AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानदारों की धार्मिक पहचान की जांच और कथित तौर पर पैंट उतारने की मांग जैसे मामलों को लेकर तीखा हमला बोला है। इसके साथ ही, पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर भी ओवैसी ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा 2025 के लिए कुछ सख्त नियम लागू किए हैं। इनमें कांवड़ मार्ग पर खाने-पीने की दुकानों, ढाबों और रेस्तरांओं के लिए मालिक का नाम, लाइसेंस, और पहचान पत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।
योगी सरकार ने यह भी निर्देश दिया कि “कांवड़ मार्ग पर खुले में मांस की बिक्री नहीं होनी चाहिए और ओवररेटिंग पर सख्ती की जाए। बिना नाम और लाइसेंस वाली दुकानों को बंद करने और 2 लाख रुपये तक के जुर्माने की चेतावनी दी गई है।”
इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया गया कि कांवड़िए गलती से ऐसी दुकानों से सामान न खरीद लें, जो उनकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप न हों।
मुजफ्फरनगर में विवादित घटना
मुजफ्फरनगर के नई मंडी क्षेत्र में एक ढाबे पर यशवीर महाराज और उनके साथियों ने कथित तौर पर दुकानदारों की धार्मिक पहचान की जांच की। इस दौरान कुछ लोगों ने दुकानदारों से आधार कार्ड मांगने के साथ-साथ उनकी धार्मिक पहचान जानने के लिए पैंट उतारने की मांग की, जिसे ओवैसी और अन्य नेताओं ने ‘जबरदस्ती’ और ‘धार्मिक भेदभाव’ करार दिया।
ओवैसी का यूपी सरकार पर हमला
ओवैसी ने इस घटना को लेकर यूपी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “आधार कार्ड नहीं मिला तो बोले पैंट उतारो…ये क्या है? ये लोग कौन हैं जो पैंट उतरवा रहे हैं ?”ओवैसी ने इसे मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव और डर फैलाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के नियम और घटनाएं हिंदू-मुस्लिम के बीच दूरियां बढ़ा रही हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या यह नियम केवल मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है, और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
विवाद पर बोले सपा नेता एसटी हसन
पूर्व सांसद हसन ने कहा कि “नेमप्लेट लगाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर जनता स्वयं इस नियम को लागू करने लगेगी, तो इससे हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस्लाम धोखे से कारोबार करने की इजाजत नहीं देता, लेकिन ऐसी घटनाएं देश में दूरियां बढ़ा रही हैं।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस आदेश को गलत परंपरा बताया और कहा कि “यह सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।”
ओवैसी की प्रतिक्रिया पहलगाम हमले का दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया, जिसे ओवैसी ने पूरे हिंदुस्तान पर हमला करार दिया। इस हमले के विरोध में ओवैसी ने हैदराबाद और अहमदाबाद में जुमे की नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आतंकियों को “कुत्ता” कहते हुए कहा कि उनके आकाओं को सबक सिखाने का समय आ गया है।
केंद्र और यूपी सरकार पर निशाना
ओवैसी ने पहलगाम हमले को लेकर केंद्र सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से आतंकी भारत में आकर नागरिकों की हत्या कर रहे हैं, और सरकार उन्हें रोकने में विफल रही है। साथ ही, उन्होंने यूपी सरकार की नीतियों को भी निशाने पर लिया, यह कहते हुए कि मुसलमानों को खुले जेल में रहने जैसा महसूस हो रहा है। ओवैसी ने सीजफायर पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से आतंकवाद को बढ़ावा देता रहेगा, स्थायी शांति संभव नहीं है।
सांप्रदायिक तनाव का खतरा
कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानदारों की धार्मिक पहचान की जांच और पैंट उतारने जैसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बन रही हैं। कई नेताओं ने इसे हिंदू-मुस्लिम तनाव को बढ़ाने वाला कदम बताया है। सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल इस मामले में योगी सरकार को घेर रहे हैं।
यूपी सरकार ने इन नियमों को कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा और यात्रा की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि “सपा को न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है।”
सरकार की नीतियों पर सवाल !
कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानदारों की पहचान की जांच और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांवड़ यात्रा के नियमों को लेकर मुजफ्फरनगर में हुई घटना ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने की आशंका पैदा की है, जिसे विपक्षी नेताओं ने भेदभावपूर्ण बताया है। वहीं, पहलगाम हमले को लेकर ओवैसी ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। यह विवाद उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में सांप्रदायिक मुद्दों को और गर्माने का कारण बन सकता है।





