शशिकांत गुप्ते
रामनवमी के दिन रामजी जन्म हुआ है। रामजी के जन्म का उद्देश्य क्या था? रामचरितमानस के बालकांड में संत तुलसीबाबा ने निम्न चौपाइयों में समझाया है।
बाढ़े खल बहु चोर जुआरी।
जे लंपट परधन परदारा।।
मानहि मातु पिता नहि देवा।
साधुन्ह सन करवावही सेवा।।
जिन्ह के यह आचरण भवानी।
जे जानेहु निसिचर सब प्राणी।।
अर्थात जिनके आचरण उक्त प्रकार के होतें हैं वे,सभी असुरी प्रवृत्ति के होतें हैं।
ऐसे प्रवृत्ति के लोगों को सबक सिखाने के लिए रामभगवान का जन्म हुआ।
तुलसीबाबा ने जितना साहित्य रामभगवान पर लिखा है,शायद ही किसी ओर ने लिखा हो?
तुलसीबाबा ने सम्राट अकबर के कार्यकाल में रामचतीतमानस की रचना की है। रामचरितमानस ग्रंथ की रचना ने ही रामजी की महिमा को देश के दूर दराज के आँचल तक पहुँचाया है।
अकबर का कार्यकाल ईसवी सन 1556 से 1605 तक का है। इतिहास में यही कार्यकाल लिखा है।
अकबर मोगल साम्राज्य का तीसरा शासक था।अकबर ने साम्प्रदायिक सौहाद्र बनाएं रखने के लिए दिन-ए-इलाही धर्म की स्थापना की थी।
तात्कालिक समय में तुलसीबाबा ने असुरी प्रवृत्ति को परिभाषित करने का साहस दिखाया है।
त्रेतायुग में जन्मे रामभगवान के समय असुरी प्रवृत्ति का हूबहू वर्णन तुलसीबाबा रामचरितमानस में किया है।
निश्चित ही तुलसीबाबा की अंतर्चेतना जागृत होगी।
इतिहास में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि, मोगल साम्रज्य के तृतीय सम्राट बादशाह अकबर ने तुलसीबाबा का कभी कोई विरोध किया है।
रामभगवानजी ने त्रेतायुग में जन्म लेने के बाद सम्पूर्ण जीवन त्याग ही त्याग किया है।
कलयुग में रामभगवान के प्रति अस्थावन लोगों की श्रद्धा जागृत हो गई है।
श्रद्धालुओं को प्रणाम करना चाहिए। श्रद्धालु इस सूक्ति को चरितार्थ कर रहें हैं कि, भक्ति में शक्ति होती है
इसीलिए सशक्त हाथों देश की बागडौर आतें ही भगवान का दिव्यभव्य मंदिर निर्मित हो रहा है। त्रेतायुग में वनवास के दौरान पाँचवृक्षों की बीच पर्णकुटी बनाकर रामजी ने अपना निवास बनाया। इस निवास का नाम पंचवटी रखा।
आस्थावान आमजन को मंदिर दर्शन के लिए मुफ्त यात्रा करवाएंगे।
देश में पुण्यवान लोगों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होगी।
निश्चित ही असुरी प्रवृत्ति का नाश होगा। धर्म की विजय होगी। अधर्म का हार होगी।
निश्चित ही भारत विश्व गुरु बनेगा।
शशिकांत गुप्ते इंदौर




