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जीवन संगिनी – धर्म पत्नी की अंतिम विदाई !

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( एक अत्यंत मार्मिक कहानी )
◇◆◆◆◆◆◆◆◇

            अगर पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है। राजा की तरह जीने और आज दुनिया में अपना सिर ऊँचा रखने के लिए अपनी पत्नी का शुक्रिया। आपका फूला-फला परिवार सब पत्नी की मेहरबानी हैं । वह आपकी सुविधा - असुविधा आपके अकारण क्रोध को भी संभाल लेती है।  तुम्हारे सुख से सुखी और तुम्हारे दुःख से दुःखी हो जाया करती है।  आप रविवार को देर से बिस्तर पर रहते हैं लेकिन उसका कोई रविवार या त्योहार नहीं होता है ! चाय लाओ, पानी लाओ, खाना लाओ ! मेरा चश्मा व मोबाईल लाओ  ! ये ऐसा है और वो ऐसा है ! कब अक्कल आएगी तुम्हें ? ऐसे ताने मारते हो। उसके पास बुद्धि है और केवल उसी के कारण तो आप जीवित है। समाज में सिर ऊँचा करके ,सीना तानकर चलते हों । वरना दुनिया में आपको कोई भी नहीं पूछेगा ! अब जरा  उस स्थिति की सिर्फ और सिर्फ कल्पना करें :
        एक दिन आपकी पत्नी अचानक रात को गुजर जाती है ! सब तरफ सन्नाटा है ! घर में रोने की आवाज आ रही है।  पत्नी का अंतिम दर्शन चल रहा था। उस वक्त पत्नी की आत्मा जाते जाते जो कह रही है उसका वर्णन :
       'मैं अभी जा रही हूँ अब फिर कभी नहीं मिलेंगे ! तो पति देव जी मैं जा रही हूँ। जिस दिन शादी के फेरे लिए थे उस वक्त साथ साथ जीयेंगे ऐसा वचन दिया था,पर इस समय अचानक अकेले जाना पड़ेगा ये मुझ को भी पता नहीं था !
          मुझे जाने दो।
          अपने आंगन में अपना शरीर छोड़ कर जा रही हूँ। आप अकेले पड़ जायेंगे ! बहुत दर्द हो रहा है मुझे,लेकिन मैं मजबूर हूँ अब मैं जा रही हूँ। मेरा मन नहीं मान रहा पर अब मैं कुछ नहीं कर सकती !
        बेटा और बहू रो रहे है देखो ! मैं ऐसा नहीं देख सकती और अब उनको दिलासा भी नहीं दे सकती हूँ। पोता दादी - दादी -दादी - माँ कर रहा है,उसे शांत करो, बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं।  हाँ और आप भी मन मजबूत रखना और बिल्कुल ढीले न हों। अपनी आँखों से आँसू मत बहने देना  !
         अभी बेटी ससुराल से आएगी और मेरा मृत शरीर देखकर बहुत रोएगी,तड़प - तड़प कर रोयेगी,बेहोश हो जायेगी ! तब उसे संभालना और शांत कराना। और आप भी बिल्कुल भी नहीं रोना। बस इतनी हिम्मत रखना ! जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है। जो भी इस दुनिया में आया है वो यहाँ से जायेगा भी, यही प्रकृति का नियम है ,धीरे -धीरे मुझे भूल जाना,मुझे बहुत याद नहीं करना और अपने जीवन में फिर से काम में डूब जाना। अब मेरे बिना जीवन जीने की आदत  जल्दी से डाल देना। गुमसुम न रहना !
       आप ने इस जीवन में मेरा कहा कभी नहीं माना है। अब जिद्द छोड़कर व्यवहार में विनम्र रहना। आपको अकेला छोड़ कर जाते मुझे बहुत चिंता हो रही है। लेकिन मैं मजबूर हूँ । आपको बीपी और डायबिटीज भी है। गलती से भी मीठा नहीं खाना,न ही कहीं किसी कार्यक्रम में खाना खाने जाना ,अन्यथा आपको परेशानी हो जाएगी।सुबह उठते ही दवा लेना भूलना नहीं। चाय अगर आपको देर से मिलती है तो बहू पर गुस्सा न करना। अब मैं नहीं हूंँ ,यह समझ कर जीना सीख लेना, बेटा और बहू कुछ बोलें तो चुपचाप सब सह और सुन लेना। कभी गुस्सा नहीं करना। हमेशा मुस्कुराते रहना कभी उदास नहीं होना,कि मैं अकेला हूँ !
          अपने बेटे के बेटे के साथ ठीक से रहना। अपने दोस्तों के साथ समय बिताना। अब थोड़ा धार्मिक जीवन जीएं ताकि जीवन को संयमित किया जा सके। अगर मेरी याद आये तो चुपचाप रो लेना ,लेकिन कभी कमजोर नहीं होना।मेरा रूमाल कहांँ है ?मेरी चाबी कहाँ है ? अब ऐसे चिल्लाना नहीं। सब कुछ चयन से रखना और याद रखने की आदत डालना। सुबह और शाम नियमित रूप से दवा ले लेना। जो भी रूखा - सूखा खाने को मिले प्यार से खा लेना और गुस्सा नहीं करना। मेरी अनुपस्थिति खलेगी पर कमजोर नहीं होना। बुढ़ापे की छड़ी लेना कभी भूलना नहीं और धीरे -धीरे चलना ताकि कहीं गिरकर चोट न लग जाय ! यदि बीमार हो गए और बिस्तर में लेट गए तो किसी को भी सेवा करना पसंद नहीं आएगा। बच्चे व बहू की बुराई कभी भी मत करना  ! शाम को बिस्तर पर जाने से पहले एक लोटा पानी खुद ही ले लेना। एक पुरानी टार्च है ,उसे ठीक करा लेना,अगर आपको रात को उठना पड़े तो टार्च की रोशनी में, अंधेरे में धीरे-धीरे चलना ताकि कहींतुम्हें ठोकर न लगे ! शादी के बाद हम लोग बहुत प्यार के साथ रहे। आपको मैंने फूल जैसे बच्चे दिए। अफसोस अब मुझे उन फूलों की सुगंध नहीं मिलेगी,लेकिन आप बगिया को मेरी जगह प्यार से निहारते रहना !
         'उठो सुबह हो गई 'अब ऐसा कोई भी आपसे नहीं कहेगा। अब अपने आप उठने की आदत डाल लेना,किसी की प्रतीक्षा नहीं करना।चाय-नाश्ता मिले न मिले तो भी ,चुपचाप सह लेना और हाँ .... एक बात तुमसे छिपाई है ,मुझे माफ कर देना। आपको बिना बताए बाजू की पोस्ट ऑफिस में बचत खाता खुलवाकर 14 लाख रुपये जमा कर दिये हैं। बचत करना मेरी दादी ने सिखाया था। एक एक रुपया जमा कर के इतनी बड़ी राशि जमा करके रख दिया। इसमें से पाँच पाँच लाख बहू और पाँच लाख बेटी को देना और अपने खाते में चार लाख खुद के लिए रख लेना।मुझसे कोईभी गलती हुई हो तो मुझे माफ कर देना। '

-आपकी जीवन संगिनी

     आइए, हम वर्ष 2022में संकल्प करते हैं कि अपनी धर्म-पत्नी के साथ आजीवन सम्मानपूर्ण व्यवहार करेंगे । 

        साभार - अज्ञात 

       प्रस्तुकर्ता - रामदास यादव,अयोध्या, उप्र,संपर्क - 7897616939

       संकलन -निर्मल कुमार शर्मा, जी-181-ए,एचआईजी फ्लैट्स, डबल स्टोरी, सेक्टर -11,शहीद भगतसिंह लेन,प्रतापविहार, गाजियाबाद, उप्र

Ramswaroop Mantri

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