अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

ताजा समाचार -वॉशिंगटन में सड़कों पर उतरे हजारों इस्राइली समर्थक,टाटा समूह 20 साल बाद फिर शेयर बाजार में,फिर दंडनीय हो सकते हैं विवाहेतर संबंध

Share

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि केंद्र भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर बुधवार को देश में आदिवासियों के कल्याण के लिए 24,000 करोड़ रुपये की एक योजना शुरू करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को झारखंड के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे, जहां वह एक रोड शो करेंगे और कई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने मंगलवार को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का प्रमुख वास्तुकार बताया। तमिलनाडु के तटीय एवं अंदरूनी जिलों में हुई भारी बारिश के बाद राज्य के कई जिलों के प्राधिकारियों ने मंगलवार को विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया। उत्तर प्रदेश में दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामपुर तिराहे पर मंगलवार सुबह एक कार और ट्रक के बीच टक्कर होने से छह लोगों की मौत हो गई

धूम्रपान से होता है शुगर नियंत्रण क्षमता को नुकसान, छोड़ने से 40 फीसदी कम हो जाएगा डायबिटीज का खतरा

WHO claims smoking harms ability to control sugar, If you quit diabetes risk reduce by 40 percent

डब्ल्यूएचओ के साथ अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन और न्यूकासल विवि ने सूचना जारी कर कहा, दुनिया में 95 प्रतिशत डायबिटीज के मामले टाइप-2 के हैं। यह दुनिया में मृत्यु की 9वीं सबसे बड़ी वजह भी। धूम्रपान छोड़कर डायबिटीज टाइप-2 होने का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यह दावा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को विश्व डायबिटीज दिवस पर किया। उन्होंने बताया, दुनिया में सबसे ज्यादा लोगों को प्रभावित कर रही डायबिटीज को बढ़ाने में धूम्रपान बड़ी भूमिका निभाता है। यह शरीर में शुगर की मात्रा नियंत्रित करने की क्षमता को नुकसान पहुंचाता है।

डब्ल्यूएचओ के साथ अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन और न्यूकासल विवि ने सूचना जारी कर कहा, दुनिया में 95 प्रतिशत डायबिटीज के मामले टाइप-2 के हैं। यह दुनिया में मृत्यु की 9वीं सबसे बड़ी वजह भी। 240 राष्ट्रीय डायबिटीज एसोसिएशनों की अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन ने डायबिटीज दिवस 2023 पर अनुमान दिया कि विश्व के 53.7 करोड़ लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

अमेरिका पहुंचे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, सैन फ्रांसिस्को में बाइडन के साथ करेंगे शिखर बैठक

Xi Jinping US Visit Update Chinese President arrives in San Francisco for talks with Biden

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन बुधवार को सैन फ्रांसिस्को में अपने चीनी समकक्ष जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन-अमेरिका शिखर बैठक और 30वीं एपीईसी आर्थिक नेताओं की बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को सैन फ्रांसिस्को पहुंचे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन बुधवार को सैन फ्रांसिस्को में अपने चीनी समकक्ष जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। वैश्विक उथल-पुथल के बीच बाइडन-जिनपिंग के बीच होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने पर जोर होगा।

हालांकि, कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बातचीत से दोनों वैश्विक शक्तियों के द्विपक्षीय संबंधों में नरमी आने की संभावना नहीं है। लेकिन व्हाइट हाउस के अधिकारियों की महीनों की बातचीत के बाद होने जा रही इस बैठक को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि नेताओं को गलत धारणाओं को दूर करने और टकराव से बचने से दोनों शक्तियों के बीच अच्छे प्रतिस्पर्धी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक ढांचा विकसित किया जा सकता है।

इस्राइल-हमास संघर्ष और यूक्रेन युद्ध पर चर्चा की उम्मीद
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और यूक्रेन युद्ध पर दोनों नेताओं के बीच बातचीत होने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति बाइडन अपनी निगरानी में एक और विश्व संकट को फैलने से रोकने के लिए उत्सुक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा शीर्ष विदेश नीति प्राथमिकताओं में से एक वॉशिंगटन-बीजिंग संबंधों में स्थिरता बहाल करना है। उम्मीद है कि दोनों नेता विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर संचार बहाल करना भी शामिल है। बैठक के एजेंडे में जलवायु परिवर्तन, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानवाधिकार के मुद्दों पर गहरी असहमति और दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास सैन्य वृद्धि भी शामिल है।

22 नवंबर से खुलेगा 20 साल बाद टाटा समूह का पहला आईपीओ

Tata Group first IPO after 20 years will open from November 22

सरकारी कंपनी इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (इरेडा) का आईपीओ 21 नवंबर से खुलकर 23 नवंबर को बंद होगा। एंकर निवेशक 20 नवंबर को पैसा लगा सकेंगे। कंपनी ने 30-32 रुपये का भाव तय किया है। पिछले साल मई में एलआईसी के बाद यह किसी सरकारी कंपनी का पहला आईपीओ है।

टाटा समूह 20 साल बाद फिर शेयर बाजार में उतर रहा है। समूह की कंपनी टाटा टेक्नोलॉजी का आईपीओ 22 नवंबर को खुलकर 24 नवंबर को बंद होगा। टाटा टेक टाटा मोटर्स की इकाई है। आईपीओ में टाटा मोटर्स 11.4 फीसदी हिस्सा बेचेगी। कंपनी ने 3,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है। टाटा टेक के इश्यू में अल्फा टीसी 2.4 फीसदी और टाटा कैपिटल ग्रोथ फंड 1.2 फीसदी हिस्सा बेचेगी। टाटा समूह आखिरी बार 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) का आईपीओ लेकर आया था। 

इरेडा का इश्यू 21 नवंबर से
सरकारी कंपनी इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (इरेडा) का आईपीओ 21 नवंबर से खुलकर 23 नवंबर को बंद होगा। एंकर निवेशक 20 नवंबर को पैसा लगा सकेंगे। कंपनी ने 30-32 रुपये का भाव तय किया है। पिछले साल मई में एलआईसी के बाद यह किसी सरकारी कंपनी का पहला आईपीओ है।

फिर दंडनीय हो सकते हैं विवाहेतर संबंध-समलैंगिकता, संसदीय समिति ने की सिफारिश

Extra-marital relations and homosexuality may again become punishable parliamentary committee recommends

पांच साल पूर्व 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने अपने फैसले में विवाहेतर संबंध और समलैंगिकता को दंडनीय अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। पीठ ने इसे तर्कहीन, अक्षम्य और मनमाना करार दिया था। 

अगर सरकार ने संसदीय समिति की रिपोर्ट को स्वीकार किया तो भविष्य में विवाहेतर संबंध और समलैंगिकता एक बार फिर से भारतीय न्याय संहिता (दंडनीय अपराध) के दायरे में आ जाएंगे। संसद की गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने शादी जैसी पवित्र संस्था, संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को बचाने का हवाला देते हुए इन दोनों मामलों को फिर से दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की है।

विवाहेतर संबंध समाज के लिए घातक
गौरतलब है कि पांच साल पूर्व सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने दोनों मामलों को दंडनीय अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। मंगलवार को केंद्र को भेजे प्रस्ताव में समिति ने कहा है कि विवाहेतर संबंध को स्वीकार करना समाज के लिए घातक होगा। समिति ने कहा है कि इस मामले में लैंगिक समानता के सिद्धांत का पालन करते हुए इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। समिति ने कहा, विवाहेतर संबंध के मामले में शामिल महिला और पुरुष दोनों को समान रूप से जिम्मेदार मानते हुए कठोर सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए।

नए सिरे से चर्चा क्यों?
समलैंगिकता को भी समिति ने अपराध की श्रेणी में रखने की सिफारिश की है। पूर्व नौकरशाह बृजलाल की अध्यक्षता वाली कमेटी ने कहा है कि इस प्रवृत्ति को कानूनी संरक्षण से मिलने वाली सामाजिक स्वीकार्यता के गंभीर परिणाम होंगे। नए सिरे से चर्चा क्यों? दरअसल संसद के बीते सत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए तीन विधेयक पेश किए थे। न्याय प्रणाली में व्यापक सुधार और त्वरित न्याय की अवधारणा से जुड़े इस विधेयक को विचार के लिए संसद की गृह मामले की स्थायी समिति को भेज दिया गया था। इन तीनों विधेयकों को शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। 

क्या है मामला?
दरअसल पांच साल पूर्व 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने अपने फैसले में विवाहेतर संबंध और समलैंगिकता को दंडनीय अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। पीठ ने इसे तर्कहीन, अक्षम्य और मनमाना करार दिया था। विवाहेतर संबंध के संदर्भ में पीठ का कहना था कि यह तलाक का आधार तो हो सकता है, मगर दंडनीय अपराध का नहीं। पीठ ने तर्क दिया था कि यह 163 साल पुराना उस औपनिवेशिक काल के कानून को संरक्षण देता है जिसमें पति ही पत्नी का स्वामी की अवधारणा को मजबूत बनाता है।

इस दशक में चरम पर होगा ग्रीन-हाउस गैस उत्सर्जन, 2030 तक 2 फीसदी ही गिरावट, यूएन की रिपोर्ट

UN report Greenhouse gas emissions will peak in this decade decline only by two percent by 2030

रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के सबसे बुरे असर को रोकने के लिए उत्सर्जन में 43 प्रतिशत कमी जरूरी है। यह रिपोर्ट दुबई में होने जा रही जलवायु परिवर्तन पर पक्षकारों की 28वीं कॉन्फ्रेंस (कॉप28) से पहले जारी हुई है। दुनिया में जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी वजह कहा जा रहा ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन इसी दशक में चरम पर होगा। इसके बाद इसमें ठहराव व कमी आएगी। लेकिन यह गिरावट 2019 के मुकाबले साल 2030 तक सिर्फ दो प्रतिशत होगी। यह खुलासे संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की नई रिपोर्ट में किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के सबसे बुरे असर को रोकने के लिए उत्सर्जन में 43 प्रतिशत कमी जरूरी है। यह रिपोर्ट दुबई में होने जा रही जलवायु परिवर्तन पर पक्षकारों की 28वीं कॉन्फ्रेंस (कॉप28) से पहले जारी हुई है। कॉन्फ्रेंस में शामिल सभी देश पृथ्वी के औसत तापमान में सदी के अंत तक वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर सीमित रखने के लिए सख्त कदम उठाने पर जोर देंगे। कॉप28 के नामित अध्यक्ष सुल्तान अल जाबेर ने कहा कि यह रिपोर्ट तत्काल कदम उठाने की जरूरत साबित करती है ताकि हम पेरिस समझौते के लक्ष्य हासिल कर पाएं। इसके लिए कॉप28 अहम बिंदु साबित होगी। उल्लेखनीय है कि यह कॉन्फ्रेंस 30 नवंबर से शुरू होगी। यूएन (जलवायु परिवर्तन) कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा कि सरकारें मिलकर भी जलवायु संकट को टालने के लिए छोटे कदम ही उठा रहीं हैं, उन्हें बड़े कदम बढ़ाने होंगे। 

यह भी बताया रिपोर्ट ने

  1. यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन के 195 पक्षकारों व देशों द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (एनडीसी) का विश्लेषण कर यह रिपोर्ट बनाई गई है।
  2. खास बात सामने आई कि साल 2030 के बाद दुनिया में उत्सर्जन का चरम नहीं आएगा, बल्कि इसी दशक में चरम आ जाएगा। हालांकि उत्सर्जन में तेज गिरावट भी इस अवधि में नहीं होगी।
  3. यही 195 देश व पक्षकार 2019 में दुनिया के 94.9% उत्सर्जन के जिम्मेदार थे।
  4. 2025 में अनुमानित उत्सर्जन साल 1990 के मुकाबले 55.2 प्रतिशत और 2010 के मुकाबले 12.2 प्रतिशत अधिक होगा।
  5. 2030 में अनुमानित उत्सर्जन 1990 के मुकाबले 50.5 और 2010 के मुकाबले 8.8% अधिक हो सकता है।

स्मृति शेष: आतिथ्य क्षेत्र में देश को ओबेरॉय ने दिलाई वैश्विक पहचान, 35 साल तक रहे चेयरमैन

Smriti Shesh Prithviraj Singh Oberoi brought global recognition to the country in hospitality sector

राजीव चंद्रशेखर, आईटी राज्यमंत्री ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने भारतीय आतिथ्य और सेवा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। देश के आतिथ्य क्षेत्र में नई जान फूंकने और उसे दुनियाभर में पहचान दिलाने वाले दिग्गज होटल कारोबारी पृथ्वीराज सिंह ओबेरॉय का मंगलवार को निधन हो गया। वह 94 साल के थे। बिकी के नाम से मशहूर ओबेरॉय समूह के मानद चेयरमैन ने अपने जीवनकाल में 32 होटल की विशाल शृंखला खड़ी की। 3 फरवरी, 1929 को नई दिल्ली में जन्मे ओबेरॉय 1988 से लेकर मई, 2023 तक कंपनी के चेयरमैन रहे।

39 साल पहले संभाली थी कमान
द ओबेरॉय समूह के संस्थापक व पृथ्वीराज सिंह के पिता राय बहादुर एमएस ओबेरॉय ने 1934 में यह कारोबार शुरू किया था। 2002 में उनका निधन हो गया। राय बहादुर के बड़े बेटे तिलक राज का 1984 में निधन हो गया था। पृथ्वी राज सिंह ने 39 साल पहले यानी 1984 में अपने पिता की जगह ली और उनकी विरासत को आगे बढ़ाया।

ये मिले थे सम्मान…
पर्यटन और आतिथ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2008 में पद्म विभूषण। 
असाधारण नेतृत्व और दूरदर्शिता के लिए इंटरनेशनल लग्जरी ट्रैवल मार्केट (आईएलटीएम) में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड। होटल्स (मैगजीन) यूएसए ने कॉरपोरेट होटेलियर ऑफ द वर्ल्ड पुरस्कार से नवाजा। 

बर्लिन में छठे इंटरनेशनल होटल्स इन्वेस्टमेंट फोरम ने प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। 
फोर्ब्स इंडिया लीडरशिप अवार्ड समेत कई अन्य पुरस्कार से भी नवाजा गया।

राजीव चंद्रशेखर, आईटी राज्यमंत्री ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने भारतीय आतिथ्य और सेवा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। 

दुनियाभर में आतिथ्य क्षेत्र के सच्चे दिग्गज थे ओबेरॉय
ओबेरॉय न सिर्फ भारत में बल्कि दुनियाभर में आतिथ्य क्षेत्र के सच्चे दिग्गज थे। वह समूह को उस स्तर पर ले गए, जो अभूतपूर्व था। उनकी दूरदर्शिता व लगन का ही नतीजा था कि एक साल होटलों की शीर्ष-4 रैंकिंग में चारों होटल ओबेरॉय समूह के ही थे। मुझे वह साल याद है और उन्हें उस उपलब्धि पर काफी गर्व था। मुझे उनके साथ कुछ प्रोजेक्ट में काम करने का सौभाग्य मिला। अतिथि और उनके अनुभव पर उनके निरंतर और व्यापक फोकस ने इस उद्योग के लिए मानक स्थापित किए। व्यक्तिगत स्तर पर उनमें आपको हमेशा लाखों रुपये जैसा महसूस कराने की क्षमता थी। उनके साथ प्रत्येक मुलाकात में मुझे कुछ न कुछ सीखने को मिला।

विश्वविद्यालयों, कॉलेजों में बनेंगी एलुमनी कनेक्ट सेल, देशी और विदेशी छात्रों का डाटा किया जाएगा एकत्रित

UGC Alumni Connect Cell formed in universities and colleges, domestic and foreign students data collected

पूर्व छात्रों के साथ जुड़ने से संस्थान भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली की ताकत दिखाने के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में पूर्व छात्रों की सेवाओं का उपयोग कर सकेगा। इसके अलावा विदेशी मूल के पूर्व छात्रों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले भारतीय पूर्व छात्र भी ब्रांड एंबसेडर के रूप में प्रचार करेंगे। 

आईआईटी, आईआईएम, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अब एलुमनी कनेक्ट सेल बनाए जाएंगे। देशी और विदेशी छात्रों का डाटा भी एकत्रित किया जाएगा। इसका मकसद पूर्व छात्रों के अनुभवों का संस्थान के वर्तमान छात्रों को लाभ और कैंपस प्लेसमेंट में मदद लेना है। पूर्व छात्र वीडियो कांफ्रेंस, सेमिनार या अन्य कार्यक्रमों आदि के माध्यम से संस्थान के छात्रों से रूबरू होंगे। वहीं,पाठ्यक्रम बनाने से लेकर संस्थान के विकास में भी सहयोग करेंगे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की योजना बनाई है। इसी के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर बाकायदा दिशा-निर्देश भी तैयार किए हैं।

दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व छात्र किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान के लिए एक मजबूत स्तंभ होते हैं। एक सक्रिय पूर्व छात्र संघ शैक्षणिक मामलों, छात्रों के समर्थन के साथ-साथ वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों तरह के संसाधनों को जुटाने में भी योगदान दे सकता है।

पूर्व छात्रों के साथ जुड़ने से संस्थान भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली की ताकत दिखाने के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में पूर्व छात्रों की सेवाओं का उपयोग कर सकेगा। इसके अलावा विदेशी मूल के पूर्व छात्रों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले भारतीय पूर्व छात्र भी ब्रांड एंबसेडर के रूप में प्रचार करेंगे। इसलिए शिक्षण संस्थानों को पूर्व छात्रों से जोड़ने की जरूरत है। ब्रांड निर्माण के लिए उपयुक्त माध्यम तैयार करके, उनके योगदान को उचित मान्यता भी देनी होगी।

पाठ्यक्रम, प्लेसमेंट, ट्रेनिंग इंटर्नशिप में भी सहयोग  
पूर्व छात्रों का पाठ्यक्रम, प्लेसमेंट ट्रेनिंग, इंटर्नशिप आदि में भी सहयोग लिया जा सकता है। कुछ पूर्व छात्र उद्योगों से जुड़े होंगे। वे नए छात्रों को अपने यहां नौकरी से पहले इंटर्नशिप और प्लेसमेंट में सहयोग कर सकते हैं। इसके अलावा मार्केट डिमांड के आधार पर वे पाठ्यक्रम आदि में नए विषयों को भी जोड़ने पर अपना योगदान दे पाएंगे।

डाटा एकत्रित करने से पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी
पूर्व छात्रों का डाटा एकत्रित करने का मकसद, पूर्व छात्रों का नाम, पढ़ाई व वर्ष, पूर्व और वर्तमान पता, नौकरी, व्यवसाय आदि की जानकारी जुटाना है। इसके माध्यम से उनके व्यवसाय और नौकरी से अलग-अलग ग्रुप बनाकर अलग-अलग छात्रों के वर्ग को जोड़ा जा सकता है। मसलन, साइंस, कला व कॉमर्स के छात्रों से है। इससे उनकी पसंद और काम के आधार पर नए छात्रों को जोड़ने में मदद मिलेगी। सभी पूर्व छात्रों को उनके पूर्व संस्थान से जोड़ने के लिए एक ग्रुप मैसेज और ईमेल से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें सभी जानकारियां भेजी जा सकें।

सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों से भी जोड़ें
पूर्व छात्रों को सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाए। इसमें  संस्थान के आसपास के इलाकों, गांवों आदि में लोगों के लिए विभिन्न सामुदायिक सेवा कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। इसमें नए छात्रों के साथ पूर्व छात्रों को जोड़ना चाहिए। वे आर्थिक रूप से इन कार्यक्रमों में सहयोग देकर शिक्षा, हेल्थ, कृषि, महिलाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजना से जुड़ सकते हैं।

हनुमान बेनीवाल बिगाड़ेंगे कांग्रेस और भाजपा का खेल, प्रदेश की 77 सीटों पर उतरे आरएलपी उम्मीदवार

Hanuman Beniwal can make hard Competition for Congress and BJP Rajasthan Election 2023

बेनीवाल की नजर जाट वोट बैंक पर है। इसलिए ज्यादातर प्रत्याशी जाट बहुल इलाकों में उतारे हैं। इसमें बाड़मेर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, भीलवाड़ा, अजमेर और उदयपुर की जाट बहुल सीटें शामिल है। कांग्रेस और भाजपा ने भी इनमें से ज्यादातर सीटों पर जाटों को ही मौका दिया है। राजस्थान चुनाव में नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) भी कांग्रेस और भाजपा का खेल बनाने और बिगाड़ने की स्थिति में होने से चर्चा में है। 20 सीटों पर जाति समीकरणों के कारण आरएलपी असर डाल सकती है।

2018 में आरएलपी नौ लाख से ज्यादा वोट और तीन सीटें लेकर भाजपा को चपत लगा चुकी है। नतीजे में भाजपा सत्ता से बाहर हो गई थी। इसी वजह से भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में एलएलपी से गठबंधन किया था। नागौर लोकसभा सीट बेनीवाल को दी। बेनीवाल सांसद बने और भाजपा प्रदेश की सभी 25 सीटों को जीतने में सफल रही। दो साल पहले दिल्ली में हुए किसान आंदोलन के दौरान बेनीवाल ने एनडीए से राह अलग कर ली। 77 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। उत्तर प्रदेश की आजाद समाज पार्टी चंद्रशेखर रावण से भी गठबंधन किया है।

जाट वोट बैंक पर बेनीवाल की नजर
बेनीवाल की नजर जाट वोट बैंक पर है। इसलिए ज्यादातर प्रत्याशी जाट बहुल इलाकों में उतारे हैं। इसमें बाड़मेर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, भीलवाड़ा, अजमेर और उदयपुर की जाट बहुल सीटें शामिल है। कांग्रेस और भाजपा ने भी इनमें से ज्यादातर सीटों पर जाटों को ही मौका दिया है। स्पष्ट ही आरएलपी केवल बीजेपी या कांग्रेस की ज्यादातर सीटों पर चुनावी समीकरण को बिगाड़ेगी।

जाट और एससी का नया सियासी समीकरण
बेनीवाल ने आजाद समाज पार्टी से गठबंधन कर दलित मतदाताओं को भी आकर्षित करने की कोशिश की है। आरएलपी ने 77 तो आजाद समाज पार्टी ने 66 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए है। 30 हजार से ज्यादा एससी वोटर वालीं सीटों पर आजाद समाज पार्टी के कैंडिडेट उतारे गए है, जबकि 30 हजार से ज्यादा जाट मतदाताओं वाली सीटों पर आरएलपी लड़ रही है। राजस्थान में कभी तीसरी पार्टी या मोर्चे का प्रभाव नहीं रहा। 40 साल से ज्यादा समय से तो कांग्रेस-भाजपा में ही सीधा मुकाबला है। बसपा पांच से सात सीटों तक ही सिमट कर रह गई। 2013 के विधानसभा चुनाव में शुरू डा. किरोड़ी लाल मीणा की राजपा को सफलता नहीं मिली। महज तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था। नतीजन मीणा ने राजपा का भाजपा में विलय कर दिया।

बेनीवाल को घर में घेरने की तैयारी में भाजपा
बेनीवाल को उन्हीं के घर यानी खींवसर सीट में ही घेरने की तैयारी में है। नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा को कांग्रेस से तोड़कर नागौर सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। खींवसर में ज्योति लगातार बेनीवाल के सेनापतियों को भाजपा में शामिल करा रही हैं। बेनीवाल को अपने बेहद करीब रहे रेवंतराम डांगा से चुनौती मिल रही है।

लाल डायरी का जिन्न फिर बाहर, वैभव गहलोत बोले- सरकार नहीं आएगी क्योंकि पापा खुद वजह हैं

Vaibhav Gehlot says the Government will not come Rajasthan Election Red Diary

पीआर मीणा की खान के मामले में लाल डायरी के पन्नों पर आगे लिखा है-विधायक पीआर  मीणा  की खान चालू करवाने के लिए प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा, खान निदेशक गौरव गोयल, आईएफएस शैलजा देवल, पीसीसीएफ अरिंदम तोमर से  खूब लंबी बहस समझाइश की। राजस्थान में कथित लाल डायरी को लेकर मचा तूफान शांत नहीं हो पाया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाड़मेर (राजस्थान) दौरे के ठीक एक दिन पहले और विधानसभा चुनाव से ठीक 11 दिन पहले  कथित लाल डायरी के कुछ पन्ने लीक होने का दावा किया गया है। दावे के मुताबिक, फोन पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ के बीच बातचीत का उल्लेख डायरी में है।

राजस्थान में कथित लाल डायरी को लेकर मचा तूफान शांत नहीं हो पाया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाड़मेर (राजस्थान) दौरे के ठीक एक दिन पहले और विधानसभा चुनाव से ठीक 11 दिन पहले  कथित लाल डायरी के कुछ पन्ने लीक होने का दावा किया गया है। दावे के मुताबिक, फोन पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ के बीच बातचीत का उल्लेख डायरी में है।

दावे के अनुसार फोन पर बातचीत के दौरान वैभव गहलोत अपने पिता और मुख्यमंत्री की कार्यशैली से बेहद खफा नजए आए। वैभव नाराज होकर बोले-लिखकर देता हूं, सरकार वापस नहीं आएगी, इसका कारण पापा खुद है। सरकार आते ही अफसरों से घिर जाते हैं, राजनीतिक व्यक्ति उन्हें खराब लगने लग जाते हैं। डायरी के इन पन्नों में सीएम के पुत्र और आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत की सरकार में नौकरशाही के हावी होने पर नाराजगी जताने, सरकार के बुरी तरह हारने और उनके कहने से स्वीपर तक का ट्रांसफर नहीं करने की बातें लिखी हुई हैं। कथित लाल डायरी के ये पन्ने सोशल मीडिया पर भी अब वायरल हो रहे है।

गुढ़ा ने विधानसभा में लहराए थे पन्ने
लंबे समय से भाजपा की ओर से लाल डायरी को सियासी मुद्दा बनाया जा रहा है। गहलोत सरकार से बर्खास्त मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने विधानसभा में लाल डायरी को लहराते हुए इसमें कई विस्फोटक खुलासे छिपे होने का दावा किया था। तब गुढ़ा ने खुद कई पन्ने जारी किए थे। इन पन्नों में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के करीबी टोडाभीम से कांग्रेस विधायक पीआर मीणा की खदान को चालू करवाने के मामले का भी उल्लेख किया गया है। 

कथित डायरी में लिखा है कि मीणा की खदान चालू कराने पर प्रमुख सचिव खान कुंजी लाल मीणा के राजी नहीं होने की बात लिखी गई है।  खान विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए मना किया। इसके बाद इसे चालू करवाने के रास्ते खोजे गए। गौरतलब है कि बर्खास्त मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा का दावा है कि 2020 में राजस्थान में सियासी संकट के दौरान, जब सीएम गहलोत के करीब धर्मेंद्र राठौड़ के घर केंद्रीय एजेंसियों का छापा पड़ा था। उस समय खुद पुलिस की मदद से राजेंद्र गुढ़ा उस डायरी को राठौड़ के घर से लेकर आए थे। यह डायरी रोज राठौड़ अलग अलग लोगों से दिन भर में हुई बातचीत के आधार पर रात में लिखा करते थे।

राठौड़ ने लिखा है कि 1:30 बजे पीआर मीणा विधायक का फोन आया। कुंजीलाल मीणा आईएएस को फोन किया परंतु उन्होंने कहा-मैं यह नहीं कर सकता। फिर पीआर मीणा ने सीएम साहब से मिलने का समय मांगा। पीआर मीणा से कहा-कुंजीलाल मीणा आपकी खदान के मामले में निगेटिव, कुलदीप रांका और सीएम को एसएमएस किया।

मीणा बोले-कुंजीलाल को खान से हटाओ तभी जाएगा कड़ा संदेश
लाल डायरी के पन्नों में लिखा है, यह सुनकर पीआर मीणा बोले कि अब तो आप सीएम से कहकर कुंजीलाल मीणा आईएएस को प्रमुख सचिव खान से हटाकर दूसरी जगह पोस्टिंग करो, तभी ब्यूरोक्रेसी में कड़ा संदेश जाएगा। फिर मैं पीआर मीणा को उनके सरकारी निवास छोड़कर रघु शर्माजी के निवास पहुंचा। एचडी सहकारिता को नांद जीएसएस के संबंध में फिर फोन करवाया तो बोले 2 दिन का समय दो। फिर रघु शर्मा के साथ जयपुर शहर में दौरा करके आए।

आईएएस कुंजीलाल सचिन, सीएम, गौरव गोयल का भी जिक्र
पीआर मीणा की खान के मामले में लाल डायरी के पन्नों पर आगे लिखा है-विधायक पीआर  मीणा  की खान चालू करवाने के लिए प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा, खान निदेशक गौरव गोयल, आईएफएस शैलजा देवल, पीसीसीएफ अरिंदम तोमर से  खूब लंबी बहस समझाइश की। लगता है कुंजीलाल मीणा, गौरव गोयल दोनों डरे हुए हैं, या यूं कहिए इनका इरादा ठीक नहीं है। कुल मिलाकर बिना सीएम साहब के हस्तक्षेप के यह मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा। गौरव गोयल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अभी सचिव हैं।

खटाणा की खदान का काम कर दो, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट दे देगा : एक पन्ने पर पायलट समर्थक दूसरे विधायक जीआर खटाणा की खदान का भी जिक्र है। डायरी के अनुसार ऑफिस में 11:15 बजे पीआर मीणा आए।  बोले-मेरी जीआर खटाना से उसकी पत्नी के सामने खुलकर बात हो गई है। खटाना की खदान का फॉरेस्ट डायवर्जन का मामला है। आप इसे एक-दो दिन में सीएम साहब से बात करके कर दो तो वह 15 तारीख को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देगा। यह कांग्रेस विधायक दल की मीटिंग में घोषित कर देगा। मैंने कहा है, मैं सीएम साहब से बात करके बताता हूं।

बीहड़ की बागी छवि से उबरा चंबल लेकिन तासीर में बगावत बरकरार, तोमर-सिंधिया और दिग्विजय की प्रतिष्ठा पर दांव

चंबल-ग्वालियर क्षेत्र में बड़े रसूख वाले सिंधिया परिवार से विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया से लेकर यशोधरा राजे और ज्योतिरादित्य तक भाजपा या कांग्रेस की सक्रिय राजनीति करते आए हैं। मगर, मध्य प्रदेश में सीएम की कुर्सी तक परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा।मध्य प्रदेश का ग्वालियर-चंबल संभाग कभी बागी बीहड़ों के लिए जाना जाता था। उस छवि से यह इलाका अब उबरा नजर आता है। लेकिन सियासत में बगावत का सबसे गाढ़ा रंग कहीं नजर आ रहा है, तो वह यही क्षेत्र है। बगावत का पानी और जाति के अभिमानी यहां पहले की ही तरह दिख रहे हैं। यहां विकास व अन्य मुद्दों की बात छेड़िए लेकिन मतदाता चुनावी हार-जीत के लिए जातीय समीकरण और बागियों के प्रभाव समझाने लगते हैं। कहते हैं इसके अलावा सारे मुद्दे गौण हैं।

2018 के चुनाव में चंबल-ग्वालियर ने 34 में से 26 सीटें कांग्रेस को दे दी थीं। भाजपा को सिर्फ सात सीटों से संतोष करना पड़ा था। एक सीट बसपा को मिली थीं। लेकिन, तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत ने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिरा दी। ज्योतिरादित्य की बगावत के बाद हुए उपचुनावों में कांग्रेस व भाजपा की सीटें लगभग बराबर हो गईं।

कांग्रेस व भाजपा ने यहां जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर प्रत्याशी दिए हैं। लेकिन, तमाम सीटों पर बागी कांग्रेस व भाजपा के समीकरण बिगाड़ने में कहीं खुद का समीकरण बनाने की स्थिति में हैं। कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की प्रतिष्ठा तो दांव पर है ही, बगावत के बाद से पहले विधानसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य की भी इज्जत दांव पर है। यहां कांग्रेस ज्योतिरादित्य को सबसे बड़े धोखेबाज के तौर पर पेश कर मतदाताओं से उन्हें व भाजपा को सबक सिखाने की अपील कर रही है। यहां करीब 20 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस की सीधी लड़ाई दिख रही है तो अन्य पर त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। इस बार शिवपुरी से मंत्री यशोधरा राजे मैदान में नहीं हैं।

सिंधिया, तोमर और जयवर्धन को भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में देख रहे लोग
चंबल-ग्वालियर क्षेत्र में बड़े रसूख वाले सिंधिया परिवार से विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया से लेकर यशोधरा राजे और ज्योतिरादित्य तक भाजपा या कांग्रेस की सक्रिय राजनीति करते आए हैं। मगर, मध्य प्रदेश में सीएम की कुर्सी तक परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा। राजनीतिक विश्लेषक देव श्रीमाली कहते हैं कि विजयाराजे और माधवराव ने कभी प्रदेश की राजनीति में रुचि ही नहीं दिखाई। ज्योतिरादित्य भी केंद्र की ही राजनीति करते रहे हैं। लेकिन, भाजपा इस चुनाव में ज्योतिरादित्य का जिस तरह उपयोग कर रही है, उससे बड़ा संदेश निकल रहा है। 

ज्योतिरादित्य के एक करीबी नेता कहते हैं कि 2018 के चुनाव में प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष रहे सिंधिया को प्रदेश के युवाओं ने सीएम चेहरे के तौर पर देखा था। लेकिन, इसी क्षेत्र के गुना से निकले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन सिंह को भविष्य में सीएम के तौर पर देख रहे हैं। पड़ोस के सिंधिया को जयवर्धन की सियासी राह से हटाने के लिए 2018 में दिग्विजय और कमलनाथ एक हो गए और कमलनाथ सीएम बन गए। इस नेता की मानें तो इसी सियासी चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए सिंधिया 2020 में बगावत कर भाजपा में आए और भाजपा फिर सत्ता में लौटी। सिंधिया राजघराने के एक अन्य समर्थक कहते हैं कि पीएम मोदी चुनाव से पहले तीन बार ग्वालियर आ चुके हैं। पीएम तो ज्योतिरादित्य को गुजरात का दामाद तक बता चुके हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई बार आए। वह महराज के घर भोजन पर भी गए। इस चुनाव में महराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रचार करने वाले भाजपा के चुनिंदा नेताओं में से एक हैं। ऐसे में पार्टी को जनादेश मिला तो महाराज सीएम जरूर बनेंगे। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र दिमनी में उन्हें भविष्य के सीएम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। वैसे दिमनी में कई लोग कहते हैं कि सत्ता फिर आने पर यदि शिवराज को सीएम पद जाता दिखा तो वह सिर्फ तोमर के नाम पर ही सहमति देंगे। दोनों गहरे मित्र हैं।

एससी और बसपा फैक्टर भी अहम
ग्वालियर-चंबल संभाग में एससी मतदाता अच्छी संख्या में हैं। यहां सात सीटें एससी के लिए रिजर्व है। कई सीटों पर बसपा की मजबूत स्थिति रहती आई है। दतिया में मिले राम सिंघासन ने बताया कि पिछले चुनाव में भिंड सीट बसपा ने जीती थी और ग्वालियर ग्रामीण में दूसरे नंबर पर थी। करेरा सीट पर तीसरे स्थान पर थी। इस बार भी पार्टी ज्यादातर सीटों पर लड़ रही है और एससी का समर्थन भी नजर आ रहा है। इसका असर कहीं भाजपा पर दिखेगा तो कहीं कांग्रेस पर।

मुख्यमंत्री पद ही नरेंद्र तोमर की एकमात्र उम्मीद
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मुरैना के सांसद हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में दिमनी विधानसभा क्षेत्र से करीब 27 हजार से अधिक वोटों से लीड ली थी। मगर, अब तोमर जब दिमनी से विधायक का चुनाव लड़ रहे हैं, मुश्किलें साफ नजर आ रही हैं। बरेह में मिले सुरेश चौधरी कहते हैं कि भाजपा-कांग्रेस और आप तीनों ने ही तोमर प्रत्याशी उतारे हैं। यहां ब्राह्मण काफी संख्या में हैं। वे नारा लगा रहे हैं कि ‘एक दबाओ-तीन गिराओ’। इससे बसपा प्रत्याशी बलवीर दंडोतिया ने लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है। बलवीर ब्राह्मण हैं और पूर्व विधायक हैं। मंत्री तोमर के बेटे से जुड़े दो वीडियो सामने आने आए हैं, जिसे कांग्रेस मुद्दा बना रही है। गुर्जर समाज के एक युवक की हत्या भी यहां चर्चा में है, जिसके आरोपी तोमर समाज के बताए जाते हैं। इससे दिग्गज छवि वाले तोमर की चुनौती बढ़ी हुई है। हालांकि, हृदयेश कुमार कहते हैं कि नरेंद्र भाई बड़े कद के नेता हैं और प्रदेश के सीएम भी हो सकते हैं। जीतेंगे नरेंद्र ही।

दिग्विजय नहीं ले रहे कोई रिस्क, भाई के लिए कीं कई सभाएं
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह चाचौड़ा और बेटे जयवर्धन सिंह राघवगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी हैं। दोनों विधायक हैं। राघोगढ़ कांग्रेस का गढ़ है। यहां जयवर्धन को ज्यादा दिक्कत नजर नहीं आ रही है। लेकिन, चाचौड़ा में लक्ष्मण सिंह के सामने भाजपा की प्रियंका मीणा और भाजपा की बागी पूर्व विधायक ममता मीणा आप से आ गई हैं। ममता के पक्ष में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल सभा कर चुके हैं। यहां लड़ाई त्रिकोणीय होती दिख रही है। इसके बावजूद दिग्विजय कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने मंगलवार को लक्ष्मण के समर्थन में कई सभाएं की।

संभाग में प्रदेश के पांच मंत्री…कहीं त्रिकोणीय तो कहीं आमने-सामने की लड़ाई में उलझे
संभाग में प्रदेश के पांच मंत्री भी मैदान में हैं। सिंधिया खेमे से मंत्री बने प्रद्युम्न सिंह तोमर का ग्वालियर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी से संघर्ष है। मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया अटेर में कांग्रेस व सपा के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में उलझे हैं। दतिया से गृहमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा के सामने कांग्रेस ने तगड़ी व्यूहरचना की है। दतिया में मिले प्रांशु पांडेय कहते हैं कि कांग्रेस ने यहां से राजेंद्र भारती को टिकट दिया है और बागी अवधेश नायक को मना लिया है। पूर्व सीएम कमलनाथ से लेकर दिग्विजय सिंह तक कांग्रेस के पक्ष में दतिया पहुंच चुके हैं। गुना की बामेरी से मैदान में डटे राज्यमंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया के सामने कांग्रेस के ऋषि अग्रवाल से है। बामेरी के चंचल सिंह बताते हैं कि महेंद्र, सिंधिया के खास हैं जबकि ऋषि के पिताजी भाजपा के नेता रहे हैं।  मुंगावली में राज्यमंत्री बृजेंद्र सिंह यादव मैदान में हैं। ये भी सिंधिया समर्थक माने जाते हैं। यहां भाजपा से आए यादवेंद्र सिंह कांग्र्रेस प्रत्याशी हैं।

डा. गोविंद सिंह त्रिकोणीय संघर्ष में
नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह लहार से कांग्रेस प्रत्याशी हैं। पिछली बार भाजपा से लड़े रसाल सिंह इस बार बगावत कर बसपा से मैदान में आ गए हैं। भाजपा ने पिछले चुनाव के बसपा प्रत्याशी रहे अंबरीश पर दांव लगाया है। यहां त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है।

क्षेत्र के मुद्दे

  1. जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल सप्लाई भ्रष्टाचार के आरोप।
  2. शिवराज सरकार के दतिया में पीतांबरा माई का लोक व भिंड के दंदरौआ धाम में हनुमान लोक बनाने के एलान की भी चर्चा है।
  3. भाजपा का अयोध्या में राम मंदिर का मुफ्त दर्शन कराने का वादा गरीब परिवारों में चर्चा में है। पिछले 10 दिन से भाजपा नेता यह प्रचार कर रहे हैं।
  4. सिंधिया समर्थक विधायकों के कांग्रेस से भाजपा में पालाबदल पर कई जगह प्रतिक्रिया नजर आ रही है।
  5. स्थानीय मुद्दे हावी हैं। पीएम मोदी और प्रियंका गांधी के भाषण जरूर चर्चा में हैं।
  6. ग्वालियर, शिवपुरी, गुना व मुरैना में से कहीं भाजपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं दिया। इस पर भी नाराजगी है।

वॉशिंगटन में सड़कों पर उतरे हजारों इस्राइली समर्थक, हमास के कब्जे से बंधकों की रिहाई के लिए निकाली रैली

युद्ध के शुरुआती हफ्तों में इस्राइलियों के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त करने के बाद राष्ट्रपति जो बिडेन ने इस्राइल से गाजा में नागरिक पीड़ा को कम करने के लिए अपनी कुछ रणनीति पर लगाम लगाने का आग्रह किया। 

इस्राइल और हमास के बीच जारी युद्ध को एक महीने से अधिक बीत चुका है। दुनियाभर में गाजा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई को लेकर दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच मंगलवार को अमेरिका नेशनल मॉल पर भारी सुरक्षा के बीच हजारों लोगों ने इस्राइल के समर्थन में प्रदर्शन किया और बंधकों की रिहाई की मांग की। इस दौरान लोगों ने रैली निकाली, हमास के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता व्यक्त की और नारेबाजी की।

वहीं युद्ध के शुरुआती हफ्तों में इस्राइलियों के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त करने के बाद राष्ट्रपति जो बिडेन ने इस्राइल से गाजा में नागरिक पीड़ा को कम करने के लिए अपनी कुछ रणनीति पर लगाम लगाने का आग्रह किया।

इस्राइली राष्ट्रपति ने किया भीड़ को संबोधित
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मंच से हमास के हमले की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहूदी विरोधी भावना का उदाहरण बताया। इस बीच इस्राइली राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने यरूशलेम से वीडियो लिंक के जरिए प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और कहा, कि इस्राइल पर हमास का हमला सभ्य समाज के लिए बेहद गंभीर है, जिसकी कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘कोई भी हमें नहीं तोड़ सकता,’ उन्होंने कसम खाई ‘हम फिर उठ खड़े होंगे।’

इधर, हाउस स्पीकर, और आयोवा के सीनेटर जोनी अर्न्स्ट ने कहा कि हमास की क्रूरता को कम करके नहीं आंका जा सकता। ‘वे बच्चों की हत्या करते हैं, महिलाओं से बलात्कार करते हैं। वे बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। यह समझ से परे है कि अमेरिका में कोई इन आतंकवादियों के प्रति कैसे सहानुभूति रख सकता है।

हमास के उग्रवादियों ने 7 अक्तूबर को अचानक गाजा से इस्राइल में घुसकर हमला कर दिया, जिसमें 1200 से अधिक लोग मारे गए और 200 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया। हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राइल ने गाजा में कई हफ्तों के हमलों का जवाब दिया है, जिसमें 11हजार से अधिक फलस्तीनी मारे गए हैं।

सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में से 91 फीसदी पुरुष, पैदल यात्रियों की सबसे ज्यादा मौत

Delhi : 91 percent of those who lost their lives in road accidents were men.

इनमें से अधिकतर पुरुष और महिलाएं 40 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के थे। 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में 86 प्रतिशत पुरुष और 14 प्रतिशत महिलाएं घायल हुईं।सड़क दुर्घटनाओं में हर साल सबसे ज्यादा 91 प्रतिशत पुरुषों की मौत होती है। इनमें से अधिकतर पुरुष और महिलाएं 40 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के थे। 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में 86 प्रतिशत पुरुष और 14 प्रतिशत महिलाएं घायल हुईं। घायलों में 19-30 वर्ष की आयु के पुरुष शामिल हैं, जबकि महिलाएं 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की हैं। वैश्विक सड़क यातायात मौतों में से आधे से अधिक पैदल चलने वालों, साइकिल सवार और मोटरसाइकिल चालकों की होती है। 

सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय का मुंबई के कोकिला बेन हॉस्पिटल में निधन

सहारा इंडिया और उसके प्रमुख सुब्रत रॉय (Subrata Roy) का मुंबई के कोकिला बेन हॉस्पिटल में निधन। कई दिन से बीमार थे।

लक्ष्मी माता विवाद में स्वामी प्रसाद मौर्य माफी मांगें… मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव का जोरदार हमला

स्वामी प्रसाद मौर्य के लक्ष्मी माता के चार हाथों पर उठाए गए सवाल पर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में सपा के सहयोगी दल कांग्रेस ने पहले हमला बोला। वहीं, भाजपा भी इस मुद्दे पर हमलावर है। वहीं, अब मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू और भाजपा नेता अपर्णा यादव ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य से माफी की मांग की है।

PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक ट्वीट, चुनाव आयोग ने थमाया सीएम केजरीवाल को नोटिस

चुनाव आयोग (EC) ने AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया है। BJP ने EC से शिकायत की कि पार्टी के आधिकारिक हैंडल पर पोस्ट किए गए दो ट्वीट्स ने कथित तौर पर PM मोदी को अपमानजनक, अपमानजनक और मानहानिकारक तरीके से चित्रित किया है। इसके बाद चुनाव आयोग ने यह फैसला किया है। प्रियंका गांधी वाड्रा को भी ईसी का नोटिस दिया गया है।

कर्नाटक में हिजाब बैन पर इंडिया में तकरार, राज्य में बीजेपी के रास्ते क्यों गई कांग्रेस

कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने राज्य में आगामी 18-19 नवंबर को होने वाली भर्ती परीक्षाओं में हिजाब बैन कर दिया है। इसके बाद नया गठबंधन I.N.D.I.A. के नेता उमर अबदुल्ला नाराज बताए जा रहे हैं। लग रहा है कि बीजेपी वाले दांव से कांग्रेस की मुश्किल बढ़ गई है।

कुछ दिनों में पराली देखने को नहीं मिलेगी, बढ़ेंगे भाव… रेडी है नित‍िन गडकरी का P-प्‍लान

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पास पराली की समस्‍या को खत्‍म करने का पूरा प्‍लान रेडी है। उन्‍होंने भरोसे से कहा है कि जल्‍दी ही पराली मिलेगी नहीं। इसके लिए इतना बड़ा बाजार होगा कि किसान इसे जलाने के बजाय बेचना पसंद करेंगे। उन्‍होंने इस प्‍लान के बारे में कई चीजें उजागर की हैं।

हम जो कहते हैं, वो करते हैं: राजनाथ

मध्य प्रदेश के जावरा (रतलाम) में जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘चुनाव में नेता जनता के बीच खड़े होकर तरह तरह के आश्वासन देते हैं और चुनाव समाप्त होने के बाद अपने आश्वासन भूल जाते हैं। जो कहते हैं वो करते नहीं। लेकिन मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि जो कुछ भी हमने कहा है अक्षरशः उसका पालन किया है।’

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें