डॉ. प्रिया मानवी
_माइग्रेन एक प्रकार का सिरदर्द है, जो बार-बार होता रहता है। यह दर्द बहुत गंभीर होता है। व्यक्ति को मध्यम से लेकर तेज सिरदर्द का अनुभव हो सकता है। माइग्रेन के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, ज्यादातर डॉक्टर ये मानते हैं कि माइग्रेन अनुवांशिक कारण से होता है।_
इसके अलावा, ऐसे कई कारक हैं, जिनसे माइग्रेन का सिरदर्द हो सकता है। ये कारक हैं, स्ट्रेस, हार्मोन असंतुलन, शोर वाला वातावरण, तेज गंध वाले परफ्यूम, नींद पूरी न होना, मौसम में अचानक या बहुत ज्यादा बदलाव आना और उत्तेजित करने वाले पदार्थ लेना, जैसे कैफीन या शराब।
_कुछ खाने की चीजें, जैसे खमीर और प्रोसैसेड पदार्थ से भी माइग्रेन का सिरदर्द शुरू हो सकता है।_
माइग्रेन होने का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जिनके परिवार के किसी सदस्य को माइग्रेन है।
_माइग्रेन का अटैक 4 से 72 घंटों तक रह सकता है और आपको इसके अलग-अलग चरण अनुभव हो सकते हैं, हालांकि ऐसा जरुरी नहीं है कि व्यक्ति को एक के बाद एक सारे चरण अनुभव हों। माइग्रेन के चार चरण होते हैं :_
*पहला चरण (प्रोड्रोम):*
ये चरण कुछ घंटों से दिनों तक रहता है।
*दूसरा चरण (ऑरा):*
इस चरण में लक्षण पांच मिनट से एक दिन तक रहते हैं।
*तीसरा चरण (हेडेक):*
ये चरण चार घंटों से 3 दिनों तक रह सकता है।
*चौथा चरण (पोस्टड्रोम):*
इस चरण में लक्षण एक से दो दिन तक अनुभव होते हैं।
माइग्रेन से संबंधित सिरदर्द और अन्य लक्षण आमतौर पर सिर के एक ही हिस्से में सीमित रहते हैं और ज्यादातर इसके साथ अन्य लक्षण भी अनुभव होते हैं, जैसे मतली, धुंधला दिखना, चिड़चिड़ापन और बार-बार मूड बदलना।
_माइग्रेन का पता लगाने के लिए अक्सर लक्षणों और नसों का परीक्षण किया जाता है। माइग्रेन के इलाज का अभी तक पता नहीं चल पाया है, इसीलिए इसके उपचार में लक्षणों की गंभीरता को कम करने और असुविधा घटाने पर ध्यान दिया जाता है।_
माइग्रेन के लिए किए जाने वाले सामान्य उपचार में पेन किलर दवाओं का उपयोग किया जाता है और रोगी की जीवनशैली में कुछ बदलाव किए जाते हैं।
ऐसी कुछ होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध हैं, जिनसे माइग्रेन के लक्षण सुधारे जा सकते हैं, जैसे बेलाडोना (Belladonna), जेल्सीमियम (Gelsemium) और नक्स वोमिका (Nux Vomica) आदि। ये दवाएं कारण के आधार पर अलग-अलग प्रकार के सिरदर्द को ठीक करने में काम आती हैं।
*होम्योपैथी में माइग्रेन का इलाज*
माइग्रेन और सिरदर्द के होम्योपैथिक उपचार को काफी अच्छा माना जाता है, क्योंकि ये माइग्रेन करने वाले कारण को ठीक करता है। सिरदर्द के लिए सही होम्योपैथिक दवा चुनने के लिए, अलग-अलग कारक पर ध्यान देना और उनका अवलोकन करना चाहिए।
ध्यान देने योग्य सबसे मुख्य कारक हैं, सिरदर्द होने का समय और सिरदर्द को उत्तेजित करने वाले कारण। इसके बाद दर्द होने की जगह पर ध्यान दिया जाता है।
_ज्यादातर मामलों में, लोगों को सिर की एक ही तरफ दर्द होता है, जो नीचे की तरफ गर्दन की मांसपेशियों तक फैलता है। इसके अलावा, दर्द की भावना या उसके प्रकार को भी ध्यान में रखा जाता है। कुछ लोगों को तेज दर्द होता है और ऐसा महसूस होता है, जैसे कोई उनके सिर में छुरा भौंक रहा हो।_
कुछ लोगों को सिर फटने वाला दर्द होता है, जो अन्य जगहों पर भी फैल जाता है। होम्योपैथिक दवा देने से पहले, दर्द के अलावा इसके साथ होने वाले अन्य लक्षणों का भी ध्यान रखा जाता है।
सामान्य तौर पर किए जाने वाले उपचार के विपरीत, होम्योपैथी में लक्षण के कारण को ठीक किया जाता है, जिससे दोबारा ये समस्या होने से बचाव होता है।
होम्योपैथिक उपचार में दवाएं व्यक्ति के लक्षणों और उसके जीवन के अलग-अलग पहलू के आधार पर दी जाती है। इन दवाओं को बहुत ही कम मात्रा में दिया जाता है, जिससे इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।
होम्योपैथिक दवाएं देने से पहले डॉक्टर व्यक्ति को कोई बीमारी होने की संभावना और उसके चिकिस्ता इतिहास का अच्छे से अवलोकन करते हैं, इसीलिए ये दवाएं बहुत ही सुरक्षित हैं।
_ हालांकि, उचित और सुरक्षित इलाज के लिए एक योग्य होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरुरी है।
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