किशन जी की पुण्य तिथि के अवसर पर विशेष
कैलाश रावत
समाजवादी चिंतक विचारक किशन पटनायक सोशलिस्ट पार्टी की तरफ से संबलपुर उड़ीसा से बहुत ही कम उम्र में सांसद चुने गए किशन पटनायक जी डॉ राम मनोहर लोहिया के अत्यंत निकट से डॉक्टर लोहिया के साथ सांसद रहते हुए संसद में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया किशन पटनायक जी 19 69 मैं समाजवादी युवजन सभा के अखिल भारतीय अध्यक्ष चुने गए समाजवादी विचार की पत्रिका मेककाईनड चौरंगी वार्ता संपादन से जुड़े किशन पटनायक ने 1977 में सामयिक वार्ता का प्रकाशन प्रारंभ किया जो अनवरत निकलती रही है 1977 में बनी जनता पार्टी में शामिल नहीं हुए लोहिया विचार मंच समता संगठन और समाजवादी जन परिषद जन आंदोलन समन्वय समिति बा एन ए पी एम के माध्यम से देश के जन आंदोलनों को जोड़ने और वैकल्पिक राजनीति को नई दिशा देने में जीवन भर लगे रहे
समता साथी समागम के माध्यम सेसम्मानीय स्वर्गीय श्री किशन पटनायक की पुण्यतिथि पर झारखंड देवघर में कार्यक्रम साथी बजरंग सिंह जी साथी दिलीप दुबे और अन्य महानुभावों द्वारा 27 सितंबर 20 19। 20 में सफल कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें देशभर के समाजवादी नेता और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा था मुझे भी कार्यक्रम की अध्यक्षता करने का अवसर मिला था साथ ही बजरंग सिंह जी और दिलीप दुबे तारकेश्वर सिंह रामाधार तिवारी मधुकर जी धरणीधर जी मनोज जी का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने किशन पटनायक की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिए हमेशा प्रयास किया उसी कार्यक्रम के दौरान समाजवादी साथी स्वर्गीय श्री विश्वनाथ वाणी जी की स्मृति में स्मारिका का विमोचन भी किया गया था
मध्यप्रदेश में सम्मानीय किशन पटनायक की नीतियों को जन जन तक पहुंचाने में रामेश्वर दयाल दातरे चौधरी दिलीप सिंह जी पुरुषोत्तम कौशिक मदन तिवारी जीवन लाल साव शिव प्रसाद चिनपुरिया महेश तिवारी सुनील जी राज नारायण जी का नाम उल्लेखनीय है
संपूर्ण क्रांति गैर कांग्रेसवाद के प्रयोग का असर है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जनसंघ आज की भारतीय जनता पार्टी के तमाम लोग उस भवन में भारी संख्या में घुस पाए हैं जिसे लोकसभा कहते हैं मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की राजनीति का उदय का सबसे बड़ा योगदान संपूर्ण क्रांति और गैर कांग्रेसबाद के खाते में जाता है
सोशलिस्ट क्रांतिकारी नीतियो के कारण समाजवादी आंदोलन की भारत में विशिष्ट पहचान बनी डॉ राम मनोहर लोहिया के गैर कांग्रेसवाद के कारण तत्कालीन जनसंघ अब भारतीय जनता पार्टी सोशलिस्ट प्रजा सोशलिस्ट भारतीय क्रांति दल संयुक्त विपक्ष के कारण 1967 में देश के अनेक राज्यों में मिली जुली सरकार है और 1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के प्रयास से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जनसंघ भारतीय क्रांति दल स्वतंत्र पार्टी सोशलिस्ट और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी आदि दलों से बनी जनता पार्टी की देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी इसमें समाजवादियों का बहुत बड़ा योगदान था हालांकि विलय में समाजवादी चिंतक विचारक किशन पटनायक जी दूर रहे
डॉ राम मनोहर लोहिया और किशन पटनायक जैसे प्रसिद्ध और ख्याति प्राप्त समाजवादी नेताओं की विरासत के बाद भी आज समाजवादी आंदोलन पतन के कगार पर है सोशलिस्ट आंदोलन के कमजोर होने केकारण वर्तमान राजनीति कारपोरेट घराने एवं समाज में अधिपत्र जमाई लोगों के हाथ में है देश में गरीबी भ्रष्टाचार बेरोजगारी बढ़ती जा रही है सरकार रोजगार देना तो दूर न निजी करण की तरफ बढ़ रही है
सोशलिस्ट नेताओं का किरदार आजादी की लड़ाई में बहुत ही क्रांतिकारी रहा लाखों क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपना सब कुछ निछावर कर दिया उनमें अधिकांश सोशलिस्ट विचारधारा के थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सपना अधूरा रह गया सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है चुनाव में पूंजीवादी व्यवस्था हावी है आम आदमी आम राजनीतिक दल का कार्यकर्ता चुनाव लड़ना बा जीतना पैसे के अभाव में मुश्किल होता जा रहा है चुनाव दोनों दिन महंगा होता जा रहा है देश की जनता लाचार वेवस सोशलिस्टसमाजवादी नेताओं की तरफ देख रही है आशा कि किरण डॉ राम मनोहर लोहिया और किशन पटनायक की नीतियों में दिखाई दे रही है
यूपीए सरकार के समय निराशावादी परिस्थितियां देश में दिखाई दे रही थी तब अन्ना हजारे के आंदोलन से एक आशा की किरण जागी आंदोलन के नतीजे से यूपीए सरकार चली गई यूपीए की सरकार हटते ही अन्ना समर्थकों ने ऐसा तमाशा किया कि तमाशा बीन भी शरमा गए
सोशलिस्ट आंदोलन संगठन और अनुशासन के प्रति घोर लापरवाह रहे नतीजा सामने है डॉक्टर लोहिया किशन पटनायक की गौरवशाली परंपरा विरासत के बाद भी बिलिपपता के कगार पर हैं सार्वजनिक जीवन में सक्रिय समाजवादी सोशलिस्ट नेता और कार्यकर्ता की पहचान रखने वालो नेवी 10 कार्यकर्ता पैदा नहीं किए दो व्यक्ति साथ नहीं है जो बनाया बना संगठन था वह भी नष्ट हो गया वही मनमानियां आज की तारीख में अनेक सोशलिस्ट और समाजवादी कार्यकर्ता जन आंदोलनों में बराबर भाग लेते हैं देश की फिक्र भी रखते हैं जब आम चुनाव आता है तब हम रीते हाथ खड़े नजर आते हैं आजकल राजनीति में गुलाम कार्यकर्ता चाहते हैं जो व्यक्ति श्चेचेतना सोच समझकर निर्णय लेता है थोड़ा बहुत जनाधार भी बनाता है राजनीति करता है आमतौर पर तथाकथित स्थापित नेताओं को पसंद नहीं
किशन पटनायक जी ने दिनमान के 28 सितंबर 1979 के अंत में लेख लिखा था
भागो नहीं बदलो
इसमें किशन पटनायक जी ने खोखले जनतंत्र और तानाशाही का विकल्प बनने की बात की थी
अगस्त 1980 में क्षमता संगठन की स्थापना हुई इसमें महत्वपूर्ण समाजवादी एवं जयप्रकाश आंदोलन से जुड़े साथ ही थे मजबूत विकल्प देने के बावजूद स्थिति और खराब होती चली गई आदर्शवादी साथी जिनकी समाज में हैसियत थी वह भी गुमनामी के अंधेरे में खो गए
उनकी जगह बिना जनाधार वाले
समाजवादी नेताओं ने ले ली
समाजवादियों के डीएनए में उस जन्मजात बिकार है एक छदम क्रांतिकारी दूसरा किसी अच्छे प्रयास को पलीता लगाना तीसरा खुद स्वयं के सिवा सबको छोटा तथाकथित समाजवादी
इन सब को हमें स्वीकार करना पड़ेगा तब आप रचनात्मक राजनीतिक कार्य में सहयोगी बना पाओगे सबकी अपनी क्षमताएं होती हैं और सब की क्षमताएं जानता हूं इसलिए लिख रहा हूं
समाजवादी विचारधारा लगभग लुप्त होकर प्रभावहीन है इसलिए कोई उपयोग करके कुछ हासिल कर लेगा राजनीति या समाज में स्थान बना लेता है यह मान्यता चिढ़ गैर बाजीगर व्यक्ति का लगाओ कर्तव्य समाज और देश में कुछ करते रहने की प्रेरणा बनती है
देश में चुनाव व्यवस्था से लड़ना सुचिता पारदर्शिता लाने का सही उन लोगों को जाता है जो बाहुबल धनबल और सरकारके खिलाफ सीना तान कर खड़े होते हैं
समाज में हाशिए पर रहने वालों ने जो भी हासिल किया है लोकतंत्र सामाजिक न्याय और आंदोलन के जरिए इनको मिला है इसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी इनकी बनती है आज इन्हीं सब पर संकट मंडरा रहा है वर्तमान समय में राजनीति कॉरपोरेट घराने एवं समाज में अधिपत्य जमाई लोगों के हाथ में है अन्याय अत्याचार लूट भ्रष्टाचार बेरोजगार बढ़ता जा रहा है भारत में स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान दो लाख से अधिक शहीद हुए और लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व निछावर कर दिया उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सपना अधूरा रह गया सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटती जा रही है लोकसभा विधानसभा चुनाव में पूंजीवादी व्यवस्था हावी हो गई है आम आदमी आम राजनीतिक कार्यकर्ता का चुनाव लड़ना जितना पैसे के अभाव में मुश्किल होता जा रहा है
वर्तमान समय में देश निराशा के दौर से गुजर रहा है आशा की किरण एकमात्र डॉ राम मनोहर लोहिया किशन पटनायक की नीतियों में है आइए हम किशन पटनायक की पद चिन्हों पर चलकर राजनीति में सुचिता पारदर्शिता लाने का प्रयास करें
कैलाश रावत
ग्राममडिया तहसील पृथ्वीपुर जिला निवाड़ी मध्य प्रदेश472336
7999606143





