अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

आओ  प्रकृति से मित्रता करें

Share

शिक्षित मनुष्य

  • मंजुल भारद्वाज

जंगल उजाड़ कर
तुम क्या पाओगे
शुद्ध हवा,पानी से
महरूम हो जाओगे !

अनपढ़ मनुष्य
जंगल में रहते हुए
मनुष्य था
शिक्षित होकर
मनुष्य
जंगली हो गया!

प्रकृति विविध
समग्र और सबकी है
मनुष्य कुंठित
आत्मघाती है!

उजाड़ कर
पंछियों के घोंसले
वन्य पशुओं की मांद
बर्बाद कर दिए जंगल !

वर्चस्ववाद का शिकार
जंगली प्राणियों का
शिकार करते करते
खुद जंगल का शिकार हो गया!

शिक्षित मनुष्य
इतनी सी बात
नहीं जान पाया
वो बगीचा बना सकता है
जंगल नहीं !

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें