अग्नि आलोक
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  क्या मुट्ठी भर  सामंत ही हर रण मेंरणवीर है….?

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शोषित सदियों से
निशाना है…!
सामंत सदियों से
तीर है….!
पीड़ितों के पैरों में
हमेशा से सवर्णों की
जंजीर है….!
यह सदियों से
होता आया है…!
क्या मुट्ठी भर
सामंत ही हर रण में
रणवीर है….?
शोषित सदियों से
निशाना है…!
सामंत सदियों से
तीर है….!
अब ऐसा ना होने देंगे…!
चलो दो -दो हाथ करेंगे
अब आर-पार की
युद्ध छेड़ते हैं….
अब 15% वालों को
घेरते हैं…!
हमारी संख्या ज्यादा है
फिर भी ये क्यों
पेरते हैं…?
एक शूद्र
और
एक सामंत
कौन किसका
करता है अंत….?
आमने-सामने लड़ने का
न्योता देते हैं…!
प्रत्येक सामंत पर एक
शूद्र न्योछावर
करते हैं
15% सामंतों के पीछे…!
30% शूद्र अगर
मरते हैं
तब भी 55% शूद्र
बचते हैं….!
फिर देश में निषकंटक
राज करेंगे…!
क्या यह देश सामंतों
की है जागीर….?
क्या शूद्रों में नहीं है
कोई वीर…?
तोड़ दो इस मिथक को
शोषित सदियों से
निशाना है…!
सामंत सदियों से
तीर है…!
क्या सवर्ण देश
मंजिल है (जो कायम है )
क्या शूद्र राहगीर है
जो हमेशा भटक रहे हैं…?
सवर्णों के चेहरे पर खुशी
शोषितों के
आंखो में नीर है….!
सवर्ण सदियों से
राजा है…!
शोषित सदियों से
वजीर है…!
इतना सब होने के बाद भी
शोषित वर्ग क्यों होता
नहीं गंभीर है….?
शोषित सदियों
से निशाना है…!
सामंत सदियों से
तीर है…!
शोषितों के पैरों में
स्वर्णों की
जंजीर है…!

      - श्री हरीश पांडल, ओड़िशा, संपर्क - 72249 68577

          संकलन -निर्मल कुमार शर्मा, 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पाखंड, अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक, पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ', गाजियाबाद, उप्र

Ramswaroop Mantri

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