अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

जाकी रही भावना जैसी…?

Share

शशिकांत गुप्ते

परिवर्तन संसार का नियम है। देश-काल और स्थिति के नियमानुसार बदलाव होतें रहता है।
सबसे बड़ा बदलाव आया है, सूचना एवं प्राद्योगिकी (Information technology)
के क्षेत्र में।
प्राद्योगिकी क्षेत्र के अंतर्गत एक व्यावसायिक क्षेत्र का उदगम हुआ है,जिसे Event Management कहतें हैं।
इवेंट, किसी वृतांत,घटना या समारोह को कहतें हैं।
इनदिनों आए दिन बड़े-बड़े आयोजनों की खबरें पढ़ते रहते हैं। इस तरह के भव्य आयोजनों की व्यवस्था करना ही इवेंट मैनेजमेंट कहलाता है। इन आयोजनों की सफलता के पीछे जिन लोगों की कड़ी मेहनत होती है, वे इवेंट मैनेजर कहे जाते हैं। इवेंट मैनेजर किसी भी आयोजन के आरंभ से अंत तक होने वाले हर कार्यक्रम, हर पड़ाव का सुचारु संचालन करते हैं।
चुनाव के दौरान प्रत्याशी के झंडे,पोस्टरों के माध्यम से प्रचार के प्रसार के लिए इवेंट मैनेजर (lobur hire) करतें हैं मतलब श्रमिकों को किराए पर लेतें हैं। इसे ठीकेदारी कहना इवेंट मैनेजमेंट के व्यवसाय का अपमान होगा।
इसका मुख्य कारण है। हरएक दल में कार्यकर्ताओं का अभाव हो गया है। तकरीबन सभी नेता बन गए हैं। नेता बनने पर कार्यकर्ता का रोल क्यों और कौन अदा करेगा? नेता यदि कार्यकर्ता बन जाएं तो उन्हें आमजनता के बीच रहना पड़ेगा। आमजनता की समस्याओं को सुनना, समझना पड़ेगा। इतनी फुर्सत किसी भी नेता के पास नहीं होती है।
यह तो हुई सियासत की स्थिति है।
सूचना प्राद्योगिकी क्षेत्र के विस्तार की रफ्तार जितनी तेज होतें जा रही है, उससे दुगुणी गति से सामाजिक क्षेत्र में अधोगति हो रही है। सूचना प्रद्योगिकी के कारण देश के भावी कर्णधार नित नए वीडियो गेम सीख रहें हैं।
बहुत से खेल देश के नोनिहालो को अल्पआयु में ही दिवंगत घोषित कर रहें है।
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र की प्रगति सिर्फ नोनिहालो की मानसिकता पर प्रहार नहीं कर रही है। बल्कि युवावर्ग,अधेड़आयु वर्ग भी इससे वंचित नहीं है।
पूर्व में सामान्यज्ञान की वृद्धि करने के लिए आपस में पहेलियां बुझते थे। अब तो संगणक मतलब Computer के समक्ष बैठा कर चंद सामान्यज्ञान के प्रश्नों को पूछ कर लोगों करोड़पति बनाया जा रहा है। इस खेल में प्रश्न पूछने वाले को सामान्यज्ञान है या नहीं यह प्रश्न अनुत्तरित है।
प्रौधोगिकी क्षेत्र में वाकई क्रांति हो गई है। जितनी क्रांति हुई है उससे कईं गुणा अधिक भ्रांति फैलाने में भी प्रौद्योगिकी का योगदान कम नहीं है।
प्रौधोगिकी का इस्तेमाल तो ठग विद्या में माहिर लोग भी बख़ूबी कर रहें हैं। ये ठग बगैर जान पहचान के लोगों लाखों, करोडों रुपयों के बक्शीस ऐसे बांटते है मानो इनके घर पैसे के पेड़ उगे हैं। इन ठगों को सिर्फ पेड़ों से पैसे तोड़ तोड़ कर देना है।
वैसे एक अंदर की बात है पन्द्रहलाख का स्वप्न भी, सभी देशवासियों को याद होगा?
बहरहाल मुद्दा है, सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र का? सूचना क्षेत्र में सामाचारों की निष्पक्षता पर ही प्रश्न उपस्थित होतें हैं?
सबसे बड़ा प्रश्न है साईबार क्राइम का? साईबर क्राइम का प्रचलन भी सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की ही देन है।
अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग और दुरुपयोग करना यह मानव की मानसिकता पर निर्भर है।
जैसे कर्म करेगा वैसे फल देगा भगवान ये है गीता का ज्ञान।
परिवर्तन अवश्यंभावी है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें