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*प्रधानमंत्री जी! आप अपने सियासी पिता के बारे में गलत क्यों नहीं बोल सकते?* 

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कनक तिवारी 

प्रधानमंत्री जी! क्रान्तिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा आपके गुजरात से ही रहे हैं। उनके निधन के बदले पिता श्यामाप्रसाद मुखर्जी का नाम आपके मुंह से निकल गया। लोगों ने जबरिया बतंगड़ बना दिया। लोगों को आपकी तरह कामधाम तो है नहीं! श्यामजी कृष्ण वर्मा की भस्मि के बदले श्यामाप्रसाद की अस्थियां इंग्लैंड से नेहरू की कांग्रेस सरकार ने उनके सम्मान के अनुकूल भारत नहीं लाकर अपमान किया। आपने ऐसा कह भी दिया आपसे तो नेहरू का अपमान कहां हो पाया? अपमान तो श्यामजी कृष्ण वर्मा और श्यामप्रसाद का हो गया। खैर, वह आपके घर की बात थी। आप अपने सियासी पिता के बारे में गलत क्यों नहीं बोल सकते? 

नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालयों को बिहार में आपने स्थापित होना बता दिया। आपका अर्थ यह था कि बिहार उस वक्त पूरे भारत का सिरमौर था। जैसे आपके लिए गुजरात माॅडल ही भारत माॅडल है। बेचारा तक्षशिला पाकिस्तान होने से बिहार बदर हो गया। आपकी जबान फिसले-इसके लिए नामालूम घात लगाकर क्यों बैठे रहते हैं? आपने गुरु गोरखनाथ, कबीर और नानक को एक साथ बैठकर आध्यात्मिक विचार विमर्श करने वाला बता दिया। आप कहना चाहते थे कि तीनों महापुरुष शरीर के साथ नहीं, अपनी अपनी आत्माएं लेकर सहचिन्तन याने संघ की भाषा में बौद्धिकता कर रहे थे। लोग आपको समझते क्यों नहीं मेरे अलावा? जब आपके भक्त सुनने वालों को तकलीफ नहीं होती, तो पढ़े लिखे लोगों को क्यों बुखार चढ़ता है?

नेहरू के नाम से आपको बुखार भले नहीं चढ़े। लेकिन हिचकी आती रहती है। क्या नेहरू ने श्यामाप्रसाद मुखर्जी को संविधान सभा में शामिल कर षड़यंत्र किया था? आपको नेहरू को श्यामप्रसाद की उपेक्षा कहने में असुविधा है! बाबा साहब अम्बेडकर की मदद के बिना संविधान नहीं बन सकता-ऐसा नेहरू ने क्यों कहा? आपको यहां भी बोल्ड कर दिया। बेदखल कर दिया? अपनी ‘आत्मकथा‘ नेहरू ने जानबूझकर पत्नी ‘कमला‘ को समर्पित कर दी। आपको फंसा दिया। अपनी पत्नी की निगाह में नेहरू से बड़ा बनना हो। तो आप ‘आत्मकथा‘ लिखो और जसोदा बेन को समर्पित करो। नेहरू ने देश की दौलत नगदी में नहीं बचाकर बडे़ सार्वजनिक संस्थान बना दिए। उन्हें बाजार दर पर बेचना आपको कितना मुश्किल हो रहा है। वे इतने टूटे फूटे हैं कि बड़ी मुश्किल से अदाणी, अम्बानी, वेदांता, टाटा, एस्सार को पटा पटाकर उन्हें औने पौने में आप बेच पा रहे। नेहरू काजू के आटे की रोटी, मशरूम की सब्जी वगैरह क्यों नहीं खाते थे? आपको मजबूरी में खानी पड़ रही है। 

नेहरू में इतनी भी समझ नहीं थी कि अंग्रेजों, बल्कि मुगलों के वक्त की सभी पुरानी इमारतें गिराकर सेन्ट्रल विस्टा वगैरह दिल्ली में बनवा लेते। बाद में बाजार भाव कितना महंगा हो गया? नेहरू ने गलती से एलोपैथी दवाओं वाला एम्स बना दिया। खुद पतंजलि का पुनरावतार बनाए पड़ा आयुर्वेद सिस्टम का ज्ञानी एलोपैथी सिस्टम के कारण कोविड-19 का इलाज करने वाले डाॅक्टरों द्वारा गरियाया जाता रहा। योग सलवारी ने आपको राष्ट्रऋषि कहा। ट्रम्प आपको राष्ट्रपिता कहता है। आप सभ्य हैं, इसलिए मौन रहते हैं। एम्स दिल्ली को रामदेव सलसारी को लीज़ पर दे दीजिए। लाल किला डालमियां को दिया न आपने? उनसे कहिए अपने नाम से डालमियां शब्द हटा लें। आप एलोपैथी का नाम बदलकर कर दीजिए मृत्युवेद। आयुर्वेद बनाम मृत्युवेद। झगड़ा खत्म। किसी एलोपैथी डाॅक्टर को संस्कृत नहीं आती। अनुलोम विलोम नहीं आता। दाढ़ी नहीं बढ़ाते। लंगोट नहीं पहनते। या देह पर गोबर नहीं लीपते। गो मूत्र नहीं पीते। अध्यादेश ले आइए। सरकारी धन केवल आयुर्वेद से इलाज कराने पर मिलेगा। मृत्युवेद से नहीं। 

आपको नहीं लगता अदाणी अम्बानी के व्यापार पर भी आयुर्वेद की आंख टेढ़ी है। अपनों से धोखा भी होता है न। आपको खुद अटल बिहारी से हो गया था न? मुझे तो आपके लिए अमित शाह, योगी, गडकरी, भागवत सबसे डर लगता है। मैं आपका अंधभक्त होना चाहता रहा लेकिन डाॅक्टर ने दोनों आंखों का मोतियाबिन्द ही निकाल दिया। कहता तुमको मोतियाबिन्द हो रहा है। तब तक मुझे दुनिया दुरंगी दिखाई देती थी। अब तिरंगी क्यों दिखाई देती है? गांधी, नेहरू, इन्दिरा वहां से क्यों झांकने लगते हैं? गांधी, मदन मोहन मालवीय, सरदार पटेल, सुभाष बोस, लालबहादुर शास्त्री पर क्या कांग्रेस की मोनोपली है? आपने ठीक किया। इन सबकी तस्वीरें भाजपा के कार्यालयों में टांग दीं। इतना करिए ये फोटो दीवारों पर ही टंगी रहें। इन्हें पाठ्यक्रम में शामिल मत करिएगा। वरना देश के बच्चे इन्हें पढ़कर बिगड़ जाएंगे। 

        आठवीं क्लास तक पढ़ाना संविधान के कारण सरकार की मजबूरी है। उसके बाद क्यों पढ़ाना, जब संविधान ही नहीं कहता! इन महापुरुषों का अपनी छबि चमकाने में पूरा इस्तेमाल करिए। लोग और कांग्रेस आपसे सीखें। आप सिखाते हैं क्रांति होनी चाहिए लेकिन पड़ोसी के घर से हो। आपके पूर्वज महान भगतसिंह को क्यों नहीं सिखा पाए? क्रांतिकारियों ने अंगरेजों को मारा तो आपके पूर्वज उनके मन्दिर कैसे बनवाते? गांधी को मारते तो उनका बनवा देते! गोडसे भैया का बनाया कि नहीं? लाल बहादुर शास्त्री में लाल, बहादुर और शास्त्री तीनों अच्छे नाम हैं। लेकिन मुगलसराय के मुस्लिम शहर में क्यों पैदा हुए? मुगलसराय ने दीनदयाल उपाध्याय जी को संदेहजनक ढंग से मारा। इसलिए मुगलसराय का नाम आपने दीनदयाल रखकर ठीक किया।

बड़े अच्छे लगते हैं

आप बहुत प्यारे और चतुर व्यावहारिक टाइप के सयाने हैं! जस्टिस गोगोई से मासूमियत में मिलने कैमरे के साथ सुप्रीम कोर्ट चले गए। प्रोटोकाॅल में भले ही उनसे ऊपर थे? आपके गृहमंत्री अमित शाह आपसे एक कदम आगे हैं। गृहमंत्री तथा एक और मंत्री लाल गालीचे पर कई किलो सरकारी वजन का दबाव देते चल रहे थे। गृहमंत्री पेट छिपाते छाती फुलाते रेड कार्पेट को बीचों बीच दलित कर रहे थे। विनम्र बनाए गए राष्ट्रपति को गालीचे के बाहर चलना था। ऐतिहासिक प्रोटोकाॅल हुआ! दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रोटोकाॅल उद्दंडता की। भूल गए संघ के स्वयंसेवक पुत्र हैं। आपसे बातचीत को आई आई टी ज्ञान बघारते पब्लिक डोमेन में लीक कर दिया। आप ठीक बिफरे थे। 

झारखंड के युवा आदिवासी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने भोलेपन में कहा प्रधानमंत्री जी! आप मन की बात बहुत करते हैं। काम की बात भी करें। इस बातचीत को पब्लिक डोमेन में लीक कर दिया। प्रधानमंत्री जी आप किसी मुख्यमंत्री से बात लीक करें। तो प्रोटोकाॅल के तहत होगी। मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से बात लीक करें तो प्रोटोकाॅल का उल्लंघन हो। कपिल मिश्रा आम आदमी पार्टी के सौर मंडल से टूटकर आपकी आंखों का तारा हुआ। विधायक रहते दिल्ली विधानसभा में पहले आपकी निजी जिन्दगी का कच्चा चिट्ठा तो खोला था। फिर भी आपने उसे माफ कर दिया। आप माफ करें या साफ करें, वही होता है। आपके मुंहलगे बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से टेलीफोन की सरकारी बात लीक करते रहे। ममता बनर्जी को नहीं मालूम था राज्यपाल पब्लिक डोमेन में लीक करे। तो प्रोटोकाॅल संविधान पर चढ़ सकता है। 

आपके एक सांस्कृतिक वाक्य का मूर्ख मजाक उड़ाते हैं। उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने मैं सोच रहा हूं। आपने कहा मेरी 56 इंच की छाती है। लोग छाती नापने इंची टेप बाजार से खरीदने लगे। आपने कब कहा कि मेरी 165 सेन्टीमीटर की छाती है। मैं भी भक्तिभाव में फैब इंडिया की दूकान में छप्पन इंची कुर्ता खरीदने चला गया था। फैब इंडिया में छयालीस इंच का कुर्ता सबसे बड़ा होता है। दरअसल आप मुहावरों में इतिहास समझा रहे थे। देश में छप्पन शाकाहारी व्यंजन होते हैं। आपको मालूम है। मांसाहारी दुश्मनों को पता नहीं। वे तो यह भी नहीं जानते कि ‘अब तक छप्पन‘ नाम की फिल्म भी एक क्राइम थ्रिलर है। गुजरात के 2002 के दंगों के क्राइम थ्रिलर की याद में सड़क पर जोर से ‘अब तक छप्पन‘ बोलो। तो अच्छे अच्छे बाथरूम चले जाते हैं। 

बैसवारी के प्रसिद्ध हास्य कवि रमई काका की कविता है ‘‘जब छप्पन के घर घाट भयेन। घर देखुआ आए बड़े बड़े। हम शादी ते इन्कार कीन। सबका लौटारा खड़े खड़े।‘‘ छप्पन वर्ष की उम्र में रमई काका के मानस में रोमांस की मानसी आ गई तो क्या दिक्कत थी? बम्बइया (मुम्बइया नहीं) फिल्मों में तेज़ तर्रार महिला को ‘छप्पन छुरी‘ बोलने का कटाक्ष जबानों पर चढ़ा ही है। आप नौ, दस साल के थे, वडनगर स्टेशन में पचास पैसे की चाय को पांच रुपये में बेचने के वक्त। हम काॅलेज में राजकपूर की फिल्म ‘श्री 420‘ का लोकप्रिय गाना गाते थे। ‘1956, 1957, 1958, 1959‘। 

(27) आपसे बड़ा देशभक्त कोई नहीं है। लोग पैदाइश की जगह को खूंटा समझकर पीढ़ी दर पीढ़ी उससे बंधे रहते हैं। केवल आप विश्व प्रेम की पंचदियों में तैरते हैं। हिमालय चले जाते हैं। उसी श्रद्धा से अमेरिका और चीन जाते हैं। कभी कहते हैं पिछले जनम में हरियाणा में पैदा हुआ था। तमिलनाडु में कहते हैं काश, अगले जन्म में तमिल हो जाऊं। इसी बीच बंगाल से प्रेम हो गया। रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसी दाढ़ी बिलकुल डिजाइन करा ली। लोग अफवाह फैलाते हैं आपकी ब्यूटिशियन को हर महीने ढाई लाख रुपए मिलते हैं। आपके खिलाफ ज़हर उगलते हैं कि आपने गुरु आसाराम को देखकर दाढ़ी बढ़ाई है, गुरुदेव टैगोर को देखकर नहीं। इसी अफवाह ने बंगाली मतदाताओं को भरमा दिया। वहां आसाराम की और गुरुदेव की दाढ़ी को चुनाव का मुद्दा बनाकर ममता का ‘खेला होबे‘ हो गया। गुजराती सूरमा गांधी, वल्लभभाई, मोरारजी सब दाढ़ी मूंछ सफाचट थे। इसीलिए आपके बराबर मशहूर नहीं हो सके इतिहास और करतब में। 

आपके खिलाफ विघ्नसंतोषियों और जलनखोरों की तादाद बढ़ रही है जैसे भाजपा की मिस्ड काॅल का बटन वाली सदस्य संख्या। वोट ममता बनर्जी को दे आती है। आपने अपने समर्थकों को निर्भय बना दिया है और जनता को निर्भया। आपका रुतबा और मर्तबा माउंट एवरेस्ट है। उतनी ऊंचाई से 140 करोड़ ‘मनुष्य चींटी की तरह ही तो दिख सकते हैं!‘ इतना विरोधी नहीं समझते! आपने कह दिया विकलांग को दिव्यांग। लोगों ने उलटबासी कर ली। आज हर दिव्यांग मनुष्य खुद को विकलांग महसूस करता है। आप देशभक्त और धर्मनिरपेक्ष हैं। इसलिए मुसलमानी हरी टोपी नहीं पहनी। फिर देखा भाजपा के झंडे में एक तिहाई हरा रंग है। तुरन्त पहन ली। बिन बुलाए बिरयानी खाते रहिए। अम्मी को बा कहिए। रोज़ा अफ्तार पार्टियों में जाइए। एक मुसलमान चीफ जस्टिस को बड़े हाई कोर्ट के बदले छोटे हाई कोर्ट में भेजें। जो आपके साथ नहीं, उसे मैं देशद्रोही कहता हूं। गिरिराज सिंह को लायसेंस ठीक दिया है। हर देशद्रोही को पाकिस्तान भेजने परमिट जारी करें।

Ramswaroop Mantri

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