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दीर्घजीवन की सुलझती गुत्थी

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निर्मल कुमार शर्मा

         अभी तक लगभग सभी प्रबुद्ध लोगों और वैज्ञानिक भी इस मामले में एक मत थे कि हमारे द्वारा लिए जानेवाले पौष्टिक आहार,योग,व्यायाम, निश्चिंतता आदि सुविधाओं और कारणों की वजह से हम मानवप्रजाति को बेहतर स्वास्थ्य और दीर्घजीवन मिलता है,परन्तु अभी पिछले दिनों जापान की राजधानी टोक्यो के कीयो यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में माइक्रोबायोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी विभाग के जापानी वैज्ञानिकों द्वारा किए गये एक महत्वपूर्ण शोध से इसमें एक नया मोड़ आ गया है।

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उन वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन करने के लिए 319 लोगों का चयन किया,जिनमें 160 लोग ऐसे हैं,जो 100 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं,इनकी औसत आयु 107 वर्ष है,इसके अतिरिक्त इस समूह में 47 लोग ऐसे हैं,जिनकी उम्र 21 वर्ष से 55 वर्ष की है,112 लोग ऐसे हैं,जिनकी उम्र 85 से 89 साल है। शोध में इन वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि 100 वर्ष की उम्र पारकर चुके लोगों की आंतों में एक अलग और विशिष्ट गुणवाले वैक्टीरिया हैं,जो उनके शरीर को बीमार करनेवाले वैक्टीरिया को खाकर उनको नष्ट कर दे रहे हैं,इसके अलावे ये वैक्टीरिया सेकेंडरी बाइल अम्ल छोड़ते हैं,जो अच्छे स्वास्थ्य के साथ उम्र बढ़ाने में सहायक है,जिससे ये लोग प्रायः अधिकांश बीमारियों से मुक्त रहते हैं। वैज्ञानिकों ने इस शोध में यह प्रामाणित किया कि जिन लोगों में ये वैक्टीरिया पाये जाते हैं,उन लोगों के शरीर में क्रोनिक बीमारियों और संक्रमण का खतरा बहुत न्यूनतम होती है ! वैज्ञानिकों ने एक और आश्चर्यजनक और हैरत में डालनेवाली बात का रहस्योद्घाटन किया कि जब हमारी आयु कम होती है,तब हमारी आंतों में इस प्रकार की वैक्टीरियाओं की किस्में बहुत कम संख्या में होती है,लेकिन जैसे-जैसे हमारी आयु बढ़ती है,इस तरह की फायदेमन्द बैक्टीरियाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती चली जाती है ! वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि ऐसे फायदेमंद वैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए हमें फर्मेटेड भोजन यथा मट्ठा,दही,विनेगर,ब्रेड आदि भोज्यपदार्थों की मात्रा बढ़ा लेनी चाहिए,इससे इस अच्छे वैक्टीरिया की संख्या में आशातीत वृद्धि होती देखी गई है। इन मानवमित्र वैक्टीरिया या माइक्रोऑर्गेनिज्म को वैज्ञानिकों ने गट माइक्रोऑर्गेनिज्म या वैक्टीरिया नाम से पुकारते हैं। यह महत्वपूर्ण शोध अभी पिछले दिनों दुनिया भर में सुप्रतिष्ठित नेचर जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है ! तो आज से आप भी अपने भोजन में छाछ,मट्ठा,दही,नमकीन लस्सी सम्मिलित करिए और दार्शनिक कवि संत कबीर दास जी जैसे 120 वर्ष की लम्बी आयु तक जीकर इस रंगविरंगी दुनिया को जी भरकर देखिए,निहारिए और आनन्द के साथ अपने जीवन का लुत्फ उठाइए।

  -निर्मल कुमार शर्मा,’गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण,

गाजियाबाद, उप्र

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