अग्नि आलोक
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*मानसिकता न हो प्रदूषित?*

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विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाओं के संदेश प्राप्त हुए। अधिकांश संदेश फॉरवर्ड किए हुए प्राप्त हुए। जिन लोगों ने मुझे फॉरवर्ड किए हैं निश्चित ही उन्हें भी किसी ने फॉरवर्ड किए होंगे।
पता नहीं फॉरवर्ड करने वालों ने संदेश पढ़े भी या नहीं?
पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी मनाया जाएगा।
हम मदर्स डे,फादर्स डे, और बहुत day प्रति वर्ष मनाते हैं।
मदर्स डे और फादर्स डे के दिन मुझे वृद्धाश्रम का स्मरण होता है।
सर्वसुविधा युक्त वृद्धाश्रम निर्मित किए जा रहे हैं। जहां सारी सुविधाएं तो उपलब्ध है सिर्फ आत्मीय जनों की अनुपस्थिति खलती है। वृद्धाश्रम में भर्ती किए वृद्धजन कहते हैं,यह हमारा बुढ़ापा नहीं यह तो कुढ़ापा है।
आत्मीय जन कठोर नहीं है,लेकिन उनके पास अपने वृद्धजनों की सेवा शुश्रूषा के लिए समय नहीं है। समय के अभाव के कारण व्यापार उद्योग में मुनाफा प्राप्त करने के लिए अपने Chartered Accountant के साथ दिमागी कसरत करने में व्यस्त होना, सामाजिक संगठनों में सक्रियता,अभाव ग्रस्त लोगों की मदद के लिए बनाए गए ट्रस्ट के ट्रस्टी के दायित्व का निर्वाह करना। सामाजिक,सांकृतिक,साहित्यिक,खेल और अन्य गतिविधियों की अध्यक्षता करना आदि।
यह विषयांतर नहीं है।
उपर्युक्त मुद्दा सभी जागृत लोगों को पर्यावरण पर व्यापक विचार-विमर्श, चिंतन -मनन करने के लिए बाध्य करता है।
पर्यावरण को प्रदूषण से प्रदूषित होने से बचाने के लिए, अपने समन्यज्ञान का उपयोग करना पड़ेगा।
जब हम अपने सामान्यज्ञान का उपयोग करने लगेंगे तब हमें वायु, ध्वनि,के साथ दकियानूसी विचारों संकीर्ण सोच,अंधश्रद्धा,धर्मांधता सांप्रदायिक वैमनस्यता,भ्रष्ट आचरण,बारिश के मौसम में बहुत सी जगह सड़कों पर जल जमाव होने से दुपहियाँ वाहनों के फिसलने पर वाहन और वाहन चालक के क्षतिग्रस्त होने के साथ जल जमाव में मच्छरों के जमघट के कारण बीमारी फैलना भी प्रदूषण ही तो है।
अपने कर्तव्य के प्रति उदासीनता झूठी खबरें फैलाना,इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत कर भ्रम फैलाने का प्रदूषण, उक्त सभी प्रदूषण का मुख्य कारण विघ्न संतोषी मानसिकता है।
इसी मानसिकता को बदलने के लिए हमें अपने सामान्य ज्ञान का उपयोग करना अनिवार्य है।
गंदे नाले को साफ करने के कार्य को प्राथमिकता देने बजाए, मच्छर या कीट नाशक औषधि का उत्पादन करना व्यापारिक मानसिकता है।
यही मानसिकता हमें उन विज्ञापनों में दिखाई देती है,जो बेशकीमती विशालकाय विज्ञापन
अपनी थोथी प्रसिद्धि के लिए प्रकाशित और प्रसारित किए जातें हैं?
मानसिक प्रदूषण समाप्त करने का एक मात्र उपाय है,सामन्यज्ञान को जागृत करना और उसका निर्भीकता से उपयोग करना।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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