अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

भारत हिंदू राष्ट्र बनने के रास्ते पर

Share

,,मुनेश त्यागी 
        भारत के स्वतंत्रता संग्राम में तीन विभिन्न विभिन्न ताकतों के बीच भारत का भविष्य बुनने और बनाने की मुहिम जारी थी। पहली ताकत कांग्रेस थी जो साम्राज्यवादी लुटेरे अंग्रेजों से भारत को मुक्त कराकर भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करा कर भारत में स्वराज कायम करना चाहती थी।
      दूसरी तरफ से भारत का कम्युनिस्ट खेमा और बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में हिंदुस्तानी समाजवादी गणतंत्र संघ का क्रांतिकारी शहीदों का खेमा था जो गुलाम भारत को लुटेरे अंग्रेजों से आजाद कराकर भारत में समाजवादी, गणतंत्र संघ की स्थापना करना चाहता था। यहीं पर कम्युनिस्ट खेमा भारत को  लुटेरे अंग्रेजों की गिरफ्त से मुक्त करा कर, भारत में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, जनतांत्रिक और गणतांत्रिक व्यवस्था कायम करना चाहता था।
     तीसरी ताकतें हिंदू और मुसलमान भारत की एकता और अखंडता को खंडित करने के रास्ते पर चल रही थीं। ये ताकतें भारत में हिंदू मुस्लिम विभाजन के लिए 1906 से ही काम कर रही थीं। अंग्रेज इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे थे और हिंदू मुसलमान के नाम पर पार्टियां गठित कर रहे थे। 1925 में सांप्रदायिक आधार पर आर एस एस का निर्माण किया गया जो अपने बनने के समय से ही भारत की एकता को सांप्रदायिक आधार पर खंडित करके साम्राज्यवादी लुटेरों का साथ दे रही थी। यही काम मुस्लिम लीग जिन्ना के नेतृत्व में 1939 से कर रही थी।
    1923 में वी डी सावरकर ने एक निबंध लिखा जिसका नाम “हिंदुत्व” था जिसमें उसने अवधारित किया कि “यहां दो राष्ट्र हैं, एक हिंदू और दूसरा मुसलमान, ये दोनों एक साथ नहीं रह सकते।” सावरकर अपनी सारी जिंदगी इसी सिद्धांत पर कार्य करता रहा। 1925 के बाद, अपनी स्थापना के समय से ही आरएसएस ने यही विभानकारी एजेंडा अपना लिया और  पहले आजादी के आंदोलन में वे लुटेरों अंग्रेजों के साथ थे और आज यह ताकतें पूंजीवादी ताकतों, धन्नासेठों और पैसे वालों के साथ हैं। उनके लुटेरे साम्राज्यवादी निजाम को बनाए रखने और उन्हीं का मुनाफा बढ़ाने का काम कर रही हैं और आज तो यह चाहते सत्ता में है अतः खुलकर हिंदुत्व की नीतियों को लागू कर रही हैं।
      जब1950 में भारत का संविधान लागू किया गया तो ये हिंदुत्ववादी ताकतें तब भी भारत के संविधान का और तिरंगे का विरोध कर रही थीं। इनका मानना था कि भारत में किसी संविधान को लागू करने की जरूरत नहीं है। यहां पर तो पहले से ही मनुस्मृति लागू है। मनुस्मृति के रहते किसी अन्य संविधान की जरूरत नहीं है। ये हिंदुत्ववादी ताकतें पहले से चली आ रही वर्ण व्यवस्था ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की  हामी थीं। मनुस्मृति के अनुसार शूद्रों, दलितों, sc.st.obc और तमाम किसानों मजदूरों को पढ़ने, धन रखने का अधिकार नहीं था। उन्हें शस्त्र धारण करने का भी अधिकार नहीं था। बस उनका काम केवल ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य की सेवा करना था, उनकी गुलामी करना था उनकी दासता करना था।
     ये मनुवादी ताकतें आजादी के बाद से ही इन्हीं नीतियों को लागू करने की अलंबरदार रही हैं। उन्होंने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से आरक्षण का विरोध किया है। ये ताकतें तब भी हिंदू राष्ट्र कायम करने का काम कर रही थी और आज भी हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतों के 84 संगठन भारत में हिंदू राष्ट्र कायम करने की कोशिश कर रहे हैं। आज हकीकत यह है कि हिंदुत्ववादी ताकतें सबको शिक्षा, सब को काम, देने को तैयार नहीं हैं। आरक्षण को लगभग खत्म कर दिया गया है क्योंकि सरकारी क्षेत्र में नौकरियां खत्म कर दी गई हैं आज जनता के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च होने वाले बजट को लगातार कम किया जा रहा है, उसमें कटौती की जा रही है।
     अब इन जन विरोधी ताकतों ने अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को भी ताक पर रख दिया है और अपनी साजिश को पूरा करने के लिए इन्होंने आईएएस जैसी परीक्षाओं को भी धता बता दिया है और अभी पिछले दिनों 40 आईएएस मनमाने ढंग से प्रमोटिड किए गए हैं जिन्हें  यूपीएससी की परीक्षा में शामिल नहीं होना पड़ा है और ये सारे के सारे नियुक्त किए गए लोग द्विज वर्ग के हैं। इनमें से कोई भी एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग का व्यक्ति शामिल नहीं है। यह हिंदू राष्ट्र की ओर बढ़ने का एक कदम है।     अब ये ताकतें खुलेआम हिंदुत्ववादी मुहिम को जारी रखे हुए हैं। उन्होंने मुसलमानों को असली दुश्मन बता कर, उन्हें जनता की नजरों में हिंदू विरोधी और हिंदूओं के दुश्मन और खलनायक ठहराने की मुहिम चला रखी है। पूरी सरकार, मीडिया घराने और अधिकारी वर्ग, पैसे वाले और धन्ना सेठ उनकी मदद कर रहे हैं। गोदी मीडिया इनके काम को जोर-शोर से पूरा  कर रहा है और समाज में हिंदुत्ववादी जहर घोल रहा है।
     हिंदू धर्म वसुदेव कुटुंबकम, विश्व बंधुत्व, परहित सरिस धर्म नहिं भाई, पर पीड़ा सम नही अधमाई, जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, वह नृप अवस नरक अधिकारी, सबके लिए शिक्षा, सबके लिए बुद्धि, चोरी ना करो, क्रोध न करो, झूठ ना बोलो, इंद्रियों पर नियंत्रण रखो जैसी बातें करता है। मगर हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र का वसुधैव कुटुंबकम, विश्व बंधुत्व, शांति, समता, समानता से कोई लेना देना नहीं है। यह दबंगों, पैसे वालों, धन्ना सेठों और साम्राज्यवादी पूंजीपतियों का निजाम कायम करना चाहता है, उनका पिट्ठू और पिछ लाग्गू है, ताकि भारत में वर्ण व्यवस्था बनी रहे और वर्ण व्यवस्था के नाम पर शोषण, दमन, अन्याय, जुल्म, भेदभाव जारी रहे हिंदू राष्ट्र का विचार यहीही चाहता है।
     वामपंथी पार्टियों को छोड़कर अधिकांश विपक्षी दल इन देशविरोधी तत्वों की हिंदूकरण की मुहिम को चुनौती नहीं दे रहा है। इनमें से अधिकांश या तो डर गई हैं या चोरी-छिपे इस मुहिम का समर्थन कर रही हैं। भारत में लोकतांत्रिक तानाशाही कायम हो गई है। जनता का अधिकांश हिस्सा इन हिंदूत्ववादियों की हिंदूकरण की मुहिम में बह गया है और ये ताकतें मनुवादी रास्ता अपनाकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के रास्ते पर चल रही हैं, जो इस देश के संविधान, कानून के शासन, जनतंत्र, गणतंत्र और किसानों मजदूरों के हितों के बिलकुल खिलाफ है ।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें