अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा:शंकराचार्य ने पूजा की, राजा ने सोने के झाड़ू से रास्ता बुहारा; दर्शन करने पहुंचे 25 लाख लोग

Share

पुरी/अहमदाबाद

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है। सबसे आगे भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज है। उनके पीछे देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन चल रहा है। आखिर में भगवान जगन्नाथ का रथ है, जिसे नंदीघोष या गरुड़ध्वज के नाम से जाना जाता है। रथ यात्रा में करीब 25 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है।

भगवान बलभद्र, सुभद्रा और जगन्नाथ के रथ करीब ढाई से तीन किमी दूर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। यात्रा में शामिल लोग रस्सियों के जरिए इन रथों को खींचते हैं। गुंडिचा मंदिर को भगवान की मौसी का घर माना जाता है। इसीलिए रथ यात्रा को गुंडिचा जात्रा भी कहते हैं।

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक आषाड़ महीने में शुक्ल पक्ष की दूज को भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाती है।

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक आषाड़ महीने में शुक्ल पक्ष की दूज को भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाती है।

शंकराचार्य ने पूजा की, राजा ने सोने के झाड़ू से रास्ता बुहारा
रथयात्रा के दिन सुबह मंगला आरती के बाद भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया गया। फिर रथों की पूजा कर बलभद्र, बहन सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को रथ में बैठाया गया। पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने प्रथम दर्शन किए। पुरी राजपरिवार के दिव्यसिंह देव ने रथ के सामने सोने के झाड़ू से बुहारा लगाया। इसके बाद रथ यात्रा शुरू हुई।

रथयात्रा की परम्परा है कि पुरी राजपरिवार के सदस्य पहले रथ की पूजा करते हैं, फिर सोने के झाड़ू से बुहारा देते हैं। तब यात्रा शुरू होती है। दिव्य सिंह ने इस परम्परा को निभाया।

रथयात्रा की परम्परा है कि पुरी राजपरिवार के सदस्य पहले रथ की पूजा करते हैं, फिर सोने के झाड़ू से बुहारा देते हैं। तब यात्रा शुरू होती है। दिव्य सिंह ने इस परम्परा को निभाया।

सबसे पीछे चलता है भगवान जगन्नाथ का रथ

  • रथ यात्रा में सबसे पहले भगवान बलभद्र का रथ होता है। यह तकरीबन 45 फीट ऊंचा और लाल और हरे रंग का होता है। इसमें 14 पहिए लगे होते हैं। इसका नाम ‘तालध्वज’ है।
  • इसके पीछे ‘देवदलन’ नाम का करीब 44 फीट ऊंचा लाल और काले रंग का देवी सुभद्रा का रथ होता है। इसमें 12 पहिए होते हैं।
  • आखिर में भगवान जगन्नाथ का रथ चलता है। इसका नाम ‘नंदीघोष’ है, जो कि पीले रंग का लगभग 45 फीट ऊंचा होता है। इनके रथ में 16 पहिए होते हैं। इसे सजाने में लगभग 1100 मीटर कपड़ा लगता है।

पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की पांच तस्वीरें…

बलभद्र, सुभद्रा और जगन्नाथ की प्रतिमाओं को रथ में बैठाकर उनकी मौसी के घर ले जाया जाता है।

बलभद्र, सुभद्रा और जगन्नाथ की प्रतिमाओं को रथ में बैठाकर उनकी मौसी के घर ले जाया जाता है।

पुरी में रथ यात्रा के रूट पर करीब 25 लाख श्रद्धालु मौजूद रहे। ड्रोन से लिए गए इस फोटो में इमारतों के बीच की सड़क लोगों से भरी हुई है।

पुरी में रथ यात्रा के रूट पर करीब 25 लाख श्रद्धालु मौजूद रहे। ड्रोन से लिए गए इस फोटो में इमारतों के बीच की सड़क लोगों से भरी हुई है।

जगन्नाथ रथ यात्रा के दर्शन के लिए लोग मगलवार सुबह से ही सड़क किनारे खड़े हुए थे। कड़ी धूप के बावजूद लोगों का उत्साह बरकरार रहा।

जगन्नाथ रथ यात्रा के दर्शन के लिए लोग मगलवार सुबह से ही सड़क किनारे खड़े हुए थे। कड़ी धूप के बावजूद लोगों का उत्साह बरकरार रहा।

भगवान बलभद्र का रथ निकलने के बाद बहन सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथ, जिन्हें श्रद्धालु खींच रहे थे।

भगवान बलभद्र का रथ निकलने के बाद बहन सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथ, जिन्हें श्रद्धालु खींच रहे थे।

देवी सुभद्रा का रथ भगवान जगन्नाथ के रथ से आगे चल रहा था। वे बलभद्र और जगन्नाथ की बहन हैं।

देवी सुभद्रा का रथ भगवान जगन्नाथ के रथ से आगे चल रहा था। वे बलभद्र और जगन्नाथ की बहन हैं।

भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचते हुए श्रद्धालु।

भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचते हुए श्रद्धालु।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें