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*भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के पालन करने से खेती बचाना संभव है-  -मेधा पाटकर*

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  *किसान संघर्ष समिति की 324वीं किसान पंचायत संपन्न*

  किसान संघर्ष समिति की 324वीं किसान पंचायत  संपन्न हुई। किसान पंचायत में देश के विभिन्न किसान संगठनों के किसान नेता शामिल हुए।     किसान पंचायत को संबोधित करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के पालन करने से खेती बचाना संभव है। भूमि अधिग्रहण  प्रभावित क्षेत्रों में इस कानून की प्रक्रियाओं को नहीं अपनाते हुए, परियोजना कार्य को आगे बढाया जा रहा है, जो गैर संवैधानिक है। साथ ही इन परियोजनाओं से विस्थापित एवं प्रभावित अधिकांश आदिवासी हैं तथा उनके जीने और आजीविका का आधार जल जंगल जमीन छीना जाना अन्याय ही नहीं अत्याचार भी है।

    उन्होंने कहा कि किसानों को जैविक खेती की ओर भी जाना होगा क्योंकि प्रदूषण का एकमात्र कारण उद्योग ही नहीं है। खेती में बेतहाशा रासायनिक दवाइयों, कीटनाशकों का उपयोग करना भी इसका एक कारण है।

      अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण के लिए जो समझौते हुए थे और किसानों को जो संवैधानिक अधिकार मिले थे उन्हें लागू कराने की मांग को लेकर हरियाणा के सैकड़ों गांव के किसान दिल्ली आना चाहते थे लेकिन उन्हें सरकार ने सड़कों पर रोके रखा है जिसमें  महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल है।  धान पर प्रति क्विंटल कम से कम 700 रू का घाटा हो रहा है। 

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने एक कमेटी गठित की थी। उसकी रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के किसानों पर 76,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज है उसमें 36 प्रतिशत निजी मनी लेंडर का है। इसी तरह पंजाब के किसानों पर 73,000 करोड़ का कर्ज है जिसमें 26% निजी मनी लेंडर का है जिसकी ब्याज दर की ज्यादा है। थाने में खाद बंट रही है, खाद के लिए महिलाएं लाइन में खड़ी है लेकिन मुख्यमंत्री कहते हैं कि खाद की कोई कमी नहीं है। इससे बड़ा शर्मनाक और झूठा बयान क्या हो सकता है।

    गुजरात के किसान नेता भरत सिंह झाला ने कहा कि  सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण ही गुजरात के किसानों पर एक लाख करोड़ का कर्ज है। बाढ़ में हुए नुकसान पर गुजरात सरकार ने 11,000 रुपए प्रति हेक्टेयर का मुआवजा देने का  आश्वासन दिया था लेकिन चार से आठ हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तक ही मुआवजा दिया जा रहा है। फसल बीमा योजना का लाभ बीमा कंपनियों को ज्यादा, किसानों को कम मिलता है।

  अ भा कि महासभा के प्रदेश महासचिव प्रहलाद दास बैरागी ने कहा कि किसानों को समय पर खाद, बिजली नही मिल रही है । बाजार में नकली खाद का कारोबार फैल चुका है। जिससे किसानों की उपज पर असर पड़ेगा। 

  उन्होंने कहा कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल 17 दिन से अनशन पर बैठे हैं, उनकी स्थिति नाजूक बनी हुई है लेकिन सरकार के किसी मंत्री ने बातचीत की पहल नही की है, यह सरकार का अमानवीय रवैया है।

  पश्चिम उड़ीसा कृषक संगठन समन्वय समिति के अशोक प्रधान ने कहा कि धान की खरीद शुरू नहीं होने से किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है। क्योंकि किसानों के पास कर्ज अदा करने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। 

      एसकेएम रीवा के संयोजक एड शिव सिंह  ने कहा कि देश में किसान मजदूर विरोधी लोग सरकार  चला रहे हैं जो लिखित वादा करने के बाद भी वादा पूरा नहीं कर रहे हैं। वर्तमान में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान है जो बिल्कुल भरोसे मंद नहीं हैं। देश के बड़े किसान नेता सरदार डल्लेवाल जी एमएसपी की गारंटी का कानून बनाये जाने सहित अन्य मांगों को लेकर 17 दिनों से आमरण अनशन पर हैं उनकी हालत नाजुक है। अंग्रेजियत हुकूमत तानाशाह हो चुकी है। अब देश के हर किसान मजदूर को सड़क पर निकलने की जरूरत है।

      उन्होंने संयुक्त किसान मोर्चे के राष्ट्रीय नेतृत्व से जल्द बड़ा फैसला लेने की गुजारिश की है।

      किसान संघर्ष समिति के महामंत्री भागवत परिहार ने नाबार्ड की एक रिपोर्ट का आंकड़ा बताते हुए कहा कि एक किसान परिवार खेती से रोज 150 रुपये भी नहीं कमा पा रहा है। महंगाई के दौर में किसानों की कमाई का यही सच है।

     किसान पंचायत का संचालन रामस्वरूप मंत्री ने किया। किसान पंचायत का लाइव प्रसारण बहुजन संवाद यूट्यूब चैनल के माध्यम से किया गया।

भागवत परिहार

कार्यालय सचिव, किसंस मुलतापी

9752922320

Ramswaroop Mantri

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