क्या आप जहर तो नही पी रहे ?*
*कैसे खुलासा हो सकता है नकली दूध के कारोबार का..*
राजगढ
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गोस्वामी

जी हां आप ने सही सुना है राजगढ़ जिले में नकली दूध का कारोबार धड्डले से हो रहा है।ओर इसकी रोकथाम में सिर्फ सूचना तंत्र से ही कही कही गिनी चुनी कार्यवाही आई है।
अगर जिला प्रशासन ओर जिले के मुखिया जिला कलेक्टर इस मसले को कुछ गंभीरता से ले तो राजगढ़ जिले में असली दूध का पता बहुत आसानी से चल सकता है और इसमें होने वाली हानि को रोका जा सकता है लेकिन बिना पहल के यह संभव नहीं है।
अक्षर कुछ मामलो में तो यह देखा गया है जो व्यक्ति ऐसा कर ही नही सकता उसने भी केमिकल्स और पावडर्स के जरिए असली दूध के सात उसमे मिलावट का खेल खेलना इसलिए शुरू कर दिया कि यह सिर्फ उसके अलावा किसी को सूचना हैं ही नहीं।
कही मिलावट खोर के द्वारा गांव को छोड़कर अन्य जगह इसका अड्डा बना लिया है।और वह सिर्फ इस काले कारखाने में सफेद धंधे की आड़ की आड़ में जल्द लखपति बनने की फिराक में कोई कोर कसर नही छोड़ी जा रही है।जिससे आने वाली पीढ़ियां पर इसका कितना खतरनाक साबित होगा इसका पूर्वानुमान तक नही लगाया है।
हालाकि कुछ जानकार लोग इसमें जानते हुए भी अंजान बने हुए हैं।आखिर इस काले कारनामे का भांडा केसे फोड़ा जाए एक विचार आपके लिए साझा करते हैं इसमें अगर कुछ पहल हो तो दूध का दूध और पानी पानी सामने होगा।
*ऐसे होगा असली और नकली दूध बनाने में खुलासा*
आपको यह पता तो होगा कि दूध पशुओं से ही प्राप्त होता है।
यह कारोबार अब शहरी क्षेत्र के साथ सात ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिखने में आ रहा है….
मान लीजिए किसी गांव में 200 मवेशी है और वह दूध डेयरी 3 चल रही है।
अब 200मवेशी तो दूध दे नही रहे उसमे से कुछ ऐसे भी हैं जो आवारा हैं ओर कुछ गाय भैंस प्रेगनेंट हैं।
पशु पालन विभाग के जरिए एक विशेष समितियों का गठन करते हुए प्रति वर्ष या साल में दो बार तीन बार जिले के समस्त गांव में पशुओं की गणना होने के सात ऐसे पशुओं का रिकॉर्ड मेंटेन किया जाए जिसमे एक गांव में इतने पशु दूध से रहे हैं और पशु पालक से कितना दूध दे रहे इसकी जानकारी एकत्रित कर उस गांव में,इतना दूध उतापदन हो रहा है उसका डाटा एकत्रित कर डेयरी से वह कितना दूध बाहर सप्लाई किया जा रहा है।इस अनुमान। से दूध देने वाले डाटा और गांव से बाहर जाने वाले दूध का डाटा मैनेज किया जाए इससे साफ और स्पष्ट हो जाएगा कि इस गांव में दूध का इतना उत्पादन हो रहा है और इतना दूध डेयरी संचालक द्वारा सप्लाई किया जा रहा है।
इससे असली और नकली का मामला सामने होगा ओर जहर बनाने के इस काले कारनामे पर हमेशा के लिए रोक लगाई जा सकती है।
वही इसमें प्रशासन के सात सात स्थानीय लोगो को मदद करते हुए नकली दूध में पूरी तरह ग्रामीण समितियों की हेल्प करते हुए सारा खेल का खुलासा हो सकेगा।
अर्थात बिना दूध के रिकॉर्ड के इस जहर बनाने वाले लोगो पर अंकुश लगाना मुश्किल है।





