अमेरिका और ईरान के युद्ध को 10 दिन हो गए हैं. इस बीच ईरान में बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है. असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने सोमवार को यह फैसला लिया. इसके बाद ईरान के राजनीतिक और सैन्य संस्थान तेजी से उनके समर्थन में खड़े होते नजर आए हैं. असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने घोषणा करते हुए ईरानियों से नए नेता के प्रति निष्ठा जताने और एकजुट रहने की अपील की. परिषद ने कहा कि यह फैसला बाहरी दबाव और सुरक्षा खतरों के बावजूद लिया गया है.
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार, ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जब्बारी ने एक बेहद आक्रामक बयान दिया है. जब्बारी ने पूरी दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा, “एक जानकार व्यक्ति के तौर पर मैं यह कह रहा हूं: हम अमेरिका के साथ कम से कम 10 साल के युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उनका यह बयान साफ करता है कि ईरान लंबी लड़ाई के लिए मानसिक और सैन्य रूप से कमर कस चुका है. ‘क्लैश रिपोर्ट’ के मुताबिक, यह दावा ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में अमेरिकी दखल को लेकर टकराव चरम पर है.
ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने कहा कि अली खामेनेई की मौत के बाद दुश्मनों को लगा था कि ईरान राजनीतिक संकट में फंस जाएगा. लेकिन कानूनी प्रक्रिया के जरिए मोजतबा खामेनेई को नया नेता चुन लिया गया. उनके मुताबिक नए सुप्रीम लीडर इस ‘संवेदनशील दौर’ में देश का नेतृत्व करने में सक्षम हैं. ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी नए नेता के प्रति पूरी निष्ठा जताई है. संगठन ने बयान जारी कर कहा कि वह नए सुप्रीम लीडर के आदेशों का पूरी तरह पालन करेगा और जरूरत पड़ने पर अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार है. IRGC का यह समर्थन सत्ता परिवर्तन को स्थिर बनाए रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. ईरान की संसद के स्पीकर ने भी मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि नए नेता का अनुसरण करना धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है.
युद्ध के बीच सत्ता परिवर्तन
मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते युद्ध में उलझा हुआ है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मान रहे हैं कि ईरान उम्मीद से ज्यादा मजबूत तरीके से जवाब दे रहा है और लगातार अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि युद्ध जारी रहा तो अमेरिकी हताहतों की संख्या बढ़ सकती है.
मोजतबा को लेकर परेशान हुआ अमेरिका
पूर्व CIA प्रमुख डेविड पेट्रेयस ने कहा कि मोजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना पश्चिम के लिए चिंता की बात हो सकता है. उनके मुताबिक संभावना है कि मोजतबा अपने पिता की तरह सख्त विचारधारा वाले नेता साबित होंगे और ईरान की परमाणु और मिसाइल नीति में नरमी नहीं दिखेगी. विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति से साफ संकेत मिलता है कि ईरान की सत्ता में कठोर रुख रखने वाला धड़ा अभी भी पूरी तरह मजबूत है.
अमेरिका ने सऊदी के लिए जारी किया अलर्ट
युद्ध का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा. अमेरिकी विदेश विभाग ने सुरक्षा खतरे बढ़ने के कारण सऊदी अरब से गैर-जरूरी अमेरिकी राजनयिकों को तुरंत निकलने का आदेश दिया है. पिछले हफ्ते सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के आसपास ड्रोन हमलों की भी खबर आई थी. इसी तरह कतर, जॉर्डन, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और पाकिस्तान में भी गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को पहले ही हटाया जा चुका है. कुवैत में अमेरिकी दूतावास की गतिविधियां भी अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं.
तेल बाजार में मचा हाहाकार
इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है. मिडिल ईस्ट में तेल सप्लाई पर खतरे के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. ब्रेंट क्रूड करीब 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो रूस-यूक्रेन युद्ध यानी 2022 के बाद पहली बार इतना ऊपर गया है. तेल की इस तेजी का असर अमेरिकी बाजारों पर भी पड़ा है. अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में गिरावट देखी गई, जबकि अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 3.45 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है. यह सिर्फ एक हफ्ते में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी है.






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