शशिकांत गुप्ते
वह फरार हो गया। उसके गुर्गे गिरफ्त में आ गए। प्रायः गुर्गे ही गिरफ्त में आते हैं।
क्या कानून का जाल प्राकृतिक रूप से सिर्फ छोटी मछलियों को ही पकड़ ने के लिए बना है? मगरमच्छ जाल में कभी भी क्यों नहीं फसता है?
उक्त व्यवहारिक प्रश्नों के उत्तर खोजने के पूर्व हमें अपने जहन में झांक लेना चाहिए।
हमरा देश धार्मिक देश है। हम आस्थावान लोग हैं।
आस्थावान होने के साथ हम बहुत संवेदनशील भी हैं।
जरासा भी किसी ने आस्था के विपरित कुछ वक्तव्य दे दिया, तो तुरंत हमारी आस्था आहत हो जाती है।
मुख्य मुद्दा है। वह फरार हो गया?
उसके पास हथियारों का जखीरा बरामद हुआ? इतना जखीरा जमा करने के लिए उसे कितना समय लगा होगा? क्या उसने इतनी तादाद में हथियार किसी अदृश्य चमत्कारिक शक्ति से ही जमा किए होंगे?
पुनः सवाल वही है, वह फरार हो गया? कानून के हाथों की लंबाई ऐसे लोगों तक पहुंचने में क्यों छोटी क्यों हो जाती है?
पुनः स्मरण होता है कि, हम धार्मिक आस्थावान लोग हैं।
हम हर एक कार्य मुहूर्त देख कर संपन्न करते हैं।
किसी भी आरोपी को पकड़ ने पूर्व मुहूर्त देखना चाहिए?
कानूनी कार्यवाही करने वाले कर्मियों के हाथों जो हाथियार होते हैं, उन पर नींबू मिर्च बांधना चाहिए?
फरार आरोपी पकड़ने के लिए जो मुकर्रर प्रशासन है, उस प्रशासन के कर्मियों को सफलता प्राप्ति के लिए हवन पूजन करना चाहिए? शत्रु हांता मंत्रों का जाप करते हुए,आरोपी के ठिकानों पर दबिश दी जानी चाहिए?
हमारे देश की क्रिकेट टीम भी तो हमारे धार्मिक लोगों के द्वारा हवन पूजन करने के कारण ही जीत प्राप्त करती है। कभी कभार हवन पूजन करते समय मंत्रों में कुछ कमी रह जाती है,तो हमारी टीम हार भी जाती है।
हम इतने आस्थावान लोग हैं कि हम अपने आराध्य भगवान श्री गणेश जी की स्थापना भी मुहूर्त देखकर ही करते हैं?
मुहूर्त के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रमाणित करने के लिए हम त्यौहार भी दो दिनों तक मनाते हैं?
आस्थावान होने से हमें अपनी श्रद्धा पूर्ण अराधना का फल कैसे प्राप्त होता है? यह हमें अपने देश की फिल्मों से सीखना चाहिए। फिल्मों में दर्शाया जाता है,कोई कितनी ही गंभीर बीमारी से पीड़ित हो? मारधाड़ के दृश्य में कोई अभिनेता कितनी ही गंभीर अवस्था में पहुंच जाए?
फिल्मों में अभिनय करने वालें परिजन भगवान की आराधना में भक्ति गीत गाते हैं।
भक्ति गीत की अंतिम पंक्ति जैसे ही समाप्त होती है। मृत्यु तुल्य वेदना से पीड़ित और गंभीर रूप से घायल कलाकार एकदम स्वस्थ हो जाता है।
यदि हम हर एक कार्य को आस्था रखते हुए करेंगे तो निश्चित ही सफलता प्राप्त होगी।
शत्रु नाशक मंत्र और मंत्रों को पढ़ने की विधि के साथ टोटकों की पुस्तके बाजार में उपलब्ध है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





