मानसिक तौर पर अपाहिज संतान दे रहा है विकृत सेक्स ||*
✍आरती शर्मा
(संयोजिका : चेतना मिशन)
सोचो जरा!
क्या बिना संभोग के किसी का अस्तित्व संभव है? राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, कबीर, नानक, मोहम्मद कैसे पैदा हुए?
नर मादा के गहरे मिलन से ही ऐसा अस्तित्व संभव है। लेकिन इनके माँ बाप का मिलन, केवल वासना मात्र नही था! वो था एक अद्भुत प्रेम मिलन!
आज के बच्चे बिना प्रेम के पैदा हो रहे है। प्रेम अखंड है. समग्र प्रेम अनेक से हो ही नहीं सकता. प्रेम खंडित नहीं हो सकता. तो आज प्रेम नहीं है, इसीलिए हर तरफ दुराचार, कइयों को यूज़ करना. पुरूष-स्त्री एक दूसरे को सेक्स की मशीन समझ रहे है! जब तक दोनों में प्रेम पैदा नही होगा, तब तक सिर्फ शारीरिक मिलन ही संभव है।
जब तक महज वासना रहेगी तब तक प्रेम पूर्वक मिलन हो ही नहीं सकता, और जहां प्रेम नही वहां कैसे उम्मीद कर सकते है कि फिर से राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, कबीर, नानक, मोहम्मद पैदा होंगे!
इससे जड़, घामड़, दुराचारी, शातिर या बुद्धू जरूर पैदा होंगे! हो ही रहे हैं. तभी तो बच्चे दब्बू, आतंकी, हवसी, कायर, मानसिक रूप से बीमार, अपंग, पागल पैदा हो रहे हैं.
क्या दे रहे हैं हम समाज को? कैसी होंगी हमारी अगली पीढ़ियां?? ध्यान जागरण देता है, जागरण के अलोक में सदाचरण फलित होता है. यह आँख, यह क्षमता चेतना विकास मिशन के व्हाट्सप्प 9997741245 पर कनेक्ट होकर निःशुल्क प्राप्त की जा सकती है.
अगर अभी भी सेक्स पे ध्यान नही दिया गया तो इसी सदी के अन्त तक दुनिया में 40% से ज्यादा आबादी समलैंगिक हो जायेगी, किन्नर पैदा होंगे।
लोगो का सेक्स भी प्राकृतिक नही रहेगा : 60% आबादी आज सेक्स से सम्बन्धित बीमारियों से पीड़ित है, ऐसा क्यों हो रहा है?
प्रेम और सेक्स को समझने की कोशिश नही करने के कारण ही आज मानव जाति में इतना तनाव, हिंसा, आतंकवाद हो रहा है। यहाँ तक की 90% पागल होने वाले लोगो का कारण सेक्स ही है।
क्या दुनिया को सेक्स को समझने की जरूरत नही है? सब लोग हां ही बोलेंगे! लेकिन सब बड़े छोटो से छुपा रहे हैं, माँ बाप अपने बच्चों के सामने सेक्स की बात करने से डरते हैं, यहाँ तक की लोग तो अपने बच्चों को प्यार करने से भी डरते है, इतना डरते है कि ज्यादा प्यार से बाप बेटी, माँ बेटे, भाई बहन के सम्बन्ध खराब ना हों जाये, बाप बेटे की मर्यादा ना खत्म हो जाये!
अजीब प्रकार के मनुष्य हो गए है, इन सबका एक मात्र कारण है, सेक्स; और अब तो सेक्स भी सेक्स नही रहा! वो भी नकली हो गया है, शारीरिक सेक्स कम होता जा रहा है, मानसिक सेक्स ज्यादा हो रहा है, मन में सेक्स चल रहा है लेकिन तन सेक्स के योग्य नही रहा, ऐसा क्यों हो रहा है?
कभी सोचा आपने?
लोग पोर्न देख रहे है, सेक्स की कहानियां पढ़ रहे है, हस्तमैथुन कर रहे है, आज 95% आबादी हस्तमैथुन करती है। 80 साल के बूढ़े 20 साल की लड़की से शादी कर रहे है।
आये दिन आप पढ़ते ही होंगे : लोग सगे-संबंधियों, खून के रिश्तो में भी सेक्स कर रहे हैं. जानवरो से भी सेक्स कर रहे है. मनुष्य के सिवा कोई भी दूसरी प्रजाती ऐसा नही कर रही है, बकरी को देख कर भैंसे के मन में सेक्स का ख्याल नहीं आता, लेकिन इंसान तो गैर इंसान से भी सेक्स कर रहे हैं।
कई देशो में तो लोग जानवरों से शादी तक कर रहे हैं। शादीशुदा लोग हस्तमैथुन कर रहे है, ये सब चंद मिनट का असफल सैक्स करने, पशु या यंत्र सैक्स करने, गुदा या समलैंगिक सैक्स करने या इसे दबाने के कारण हो रहा है। जबकि प्रेम पूर्ण स्वस्थ सैक्स के बिना जीवन संभव नहीं है।
लेकिन कोई इसे समझने, जानने और मानने को राजी नहीं हैं।_
सेक्स को समझो. प्रेम के धरातल पर इसे स्वस्थ तौर पर जीओ! ये जीवन का हिस्सा है। नये अस्तित्व का आरम्भ है, आंनद का महासागर है।
बस एक डुबकी “गहरे में” लगानी है! बे सुध कर देने वाली डुबकी. लेकिन वासना में नही, वास्तविक प्रेम में : एक इंसान के साथ. ऐसे इंसान के साथ जो अनेक को यूज़ करने वाला दुराचारी नहीं हो, काबिल हो !!
🔥चेतना विकास मिशन





