निर्मल कुमार शर्मा,
युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीय छात्रों की सैकड़ों हृदयवादारक और दिल-दिमाग को झकझोर देनेवाली सैकड़ों विडियोज आजकल सोशल मिडिया पर आ रहीं हैं,जिनमें वे भारतीय बच्चे भारत से हजारों किलोमीटर दूर यूक्रेन में अपनी विवशता और दैन्य हालात का बहुत ही मार्मिक और दिल दहलाने वाला वर्णन करके अपने सगे-संबन्धियों और परिजनों को भेज रहे हैं।
उदाहरणार्थ यूक्रेन बार्डर पर ही फंसा एक भारतीय छात्र अपनी आंखों में आंसू भरे अपनी विवशता और मजबूरियों को मात्र अपनी इस 41सेकेंड की विडियो में निम्न हृदयविदारक शब्दों में अपनी बातों को अभिव्यक्त कर रहा है,जिसे सुनकर कोई भी संवेदनशील व्यक्ति हिल जाएगा !
‘हम 10 घंटे से यहां इस बार्डर पर इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हमें यहां से अभी तक कोई नहीं निकाला,कोई भी आफिसर हमें नहीं सम्हाला,हम अपने को कितना संभालें,अपने जूनियर्स को संभालते-संभालते.उन्हें कितना सम्भालें…! ये कहते-कहते..( उसका गला रूंध जाता है ) कल दोपहर के दो बजे से निकले हैं,अभी तक कोई कांटेक्ट नहीं हुआ,इससे तो अच्छा यहां मर ही जाते हम लोग ! वही कोई मिसाइल आके मार देता हमें !कोई मा-बाप ही नहीं है यहां,यहां कोई पूछने वाला नहीं है !केवल बातें हो रहीं हैं कि आपके लिए आफिसर्स खड़े हैं ! कौन आफिसर खड़ा है ? कोई नहीं खड़ा है यहां पर ! कैसे निकलेंगे हम ? … और वह बच्चा सिसक-सिसकर आंसूओं में डूबकर चुप हो जाता है..! ‘
इस लेख के साथ संगलग्न विडियो को जरा ध्यान से देखिए और उस मजबूर भारतीय बच्चे की बात को ध्यान से सुनिए कि कैसे यूक्रेन में पढ़ने वाले भारतीय बच्चों,यहां तक कि भारतीय लड़कियों तक को जो वहां से निकलने की कोशिश कर रहीं हैं,उनके शेल्टर रूम में यूक्रेन और पोलैंड के सुरक्षाकर्मी उनके साथ कैसे अभद्रता,मारपीट और उन्हें घसीट-घसीटकर मार रहे हैं ! वहां -9 डिग्री वाली कड़ाके की ठंड पड़ रही है ! भारतीय बच्चे ऐसी भयावह ठंड में खुले आसमान के नीचे वहां के रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बैठने को बाध्य हैं,वहां खाने को कुछ नहीं है ! वहां पीने को पानी तक नहीं है ! भीषण ठंड से बचने के लिए वहां कहीं भी कोई शेल्टर तक नहीं है ! भारतीय बच्चे ऐसे बदहाल और बुरी स्थिति में तीन-तीन दिन से भूखे-प्यासे मीलों पैदल चलकर जब वहां के रेलवे स्टेशनों पर पहुंच रहे हैं,तब उन्हें वहां के स्थानीय लोगों द्वारा वहां की ट्रेनों में चढ़ने तक नहीं दिया जा रहा है ! ‘इंडियन ‘नाम सुनते ही वहां के वाशिंदे ट्रेन का दरवाजा तक बंद कर लें रहे हैं ! इन्हीं बच्चों की विडियो में यह बात भी बताई गई है कि 115 भारतीय बच्चे गायब हैं ! कुछ लड़कियों को वहां सेना के कुछ असामाजिक तत्व पता है नहीं कहां ले गये ? सबसे बड़े दु:ख की बात यह है कि इतनी कारूणिक और हृदय विदारक घटनाओं की सैकड़ों विडियोज के आने के बाद भी मोदी और उनके सिपहसालारों के हृदय नहीं पसीज रहे हैं ! अभी भी मोदीजी खुद यूक्रेन से छात्रों को लाने के अपने कार्यक्रम ‘आपरेशन गंगा ‘ की कथित सफलता के नाम पर वाराणसी की चुनावी सभाओं में झूठ बोलते हुए अपनी पीठ खुद ही थपथपा रहे हैं,उधर बीजेपी आईटी सेल के दो रूपये के भाड़े के चमचे यूक्रेन में पढ़ने वाले बच्चों पर अभद्र छींटाकशी करते हुए अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी करने तक में भी कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं ! इन भाड़े के मोदी भक्त आईटी सेल के मूर्खों का कहना है कि यूक्रेन जाने वाले वे छात्र हैं जो नीट की परीक्षा में सफल होकर भारत के मेडिकल कालेजों में प्रवेश में असफल रहते हैं ! मिडिया में प्रकाशित तथ्यों के अनुसार इसका जवाब यह है ‘जहां भारत के सरकारी कॉलेजों में सालाना मेडिकल पढ़ाई का खर्च करीब ढाई से तीन लाख रुपये तक पड़़ जाता है,वहीं भारत के भारतीय प्राइवेट संस्थानों में यही फीस हर साल 10 लाख से 15 लाख के करीब पड़ती है,यानी भारत के प्राइवेट कॉलेजों में पांच साल की मेडिकल पढ़ाई का खर्चा लगभग 75 लाख से 80 लाख रुपये तक पड़ जाता है। अगर वह प्राइवेट कॉलेज प्रतिष्ठित और प्लेसमेंट अच्छा करानेवाला है तो यह खर्च एक करोड़ रुपयों तक पहुंच जाता है। वहीं यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई की फीस सालाना दो से चार लाख रुपये के बीच ही पड़ जाती है ! यानी पांच साल की पूरी पढ़ाई का खर्च वहां तकरीबन 25 लाख से 30 लाख रुपये तक ही पड़ती है। यूक्रेन जाने वाले ऐसे भी साधारण परिवार के छात्र हैं, जिनके मां-बाप अपने बच्चे को कर्ज लेकर पढ़ाने के लिए यूक्रेन जैसे देश को भेजें हैं ! मोदीजी के आईसेल के भाड़े के मिडिया कर्मी और अंधभक्त चमचे अभी भी ये कहते नहीं थकते कि मोदीजी जैसे यशस्वी व हिंदू हृदय सम्राट प्रधानमंत्री पिछले कई सदियों बाद भारत में अवतरित हुआ है ! वही कथित हिंदू हृदय सम्राट मोदीजी यूक्रेन में भारी आफत में फंसे भारतीय बच्चों की व्यथा और करूणा को बिल्कुल दरकिनार करके आजकल खुद भी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में अपनी चुनावी सफलता के लिए वाराणसी में पूजा-पाठ में बहुत व्यस्त हैं,बीजेपी का प्रवक्ता संविदा पात्रा अपने दल-बल के साथ सुस्वादिष्ट व्यंजन खाने में व्यस्त है ! बीजेपी सरकार की विदेश मंत्री दक्षिण भारत में एक कथित माफिया गुरू के बागीचे में मौज-मस्ती कर रही है अशिष्टता,अमानवीयता, असंवेदनशीलता,असभ्यता,असहिष्णुता की इंतिहा हो चुकी है ! सबसे बड़े दु :ख और बिस्तर की बात है कि दुनिया के किसी देश के इतनी बड़ी संख्या में छात्र और नागरिक युद्धग्रस्त यूक्रेन में नहीं फंसे हैं,सभी देश काफी समयपूर्व ही युद्ध शुरू होने से पूर्व ही अपने छात्रों और नागरिकों को सुरक्षित और सकुशल निकाल लाए हैं ! केवल भारत के वर्तमान कर्णधार ही इस मामले में सबसे फिसड्डी,नाकारा,कर्तव्यपथ से विचलित,देश-दुनिया की परिघटनाओं से बिल्कुल विमुख होकर केवल एक राज्य के चुनाव में व्यस्त हैं ! सबसे बड़ी चीज भारत में सामूहिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं का पूर्णतः विलोपन हो गया है ,यहां केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के शुरूआती ककहरा के ज्ञान से भी अनभिज्ञ और वंचित तथा अशिक्षित श्री नरेन्द्रदास दामोदरदास मोदी तक सिमटकर रह गया है ! मोदी मंत्रीमंडल के सभी मंत्री भी केवल वनमैन शो के चेयरपर्सन मोदी के ही आदेश की हाथ बांधे प्रतीक्षा करने को बाध्य हैं ्र ! कृपया इस संक्षिप्त लेख के साथ संलग्न विडियो भी देखें, जिन्हें वहां के भुक्त-भोगी छात्र-छात्राएं भेज रहे हैं !
–निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र- पत्रिकाओं में पाखंड, अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक, पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ‘, गाजियाबाद, उप्र,





