव जीत जाओ। देश के कई राज्यों में इस फार्मूले को सफलतापूर्वक आजमाया जा चुका है।
*राजनीतिक संत बनते हैं सहायक*
भगवा रंग यूं तो शहादत, शोर्य और विजय का प्रतीक है। लेकिन यही रंग भाजपा के राजनीतिक प्रचार का बड़ा साधन भी बना हुआ है। उमा भारती, भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा के अलावा अनेक भगवाधारी देश की संसद और विधानसभाओं में देखे जा सकते हैं। राजनीतिक कार्यकर्ता भगवा धारण कर लें तो स्वाभाविक रूप से समाज में उनका सम्मान और मान्यता बढ़ती है। ऊपर से अगर वे वाकपटु भी हो तो सोने में सुहागा। ऐसे ही एक प्रवचनकर्ता लाखों की भीड़ जुटाने में सक्षम पंडित प्रदीप मिश्रा भी हैं, जो अपनी धार्मिक कथाओं में भाजपा और संघ के एजेंडे का प्रचार करते हैं। वर्षों तक आसाराम और राम रहीम से लेकर अनेक आरोपी प्रवचन कारों की सेवाएं ले चुकी भाजपा के नए प्रचारक के रूप में पंडित प्रदीप मिश्रा की पहचान बन रही है।
*विवादों में रहे हैं पंडित मिश्रा*
प्रदेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र “प्रभात किरण” ने अपने एक संपादकीय में लिखा है कि ” सीहोर के पंडित प्रदीप मिश्रा शिव पुराण की कथा में आर एस एस के एजेंडे पर ज्यादा बोलते हैं… उन्होंने स्वयं की तुलना रामचरितमानस के चर्चित महाकवि तुलसीदास से करते हुए उन्हें गंवार बताया। कथा के दौरान उन्होंने कहा ” हमें कुछ नहीं आता, हमें सच में कुछ नहीं आता… हम तो तुलसीदास जैसे गंवार हैं।
प्रभात किरण के संपादकीय में हिंदी के धुर विरोधी शायर फिराक गोरखपुरी ( रघुपति सहाय ) के कथन को उध्रत करते हुए लिखा है कि शायर कहता है कि ” मेरी नजर में महाकवि तुलसीदास से बड़ा संसार में कोई विद्वान कवि नहीं हुआ, जिसका लिखा दुनिया रहने तक के लिए अमर हो गया… फिराक कहते हैं कि ” जरूरत पड़ने पर ज्ञानी अपने को नासमझ बताते हैं… वे कभी भूल कर भी दूसरे को ना समझ नहीं बताते हैं। “
आगे संपादक लिखते हैं कि अपने टोने- टोटकों से महिलाओं की भीड़ खींचने वाले पंडित मिश्रा चतुराई से सनातन धर्म की आड़ में संघ के हिंदू एजेंडे पर जोर देते हैं। भक्ति की आड़ में राजनीतिक चतुराई छुपी नहीं है…. उनसे पूछा जाना चाहिए कि किसी विद्वान को मूर्ख बताना धर्म का हिस्सा है या संस्कार का अधर्म। तुलसीदास ना समझ थे ! जिनके आगे सम्राट अकबर नतमस्तक हो गया। क्योंकि तुलसीदास ने उनकी जागीर लेने से मना कर दिया था। तुलसीदास विद्वान के साथ कितने साहसी थे पंडित मिश्रा कल्पना भी नहीं कर सकते।
संपादकीय में आगे लिखा है कि तुलसीदास का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं था, जैसा पंडित मिश्रा का है। शिव कथा की आड़ में वह संविधान बदलने और हिंदू राष्ट्र की पैरवी करते हैं। शिव चरित्र में कहीं भी फूट, पक्षपात, टुटन, जलन, भेदभाव है ही नहीं…। यही बात किसी दूर में दूसरे धर्म वाले ने कही होती तो भावनाएं आहत हुए बिना न रहती।
*विवादों से रहा है नाता*
पंडित मिश्रा का विवादों से नाता रहा है। मंदसौर आने के पूर्व अशोकनगर में उन्होंने मंदसौर की बेटियों को देह व्यापार से मुक्त करवाने की बात कही थी। उनके इस बयान की जब आलोचना होने लगी तो उन्होंने सफाई में कहा कि विधर्मी सनातन धर्म को तोड़ना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने विधर्मियों के न तो नाम बताएं और नहीं पहचान।
मंदसौर में ही मीडिया के एक बड़े हिस्से को कौवे के समान बताया और कहा था कि जब तक मांस का टुकड़ा न दो तब तक वे कांव-कांव करते रहते हैं। रायपुर, नर्मदा पुरम में भी उनके विवादास्पद बयान सामने आए हैं।
एक वीडियो में उन्होंने विद्यार्थियों को परीक्षा में सफलता के लिए शहद के साथ बिल्वपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने की सलाह दी, जबकि परीक्षा में उत्तीर्ण होना या अनुत्तीर्ण होना विद्यार्थी की प्रतिभा पर निर्भर होता है।
*लाखों फॉलोवर्स हैं*
पंडित मिश्रा तब सुर्खियों में आए जब सीहोर के रुद्राक्ष महोत्सव में लाखों भक्त एक साथ आ गए, जिसके कारण इंदौर- भोपाल मार्ग पर लंबा जाम लग गया। उनकी बोलने की शैली श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। सत्ता पक्ष ही नहीं विपक्षी भी उनके सामने नतमस्तक है। यूट्यूब पर उनके 20 लाख से अधिक फॉलोवर्स हैं। उनके वाकचातुर्य और लोकप्रियता का लाभ भारतीय जनता पार्टी योजनाबद्ध तरीके से उठा रही है।
*कथा के लिए कहां से आया धन ?*
मंदसौर में ही सात दिवसीय कथा के लिए जुटाई गई सुविधाओं पर बड़ी धनराशि व्यय हुई है। सुविधाजनक बैठक व्यवस्था, मंच व्यवस्था, शौचालय, सुविधा घर, स्नानागार, वाहन पार्किंग, निजी सुरक्षा एजेंसी, भंडारे की व्यवस्था,निशुल्क आवागमन, अस्थाई अस्पताल, वाटर प्रूफ डोम के अलावा जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त किया गया अतिरिक्त पुलिस बल। ड्रोन से निगरानी का आर्थिक भार किसने उठाया कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। लेकिन इस आयोजन का राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलेगा इसमें किसी को संदेह नहीं है।
*चुनाव की तैयारी*
आगामी 2 वर्षों में विधानसभा तत्पश्चात लोकसभा के चुनाव होना है। भाजपा धर्म को टूल बनाकर वोटों का ध्रुवीकरण कर रही है। पंडित मिश्रा जी के बाद और संतों प्रवचनकारों के आयोजन प्रस्तावित हैं। इन वर्षों में क्षेत्र में कथित धर्म की गंगा बहती रहेगी जिसमें नहाकर भाजपाई पुनः सत्ता के शिखर पर चढ़ पाने में सफल होंगे। वही धार्मिक कथा के नाम पर ठगे कांग्रेसियों के पास हाथ मलने के अलावा और कुछ हाथ नहीं आना है।
हरनाम सिंह





