प्रमोशन एक्सप्रेस शुरू होने के बीच 5 अफसरों को दी पदोन्नति, क्या मोहन सरकार ने तोड़े अपने ही नियम?
मध्य प्रदेश में 9 साल बाद सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर बड़ा अपडेट आया है। लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के तहत प्रमोशन होंगे। लेकिन इस बीच एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला जिसकी चर्चा है। इसमें 5 तहसीलदार इधर से उधर हुए। लेकिन उनको पदोन्नत कर डेप्युटी कलेक्टर बनाकर हटाया गया।
मध्यप्रदेश में प्रमोशन में रिजर्वेशन की कवायद चलने लगी है। एक महीने के भीतर ही कई विभागों में प्रमोशन होने वाले हैं। इस बीच, सामान्य प्रशासन विभाग में हुआ एक वाकया चर्चा में है। विभाग ने खुद पांच तहसीलदारों को प्रभारी डिप्टी कलेक्टर बना दिया है। 9 जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव ने सबको चौंका दिया।
दरअसल, ये पदस्थापनाएं पुराने सिस्टम के तहत कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर की गई हैं। वहीं, दूसरी तरफ जीएडी खुद कह चुका है कि अब सभी पदोन्नति नई व्यवस्था के मुताबिक ही की जाएंगी। खास बात यह है कि राज्य में नए पदोन्नति नियम के तहत प्रमोशन देने की चर्चाएं चल रही है।
प्रमोशन के लिए लागू होगा नया नियम
आपको बता दें कि राज्य सरकार ने हाल ही में लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 लागू किया है। साथ ही सभी विभागों को 31 जुलाई तक इन्हीं नियमों के तहत पदोन्नति आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इसके पहले पुराने नियम के तहत पदोन्नत किया गया है। इसके हिसाब से शासन ने अलका एक्का जो कि बैतूल की तहसीलदार थीं, अब उन्हें ताजा आदेश में पांढुर्णा में प्रभारी डेप्युटी कलेक्टर बनाया गया है।
5 तहसीलदारों को पदोन्नत कर डेप्युटी कलेक्टर
आलोक वर्मा आगर मालवा में तहसीलदार थे, जिन्हें शाजापुर में प्रभारी डेप्युटी कलेक्टर बनाया गया है। छतरपुर के तहसीलदार अनिल कुमार तलैया को अब पन्ना में प्रभारी डेप्युटी कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई। जबकि बालकृष्ण मिश्रा जो कटनी में तहसीलदार थे, उन्हें सतना का प्रभारी डेप्युटी कलेक्टर बना दिया गया है। ग्वालियर के तहसीलदार अनिल राघव को वहीं का प्रभारी डेप्युटी कलेक्टर का प्रभार दिया गया है।
ऐसे में सवाल यह उठ रहे हैं कि पुलिस विभाग ने जीएसडी के नए नियमों के बाद कार्यवाहक पदोन्नति की प्रक्रिया रोक दी है। लेकिन अब जीएडी ने खुद ही पुराने नियमों के आधार पर ये पदस्थापनाएं कर दीं हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर FIR, लगा है गंभीर आरोप
अशोकनगर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने गजराज लोधी नामक एक युवक को मानव मल खिलाने का झूठा बयान देने के लिए उकसाया था।अशोकनगर: जिले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ FIR दर्ज हुआ है। आरोप है कि पटवारी ने एक युवक को मानव मल खिलाने का झूठा बयान देने के लिए उकसाया था और उस घटना का वीडियो वायरल किया था। पुलिस ने युवक की शिकायत पर मामला दर्ज किया है।
दरअसल, मुंगावली पुलिस स्टेशन में शुक्रवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई। पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस बात की जानकारी दी। विज्ञप्ति में बताया गया कि 26 जून 2025 को गजराज लोधी नाम के एक व्यक्ति ने अशोकनगर के कलेक्टर के सामने पेश होकर एक शपथ पत्र दिया।
लोधी ने कहा- किनारे ले जाकर किया सौदा
शपथ पत्र में गजराज लोधी ने बताया कि कुछ कांग्रेस नेता उसे और उसके भाई को जीतू पटवारी से मिलवाने ओरछा ले गए थे। वहां, जीतू पटवारी उसे भीड़ से अलग ले गए। गजराज के अनुसार, “जीतू पटवारी ने उससे कहा कि तुम यह कहना कि तुम्हें मानव मल खिलाया गया है।” इसके बदले में उसे कुछ फायदे देने का भी वादा किया गया था। इसलिए गजराज लोधी ने मानव मल खिलाने की झूठी बात कही, जिसका जीतू पटवारी ने वीडियो बनवा लिया। जबकि असल में गजराज लोधी के साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी।
झूठे सबूत गढ़ने का आरोप
पुलिस ने बताया कि गजराज लोधी के शपथ पत्र से पता चलता है कि जीतू पटवारी और अन्य लोगों ने गजराज लोधी के बारे में झूठे सबूत गढ़कर वीडियो वायरल करवाया। पुलिस के अनुसार, इससे समुदायों के बीच दुश्मनी फैलने की आशंका है। इसी वजह से मुंगावली पुलिस स्टेशन में जीतू पटवारी और अन्य लोगों के खिलाफ धारा 61 (2), 196 (1) (A), 197 (1) (c), 229(2), 237, 353 (1) (c) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अर्जुन बड़ौद पर 36 घंटे से लगा जाम, 6 किमी की दूरी तय करने में 2 घंटे, किसान की मौत
20 फीट की सर्विस रोड़ से वाहनों की आवाजाही हो रही है। दो से तीन लाइन में वाहन कतार लगाकर खड़े हैं। खास बात यह है कि डकाच्या से लेकर क्ष्रिप्रा तक ट्रकों की संख्या अधिक है। ये सभी भोपाल, आगर और राजस्थान जाने वाले है। जाम लगने से ये वाहन सड़क किनारे पर खड़े हो गए हैं।

इंदौर-देवास बायपास पर अर्जुन बड़ौद पुल का निर्माण के चलते ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह चरमारा गई है। गुरुवार दोपहर तीन बजे से यहां जाम लगा हुआ है, जो शुक्रवार शाम तक नहीं खुल पाया है। 36 घंटे से जाम लगा हुआ है। ट्रक से लेकर कार और डम्पर सहित सभी वाहनों के पहिए थम गए हैं।
दूर-दूर तक सिर्फ वाहनों की कतारें देखने को मिल रही है। डकाच्या से लेकर अर्जुन बडौद के बीच की दूरी महज छह किमी है, लेकिन इस छोटी से दूरी को तय करने में चालकों को घंटों का समय लगा रहा है। जाम की वजह से एक किसान दर्दनाक मौत हो गई।
व्यवस्था बिगड़ने के बावजूद जिम्मेदार स्थिति को संभालने के लिए सड़क पर नजर नहीं आए। लोगों का कहना है कि ट्रैफिक जाम को क्लियर करने में कोई मदद नहीं कर रहा है। यहां तक कि एंबुलेंस को भी निकलने के लिए रास्ता नहीं है।
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दो तरह से करेंगे ट्रैफिक को डायवर्ट
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल से सीधी बात
– अर्जुन बड़ौद ब्रिज पर जाम की स्थिति क्यों बनी?
ब्रिज का निर्माण के लिए ट्रैफिक को सर्विस लेन पर डायवर्ट कर रखा है। यहां तीन मार्ग का ट्रैफिक आने लगा है। इस वजह से सर्विस लेन पर वाहनों की संख्या बढ़ गई है और जाम लगा रहा है।
– डायवर्शन पर बड़े-बड़े गड्ढों को क्यों नहीं भरा गया?
निर्माण एजेंसी को डायवर्शन की सर्विस लेन ठीक करने के निर्देश दिए थे। गड्ढों को भरने के लिए डामरीकरण किया गया। मगर ट्रैफिक अधिक होने से तुरंत लेन को खोलना पड़ा।
– अब डायवर्शन को लेकर क्या प्लान बनाया है?
अर्जुन बडौद पर अभी एक ही डायवर्शन है। मगर यातायात को देखते हुए वाहनों को अलग-अलग दो दिशा में डायवर्ट किया जाएगा। यह प्लान शनिवार से लागू करेंगे।
– जाम और यातायात को कैसे व्यवस्थित किया जाएगा?
बायपास पर लगने वाले जाम और यातायात की समस्या से निपटने के लिए एक्शन प्लान बनाया है। इस संबंध में पुलिस विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई है। 50 जवान मांगे है, जिनका मानदेय एनएचएआई देगा।
शनिवार को अधिकारियों की बैठक लूंगा यह चिंता का विषय है। मैं इस मामले में अधिकारियों से सतत संपर्क में हूं। शिप्रा से बिचौली मर्दाना तक ट्रैफिक जाम की समस्या है। मैंने वरिष्ठ अधिकारियों से इस समस्या का समाधान तलाशने के लिए कहा है। मैं शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों की इस संबंध में बैठक भी ले रहा हूं।
तुलसीराम सिलावट, कैबिनेट मंत्री मप्र शासन
समाधान तलाशने के लिए कहा है अर्जुन बडौद में बन रहे फ्लाई ओवर की वजह से समस्या खड़ी हो रही है। मैंने अधिकारियों से कहा कि वे इस समस्या का समाधान तलाशें। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी शनिवार को मौके पर जाकर देखेंगे कि क्या किया जा सकता है। मैंने पुलिस विभाग से भी कहा है कि मौके पर पर्याप्त व्यवस्था करें।
शंकर लालवानी, सांसद इंदौर
ट्रैफिक जाम ने ले ली जान, इंदौर से भोपाल तक फंसे हैं लोग, नेता अधिकारी सब गायब
इंदौर-देवास रोड पर लगे जाम ने आखिरकार एक जान ले ही ली। पिछले एक महीने से लोग कई घंटों तक जाम में फंस रहे हैं और लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कहीं कोई सुनने वाला नहीं है। आज जाम में फंसने के बाद एक किसान की जान चली गई लेकिन अभी भी प्रशासन नहीं जागा। इंदौर से भोपाल तक लोग जाम के कारण परेशान हैं। इस रोड पर चलने वाली सभी बसें, ट्रक और गाड़ियां रेंग रही हैं। तीन दिन से लगातार जाम है और सिर्फ देवास पहुंचने में ही लोगों को 5 से 7 घंटे लग रहे हैं।
नेता, अफसर सब गायब, टीआई बोले हम दिनरात सड़क पर खड़े
अमर उजाला टीम ने इंदौर से देवास के रास्ते में इस जाम को कवर किया तो कहीं पर भी पुलिसकर्मी, अधिकारी और जनप्रतिनिधि नजर नहीं आए। कई जगह जनता ही ट्रैफिक संभालती नजर आई। लोग अपनी दुकानों और काम को छोड़कर जाम में फंसे हुए लोगों की मदद करते रहे। लसूड़िया थाने के सामने ही पूरा रोड कई घंटों से जाम था। जब टीआई तारेश सोनी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जितना पुलिस फोर्स दिया गया है वह दिनरात जाम खुलवा रहा है लेकिन जाम फिर भी नहीं रुक रहा है।
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कार में ही चली गई जान
जाम की वजह से किसान की जान चली गई है। किसान का नाम कमल पांचाल (62), निवासी सैटेलाइट टाउनशिप, बिजलपुर है। नजदीकी रिश्तेदारों ने बताया कि गुरुवार को उनकी बहन की तेरहवीं का कार्यक्रम था। इसमें शामिल होने के लिए वे शारदा, पुत्र विजय और बहू प्रियंका के साथ कार में जा रहे थे। तभी अर्जुन बड़ौदा के पास जाम लग गया, जिसमें उनकी कार भी फंस गई। कुछ देर बाद उन्हें घबराहट होने लगी। इस दौरान बेटे विजय ने कार निकालने की कोशिश की, लेकिन वह आगे बढ़ नहीं सकी, क्योंकि वहां से मूव करने तक की जगह नहीं थी। इस बीच वे तड़पते रहे और बेहोश हो गए। करीब डेढ़ घंटे बाद जब जाम खुला तो परिवार के लोग उन्हें उसी कार से देवास के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि जो बाइपास पर हमारी ट्रैफिक की समस्या आ रही है। खासतौर पर सिपरा के पास जो अर्जुन बड़ौत के पास और इसके अलावा रालामंडल पर तो उसपर गहन चर्चा हुई है। क्योंकि इंदौर उज्जैन का जो ट्रैफिक था वो पूरा का पूरा इसी रोड पर आ रहा है। इसके अलावा मांघिया के पास जो ओवरब्रिज बन रहा है। उसका भी ट्राफिक यहां पर आने के कारण दवाब बहुत है। साथ ही केवल सर्विश रोड पर ट्रैफिक चल रहा है कि क्योंकि एनएच का काम वहां पर चल रहा है। इसके लिए ये समस्या आ रही है। हालांकि अगर एनएचआई के द्वारा जो सर्विश रोड का मजबूती करण का काम पहले और अच्छे तरीके से कर लिया जाता..तो शायद इतनी समस्या नहीं आती। लेकिन फिर भी हम अभी इसे डीएलसी के बाद पेवर ब्लॉक डालकर इसको सही करने की कोशिश कर रहे है।
गिट्टी, मुरम तक नहीं डलवा रहे जिम्मेदार, कच्ची सड़क से लग रहा जाम
बुधवार शाम से शुरू हुआ यह जाम आज रात तक भी नहीं खुल सका है। इस ट्रैफिक-जाम ने एक जान भी ले ली है। आसपास के रहवासी कई महीनों से आवाज उठा रहे हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। रहवासियों ने बताया कि अर्जुन बड़ौदा के पास बन रहे ब्रिज पर जाम लग रहा है। यहां से डायवर्जन रोड निकालना थी लेकिन उसे बनाया ही नहीं गया। मुख्य मार्ग लगभग बंद है और लोगों को निकलने का रास्ता गड्ढे और पानी से भरा है। सिर्फ गिड्डी और मुरम डालकर भी रोड को ठीक कर देते तो यह हालात नहीं होते।
पुलिस का दावा: ‘राजा रघुवंशी की हत्या करने वाले दो आरोपी कबूलनामे से मुकरे, मजिस्ट्रेट के सामने साधी चुप्पी’
राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में हनीमून मनाते समय लापता हो गए थे। उनका शव 2 जून को एक घाटी में सड़ी-गली हालत में मिला था। सोनम ने 9 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में आत्मसमर्पण किया था। मामले में पुलिस ने कुछ अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था।

पिछले महीने मेघालय में सोनम रघुवंशी को उसके पति राजा रघुवंशी की हत्या में मदद करने वाले तीन लोगों में से दो ने अपने पहले के बयान से किनारा कर लिया है। पुलिस के सामने अपराध कबूल करने वाले दो आरोपी अब पलट गए हैं। उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने खुद खिलाफ गवाही देने से इनकार कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से यह दावा किया जा रहा है। शिलांग शहर के पुलिस अधीक्षक हरबर्ट पिनियाड खारकोंगोर, जो हत्या की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) का नेतृत्व कर रहे हैं, ने बताया कि आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी ने चुप्पी साध ली है। उन्होंने गुरुवार को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने पर कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने बताया, ‘हमने पांच आरोपियों में से केवल दो को मजिस्ट्रेट के पास भेजा। वे कोई बयान नहीं देना चाहते थे। हमारे पास उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। हम एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट का भी इंतजार कर रहे हैं।’ इससे पहले मेघालय पुलिस ने पहले दावा किया था कि सभी आरोपियों ने अपराध कबूल कर लिया है।
पुलिस के इकबालिया बयान अदालत में स्वीकार्य नहीं
खारकोंगोर ने बताया कि पुलिस के इकबालिया बयान अदालत में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘यह उनका अधिकार है कि वे इकबालिया बयान न दें, लेकिन भौतिक साक्ष्य भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। कोई मुद्दा नहीं है। हमारे पास मामले में सबूत हैं।’ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 180 के तहत दर्ज किए गए बयान जांच और जिरह के दौरान अधिकारियों की मदद करते हैं, लेकिन धारा 183 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए बयान ही अदालत में मान्य होते हैं।
लापता की तलाश के बीच चौंकाने वाला खुलासा
आनंद और आकाश के अलावा विशाल सिंह चौहान ने पिछले महीने सोनम और उसके प्रेमी राज कुशवाह को राजा रघुवंशी की हत्या करने में सहायता की थी। सोनम और राजा हनीमून के लिए मेघालय आए थे। मामला लापता दंपती को लेकर शुरू हुआ था, जब 29 वर्षीय राजा और 24 वर्षीय सोनम का पूर्वोत्तर राज्य में पता नहीं चल पाया। बाद में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
शादी, हत्या और साजिश
इंदौर के रहने वाले इस जोड़े ने 11 मई को शादी की थी। पुलिस के मुताबिक, सोनम के राज के साथ रिश्ते के बावजूद यह शादी हुई, जो उसके परिवार के स्वामित्व वाली फर्नीचर शीट इकाई में अकाउंटेंट के रूप में काम करता था। सोनम पारिवारिक व्यवसाय की देखभाल करती थी। इंदौर में अपनी शादी के बाद राजा और सोनम हनीमून के लिए मेघालय गए। वे 23 मई को नोंगरियाट गांव में एक होमस्टे से चेक आउट करने के कुछ घंटों बाद गायब हो गए। इसके बाद 2 जून को राजा का शव मिला। लापता सोनम की खोज के बीच वह 8 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में सामने आई और बाद में नंदगंज पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया। इससे कुछ घंटे पहले ही आकाश, विशाल और आनंद को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। राज को बाद में गिरफ्तार किया गया। 11 जून को सोनम ने कथित तौर पर अपने पति की हत्या की बात कबूल की।
तीन और गिरफ्तारियां भी की गईं
इस बीच बीते मंगलवार को मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसॉन्ग (जो गृह विभाग भी संभालते हैं) ने कहा कि पुलिस प्रेम संबंध के अलावा मामले में तीन और गिरफ्तारियों के साथ जांच कर रही है। गिरफ्तार किए गए तीन लोगों में लोकेंद्र सिंह तोमर शामिल हैं, जिन्हें उस फ्लैट का मालिक माना जाता है, जहां सोनम मेघालय से इंदौर लौटने के बाद 26 मई से 8 जून के बीच रुकी थी। प्रॉपर्टी डीलर सिलोम जेम्स, जिन्होंने संबंधित फ्लैट विशाल को किराए पर दिया था और बलबीर अहिरबार उर्फ ‘बल्लू’, जो इलाके का सुरक्षा गार्ड है।
बागेश्वर सरकार की जिंदगी पर हुआ शोध, न्यूजीलैंड के विवि की टीम ने तीन दिन तक समझीं बारीकियां
पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान ऑकलैंड में कथा आयोजन हुआ, जिसमें मैसी विश्वविद्यालय की टीम ने उनके जीवन और आयोजन पर तीन दिन तक शोध किया। टीम ने इंटरव्यू व अनुभव दर्ज किए। अंत में शास्त्रीजी ने उन्हें बालाजी की पट्टिका पहनाकर आशीर्वाद दिया।

बागेश्वरधाम सरकार पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री ने तीन देशों की यात्रा की। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया, फिजी और न्यूजीलैण्ड में उन्हें आम जनता का भरपूर प्रेम मिला तो वहीं इन देशों के जन प्रतिनिधियों ने भी उनका खूब स्वागत किया। अब न्यूजीलैंड से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं हैं जो उनके भक्तों का उत्साह बढ़ाने के लिए काफी हैं।
दरअसल न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में आयोजित हुई कथा के दौरान बागेश्वर महाराज के जीवन और इस आयोजन पर शोध करने के लिए न्यूजीलैंड के प्रसिद्ध विश्वविधालय की टीम यहां पहुची। वेलिंगटन के मैसी विश्वविद्यालय की एक तीन सदस्यीय टीम ओस्कर मरीशन और उनके दो साथियों ने बागेश्वर धाम सरकार के जीवन पर तीन दिनों तक शोध किया। उन्होंने कैमरे के साथ यहां आए भक्तों से उनके अनुभव पूछे। आयोजन की बारीकियों को समझा और बागेश्वर महाराज का इंटरव्यू लेकर उनसे अनेक प्रश्न पूछे। यह टीम तीन दिन तक दिन रात उनके साथ चलती रही और हर छोटी बड़ी घटना को रिपोर्ट करती रही। शोध के अंत में बागेश्वर महाराज ने इस इंटरव्यू के बाद सभी शोधकर्ताओं को बागेश्वर बालाजी की पट्टिका पहनाकर उन्हें अपना आशीर्वाद दिया।
कौन हैं बाबा बागेश्वर
छतरपुर के पास एक जगह है गढ़ा। यहीं पर बागेश्वर धाम है। यहां बालाजी हनुमान जी का मंदिर है। हर मंगलवार को बालाजी हनुमान जी के दर्शन को भारी भीड़ उमड़ती है। धीरे-धीरे इस दरबार को लोग बागेश्वर धाम सरकार के नाम से पुकारने लगे। ये मंदिर सैकड़ों साल पुराना बताया जाता है। अभी बागेश्वर धाम की बागडोर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास है। पं. धीरेंद्र का जन्म 1996 में छतरपुर जिले के गड़ागंज गांव में हुआ था। इनका पूरा परिवार अभी भी गड़ागंज में ही रहता है। पं. धीरेंद्र शास्त्री के दादा पं. भगवान दास गर्ग भी इस मंदिर के पुजारी रहे। कहा जाता है कि पं. धीरेंद्र का बचपन काफी कठिनाई में बीता। जब वह छोटे थे तो परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि एक वक्त का ही भोजन मिल पाता था। पं. धीरेंद्र शास्त्री के पिता का नाम रामकृपाल गर्ग और मां सरोज गर्ग है। धीरेंद्र के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग जी महाराज हैं। वह भी बालाजी बागेश्वर धाम को समर्पित हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पं. धीरेंद्र शास्त्री ने 11 साल की उम्र से ही बालाजी बागेश्वर धाम में पूजा पाठ शुरू कर दी थी। पं. धीरेंद्र शास्त्री के दादा ने चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से दीक्षा ली थी। इसके बाद वह गड़ागंज पहुंचे थे। बागेश्वर धाम प्रमुख पं. धीरेंद्र शास्त्री हमेशा एक छोटी गदा लेकर चलते हैं। उनका कहना है कि इससे उन्हें हनुमान जी की शक्तियां मिलती रहती हैं। वह हनुमान जी की आराधना करने के लिए लोगों को प्रेरित भी करते हैं।

बागेश्वर सरकार की ज़िंदगी पर शोध करने पहुंची न्यूजीलैंड के विश्वविद्यालय की टीम।

बागेश्वर सरकार की ज़िंदगी पर शोध करने पहुंची न्यूजीलैंड के विश्वविद्यालय की टीम।

बागेश्वर सरकार की ज़िंदगी पर शोध करने पहुंची न्यूजीलैंड के विश्वविद्यालय की टीम।
‘वाहिद लाला के लिए मृत्युदंड है जरूरी’, फांसी की सजा सुनाकर कोर्ट ने की टिप्पणी
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार गुप्ता की अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसमें दोषी को फांसी की सजा दिए जाने के साथ ही फैसले में यह भी लिखा गया है कि आरोपी बार-बार ऐसी घटना को अंजाम दे रहा है, जिससे जनहानि हो रही है। अब ऐसी घटना फिर से न हो इसीलिए दोषी को मृत्युदंड देना जरूरी है।कोर्ट ने वाहिद लाला को फांसी की सजा सुनाई है। 25 मार्च 2024 को एटलस चौराहा क्षेत्र में वाहिद ने अपनी पत्नी पर तीन गोलियां चलाकर हत्या कर दी थी। वाहिद लाला पहले भी 1994 और 2008 में दो लोगों की हत्या कर चुका है। वह पत्नी के चरित्र पर शक करता था।

एडीपीओ कुलदीप सिंह भदोरिया ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 25 मार्च 2024 को एटलस चौराहा क्षेत्र में संजीदा बी उर्फ रानी को उसका पति वाहिद लाला उम्र 32 वर्ष निवासी देवास रोड आदर्श नगर एटलस चौराहे पर शरीफ लाला उर्फ गुड्डू के मकान पर ले गया था। वहां उसने लाला को आवाज़ लगाई और जैसे ही घर के लोग बाहर निकले तो उसने संजीदा पर तीन फायर कर दिए। संजदी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में नागझिरी थाना पुलिस ने बेटे फरहान की रिपोर्ट पर पिता वाहिद के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसे सीहोर से गिरफ्तार कर लिया था। वाहिद खूंखार अपराधी था जिसने संजीदा के पहले भी वर्ष 1994 में तराना और वर्ष 2008 में खाराकुआं थाना क्षेत्र में दो लोगों की हत्या कर दी थी। इसीलिए पूरे मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया और नागझिरी थाना प्रभारी कमल निगवाल ने जल्द से जल्द चालान और सबूत न्यायालय में पेश कर दिए। जिसके बाद न्यायालय में पेश किए गए साक्ष्य एवं तर्कों से सहमत होकर वाहिद लाला को फांसी की सजा सुनाई गई है।
पत्नी पर करता था चरित्र शंका
बताया जाता है कि वाहिद लाला पत्नी संजीदा बी के चरित्र पर शंका करता था। अपनी इसी शंका के चलते वह एटलस चौराहे पर रहने वाले शरीफ लाला के घर पहुंचा था, जहां उसने प्रेम प्रसंग के चलते शरीफ के घर के सामने संजीदा को गोली मार दी थी।
ऐसे सबूत जुटाए की जल्द आ गया फैसला
नागझिरी थाना प्रभारी कमल निगवाल ने 80 दिन में चालान पेश कर कोर्ट के सामने केस डायरी और सबूत पेश किए थे। इस मामले में लोक अभियोजक मिश्रीलाल चौधरी द्वारा पैरवी की गई और प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन राजेंद्र कुमार खांडेकर एवं एडीपीओ उमेश सिंह तोमर ने कैस की मजबूती के लिए विधिक अनुसंधान और सबूत संकलन में पुलिस को बारीकी से मार्गदर्शित किया था।
फास्टट्रैक कोर्ट में प्रकरण रखकर सजा दिलवाने का कर रहे प्रयास : एसपी
एसपी प्रदीप शर्मा का कहना है कि हमारा प्रयास है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से हम जल्द से जल्द अपराधियों को सजा दिलाई इस वर्ष हमने लगभग 80 प्रतिशत चिन्हित मामलों में आरोपियों को सजा दिलवाई है आगे भी हमारा यही प्रयास है।
80 दिन में चालान पेश
पुलिस ने मामले में 80 दिन के अंदर चालान पेश किया। न्यायालय ने इस मामले में जब देखा तो पाया आरोपी खूंखार अपराधी है। जिसने 1994 में अपने एक परिचित की तराना तहसील क्षेत्र में हत्या कर दी थी। दूसरी हत्या शहर के खारकुंआ क्षेत्र में की। इस मामले में दोनों के बीच समझौता कर बरी हो गया। अब तीसरी बार हत्या पत्नी की कर दी।
कोर्ट की टिप्पणी- ऐसे खूंखार अपराधी को मृत्युदंड जरूरी
उज्जैन जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को कोट करते हुए लिखा है कि जो व्यक्ति जिस पर प्रभाव रखता हो अथवा जो उस पर विश्वास करता है, उसे मारने की धमकी देता है व मारता है तो ऐसा व्यक्ति इस तरह की घटना को दोबारा भी अंजाम दे सकता है। इस तरह का अपराध करने वालों के लिए मृत्युदंड जरूरी है।





