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बिहार में दो डिप्टी सीएम के मायने, बीजेपी का ओबीसी और ऊंची जाति का संयोजन

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पटना: बिहार में महागठबंधन की सरकार का अंत हो गया है। नीतीश कुमार के शब्दों में उन्होंने पिछली सरकार को खत्म कर दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि अब यहीं रहेंगे। सियासी जानकार मानते हैं कि बीजेपी इन दिनों अपना हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रही है। जानकारों की मानें, तो पार्टी ने सबसे पहले दो नेताओं को नीतीश के आगे-पीछे डिप्टी सीएम के रूप में लगा दिया है। पहले नेता विजय कुमार सिन्हा हैं। ये भूमिहार समाज से आते हैं। दूसरे नेता सम्राट चौधरी, जो लव-कुश समीकरण को साधते हैं। अपनी आक्रामक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। जाहिर है, बीजेपी ने ओबीसी और ऊंची जाति के संयोजन के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। बीजेपी को पता है कि लोकसभा चुनाव मुश्किल से कुछ महीने दूर हैं।

नीतीश पर नियंत्रण की बात!

नीतीश के नेतृत्व वाले एनडीए ने 2020 का विधानसभा चुनाव भी एक साथ जीता था। जिसके बाद भाजपा ने ओबीसी वैश्य नेता तारकिशोर प्रसाद और ईबीसी नोनिया नेता रेनू देवी को डिप्टी सीएम नियुक्त किया था। वे अगस्त 2022 तक अपने पद पर बने रहे। उसके बाद 9 अगस्त, 2022 को नीतीश कुमार आरजेडी के पाले में चले गए। तब तक दोनों नेता डिप्टी सीएम बने रहे। बीजेपी का पिछला ओबीसी-ईबीसी प्रयोग असफल रहा था। पार्टी ने नीतीश पर लगातार हमला करने वाले सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को डिप्टी सीएम बना दिया है। चौधरी अब काम में व्यस्त रहेंगे। पार्टी को उम्मीद है कि अपनी नई भूमिका में ये लोग नीतीश के प्रतिनिधि के रूप में काम करेंगे। अपनी आक्रामकता भी कम करेंगे। जरूरत पड़ने पर पार्टी का इशारा होते ही, जेडीयू प्रमुख यानी नीतीश कुमार को काबू में भी रखेंगे।

दो डिप्टी सीएम के मायने

बीजेपी सीएम के रूप में नीतीश कुमार को उनकी प्रधानता बनाए रखने देना चाहती है। हालांकि, सियासी गलियारे में ये भी चर्चा है कि दोनों डिप्टी सीएम बने नेता सुशील कुमार मोदी की तरह तो नहीं हो सकते। ये बयानों के वीर हैं। कुछ न कुछ बोलते ही रहेंगे। भाजपा एनडीए में वरिष्ठ भागीदार है, जिसके पास 243 सदस्यीय विधानसभा में 78 विधायक हैं, जबकि जदयू) के 45 विधायक हैं। सम्राट चौधरी को भाजपा के नेता के रूप में चुनने का एक अन्य संभावित कारण एक कुशवाहा नेता को सबसे आगे रखकर नीतीश का मुकाबला करना है। नीतीश, जिन्हें ओबीसी कुर्मी-कोइरी (लव-कुश) वोट बैंक के प्रमुख दावेदार के रूप में जाना जाता है। उनके जातिगत राजनीति वाले तोड़ के लिए सम्राट चौधरी को आगे किया गया है।

बीजेपी से जुड़े सूत्र कहते हैं कि चौधरी को आगे बढ़ाने का भाजपा का एक कारण उन्हें राज्य की राजनीति में आगे किए रहना है। सम्राट चौधरी को बीजेपी बहुत कुछ सोच समझकर आगे बढ़ा रही है। सम्राट को इस बार महत्वपूर्ण भूमिका देना जरूरी था। इससे कार्यकर्ताओं में एक अच्छा संदेश जाएगा। दूसरी बात की पार्टी नीतीश को अपने साथ लेकर लोकसभा चुनाव को साधने की कवायद में जुटी है। इसका ताजा प्रमाण है, जेपी नड्डा का बयान जो उन्होंने पटना में दिया। नड्डा ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से बिहार के विकास को गति मिलेगी। अब बिहार विकास की ओर अग्रसर होगा। नड्डा ने कहा कि बिहार में जनता ने एनडीए को जनादेश दिया था और अब डबल इंजन की सरकार राज्य का विकास करेगी। उन्होंने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि नीतीश कुमार फिर से एनडीए में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी बिहार में एनडीए की सरकार बनी है स्थिरता आई है और डबल इंजन का बेहतर प्रभाव रहेगा। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि एनडीए लोकसभा चुनाव में स्वीप करेगी तथा विधानसभा चुनाव में भी एनडीए की सरकार बनेगी।

Ramswaroop Mantri

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