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धधकती आग और जहरीले धुएं में जी रहे चिरमिरीवासी, 250 साल तक सुलगती रहेगी ये जमीन

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बैकुंठपुर/बिलासपुर

चिरमिरी,125 वर्ग किलोमीटर में फैले जंगल व पहाड़ियों से घिरा शहर। चारों ओर काेयले का अथाह भंडार। अंडर ग्राउंड व ओपन काॅस्ट खदानें। दूर से यह जगह किसी हिल स्टेशन से कम नजर नहीं आती, पर नजदीक जाने पर यहां की जमीनी हकीकत का पता चलता है। यहां की स्थिति बड़ी भयावह है। शहर के चारों ओर भूमिगत कोयले की बंद पड़ी खदानों में आग धधक रही है और इसकी जहरीली गैस बाहर निकल रही है।

यह जानलेवा है। इसी तरह किसी भी दिन शहर जमीन के भीतर समा सकता है। यहां करीब एक लाख लोग रहते हैं ओर सभी दहशत में है। कोयले की भट्ठी पर बिना किसी भविष्य की उम्मीद से दिन गुजार रहे हैं। चिरमिरी का हल्दीबाड़ी, बरतुंगा, बड़ा बाजार, छोटी बाजार के नीचे बंद पड़ी अंडर ग्राउंड खदान में पिछले 4 दशक से आग लगी हुई है। भीतर ही भीतर यह धधक रही है। इसका असर बाहर भी जमीन में देखने को मिलता है।

कहीं कहीं से धधकती आग नजर आती है तो कहीं जमीन पर पैर रखते ही इसका अहसास हो जाता है। इसमें ही लोगों के मकान व दुकान हैं। बड़ा बाजार में आशुतोष ताम्रकार की बर्तन की दुकान है और पीछे ही मकान है। वे बताते हैं कि मकान व दुकान के नीचे की जमीन इतनी आग धधक रही है कि उपरी हिस्सा हमेशा गर्म रहता है।

आशुतोष का कहना हैं कि उन्हें खतरे का अंदेशा है, जमीन किसी दिन भी दिन धंस सकती है पर वे परिवार को लेकर जाएं तो जाएं कहां? इसी तरह की स्थिति फोटो फ्रेमिंग की दुकान चलाने वाले गोविंद साहू की है। गोदरीपारा सर्कल में हल्दीबाड़ी व डोमनहिल के नीचे से पिछले 10 साल से जहरीली गैस निकल रही है।

जहरीले धुएं से हो चुकी है चरवाहे व बकरी की मौत
काली बाड़ी के नीचे खदान में आग लगी तो एसईसीएल ने इसे ईंट से जुड़ाई कर बंद करवा दिया। 2004 से इसके भीतर आग सुलग रही है। अब यह धीरे धीरे पूरे इलाके में फैल चुकी है। जगह-जगह धुआं निकल रहा है। यह जहरीला है। आसपास से गुजरना मुश्किल है। इसकी दुर्गंध बहुत तेज है। 2013 में एक चरवाहे व बकरी की इसी धुएं से मौत हो चुकी है। इस मामले में एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ थाने में एफआईआर भी दर्ज है पर अभी तक पुलिस ने किसी के खिलाफ काेई कार्रवाई नहीं की है। दो दिन पहले सोमवार रात में महुआ दफाई क्षेत्र में जमीन में दरार आ गई थी, जिससे करीब सवा सौ लोग प्रभावित हुए।

यही स्थिति रही ताे ढाई सौ साल तक जलती रहेगी

  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक चिरमिरी की जमीन में इतना कोयला मौजूद है कि ये जगह करीब 250 साल तक ऐसे ही सुलगती रहेगी।
  • लगातार जलते हुए कोयले की वजह से यहां की जमीन फट रही है और दरारों से हर समय धुआं निकलता देखा जा सकता है।

दहशत: नीचे धधकती आग के ऊपर रहते हैं लोग

  • एरिया – 125 वर्ग किमी में है
  • जनसंख्या – 2011 में 91 हजार, वर्तमान में करीब 75 हजार

यह भी जानिए

  • 1928 – में चिरमिरी की शुरुआत हुई, अंग्रेजों ने खदानों को खोला
  • 1932 – से चिरमिरी में काेयले का उत्पादन खदान से शुरू हुआ
  • 1939 – में कोयला ले जाने के लिए यहां रेल लाइन बिछाई गई

सिलिकोसिस की बीमारी से शहर के लोग हो रहे पीड़ित
चिरमिरी में रहने वाले राजकुमार मिश्रा का कहना है जिस तरह से चिरमिरी में ओपन कास्ट के माध्यम से कोयले का उत्खनन हो रहा है दिनभर धूल का गुबार उड़ता है। इससे लोग सिलिकोसिस की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसका इलाज नहीं है। इसमें मौत निश्चित है जिनमें सिलकोसिस की बीमारी पाए जा रहे हैं उन्हें बाहर भेज दिया जा रहा है। कालरी के अधिकारी अपने कर्मचारियों को बड़े अस्पतालों पर भेज देते हैं पर आम लोगों को बीमारी होती है तो इसकी कालरी की कोई जिम्मेदारी नहीं होती।

एक दिन विस्फोट होगा और सबकुछ खत्म हो जाएगा
संतोष गुप्ता का कहना है कि हम दुर्भाग्यशाली है। कोई भी जनप्रतिनिधि हमारी समस्याओं के लिए गंभीर नहीं है। चुनाव के समय इस आधार पर पर वोट मांगते है। उनका कहना है कि काेयले में आग लगी है तो इससे विस्फोट जरूर होगा ही। आने वाले दिनों में यह सैकड़ों लोगों की मौत का कारण होगा। 6 मई 2010 को अंजनी हिल में ऐसी घटना हो चुकी है। इसके बाद भी कालरी प्रबंधन ने किसी तरह की सावधानी नहीं बरती। एसईसीएल यदि चाहे तो घटनाएं रुक सकती है पर वह इसमें पैसा खर्च नहीं करना चाहता।

Ramswaroop Mantri

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