भोपाल। राज्यों की आय के तीन प्रमुख स्रोत शराब, परिवहन और खनिज ही होते हैं। ऐसे में अगर प्रदेश के सरकारी खजाने को भरने, अवैध शराब के कारोबार को रोकने और जहरीली शराब जैसे मामलों की संभावना पूरी तरह से समाप्त करने के लिए आबकारी विभाग द्वारा शराब दुकानों के वृद्धि का प्रस्ताव क्या दिया गया, तो लंबे अरसे से देश और प्रदेश में हाशिए पर चल रही मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने हायतौबा मचाना शुरू कर दिया।
वे खुलकर इस मामले में सामने आई तो न तो इस मामले में उन्हें विपक्ष का साथ मिला और न ही अपने दल और सरकार का। दरअसल राजनैतिक विश्लेषक उनके इस कदम को मप्र की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और चर्चा में बने रहने के लिए उठाया गया कदम मान रहे हैं। उमा भारती के विरोधी ट्वीट के बाद आबकारी कमिश्नर द्वारा दुकानों में वृद्धि किए जाने के लिए कलेक्टरों से मांगे गए प्रस्ताव के मामले में यू टर्न लेते हुए रात में ही उक्त आदेश को रद्द कर दिया गया था। हालांकि इस मामले में चौहान को बैकफुट पर आने की जरुरत नहीं थी, क्योंकि उन्हें सत्ता, संगठन के साथ ही विपक्ष का भी साथ मिल रहा था। अब तो कहा जा रहा है कि शिवराज सिंह को ऐसे मामलों में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जरूर कुछ सीख लेना चाहिए। दरअसल उप्र की योगी सरकार ने बीते रोज ही न केवल बार लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को और सरल किया है, बल्कि उप्र में ट्रेन और क्रूज में विदेशी शराब की बिक्री की अनुमति तक दे दी है। इसके लिए सरकार ने उत्तर प्रदेश आबकारी (बार लाइसेंसों की स्वीकृति) नियमावली 2020 प्रख्यापित करते हुए इसका प्रावधान किया है। उप्र में इस मामले में अब बार लाइसेंसों की पुरानी प्रक्रिया को सरल करते हुए अब होटल, रेस्तरां, क्लब, बार और एयरपोर्ट बार लाइसेंसों की स्वीकृति के अधिकार शासन के स्थान पर आबकारी आयुक्त को दे दिए गए हैं। इसी तरह से अब मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित बार समिति के स्थान पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बार समिति का गठन करने का भी निर्णय ले लिया गया है। नर्ई व्यवस्था में बार कमेटी को समाप्त कर जिलाधिकारी अब अपनी संस्तुति सीधे आबकारी आयुक्त को भेजेंगे और आबकारी आयुक्त इसकी स्वीकृति देंगे। विशेष प्रयोजन की रेलगाडिय़ों या प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित क्रूजों में विदेशी मदिरा विक्रय करने के लिए लाइसेंस स्वीकृत करने का भी प्रावधान कर दिया गया है।
सरकार की मुश्किल: सरकार के सामने राजस्व का बड़ा सवाल है। अगर शराबबंदी की जाती है तो राजस्व के नुकसान की पूर्ति कैसे होगी। पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रही सरकार पूर्व से ही मध्य प्रदेश में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल बिक रहा है। ऐसे में यह और महंगे हो सकते हैं।
मुकेश ने इस तरह किया उमा का विरोध
इस मामले में भाजपा के नवनियुक्त उपाध्यक्ष मुकेश चतुर्वेदी भी उमा से अलहदा सोचते हैं। उनका कहना है कि अपने यहां तो देवता भी शराब पीते थे, मैने खुद मृत्युंजय में पढ़ा है। उसमें लिखा है कि जब महाभारत युद्ध की घोषणा हुई तब राजाओं ने घोषणा की थी कि आयुध और शराब निर्माता अपना उत्पादन बढाएं। यह तो पुरातन काल से होता आया है। दरअसल उमा को शास्त्रों का ज्ञाता माना जाता है, इस वजह से ही उनके विरोध के लिए मुकेश चतुर्वेदी द्वारा यह उदाहरण दिया गया माना जा रहा है।
उमा दे रही हैं अब यह तर्क
मध्य प्रदेश में शराबबंदी के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने खुलकर सामने आते हुए कहा है कि महिला और बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों और सड़क दुर्घटनाओं का मूल कारण शराब का सेवन है। शराबबंदी के लिए राजनीतिक साहस और समाज में चिंतन जरूरी है। शराब से मिलने वाले राजस्व की भरपाई के लिए और विकल्प तलाशे जाने चाहिए। उनका कहना है कि लॉकडाउन के दौरान शराब नहीं मिलने से किसी की मौत नहीं हुई। तब मैंने पार्टी के दो प्रमुख नेताओं से कहा था कि इस लाइन पर आगे बढ़ना चाहिए। समाज की तरफ से शराबबंदी को लेकर कोई दिक्कत नहीं आती है। महिलाओं का सहयोग मिलेगा। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिवराजसिंह चौहान सामाजिक चिंतन की सोच रखते हैं। मैं शिवराज जी से भी इस मामले में मिलूंगी।
शराब राजस्व का अहम हिस्सा: नरोत्तम
सरकार के वरिष्ठ मंत्री नरोत्तम मिश्रा शराब बंदी के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के फायर ब्रांड नेत्री सुश्री उमा भारती ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि शराब सरकार के राजस्व का अहम हिस्सा है। इसे बंद करने से राजस्व पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि भाजपा में सबको अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री को ही लेना है। बहरहाल शराब बंदी के इस मुद्दे पर मप्र में सियासत गर्म है।
लक्ष्मण सिंह के सुझाव भी बेहतर हैं
शराब बंदी के मुद्दे पर सियासत तेज होने के बाद भी सरकार को कांग्रेस से कोई चुनौती मिलती नहीं दिख रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक लक्ष्मण सिंह ने राजस्थान की शराब नीति का समर्थन करते हुए हेरिटेज लिकर पैटर्न को प्रोत्साहन देने की मांग की है। इस तरह से उन्होंने सरकार को सहारा दिया है। सिंह ने कहा कि सरकार यदि क्वालिटी वाली शराब और नई शराब दुकानें खोलती है तो इससे सरकार को रेवन्यू मिलेगा और जहरीली शराब की बिक्री पर भी रोक लेगेगी। उन्होंने अपने ट्वीट में शराबबंदी का विरोध किया है। इससे कांग्रेस के विरोध की धार भी मंद पड़ गई है। उन्होंने लिखा कि शराब बंदी से राजस्व की हानि होगी और राज्य सरकार को अधिक कर्ज लेना पड़ेगा। शराब उत्पादन एक उद्योग है जो राजगार और राजस्व देता है जो कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लिए जरूरी है। गौरतलब है कि लक्ष्मण सिंह समय-समय पर अपनी बेवाक राय रखते रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी महुआ पैटर्न की नई शराब बनाने का प्रस्ताव दिया था।





